महाकाल के गर्भगृह में बिना अनुमति पहुंचे वीवीआईपी, कहा-भावनाओं में बहकर चले गए

Aman Vaishnav | Feb 16, 2026, 10:49 IST
bjp mps sister mayor entered mahakals sanctum without permission
महाशिवरात्रि के दिन महाकालेश्वर मंदिर में कैबिनेट मंत्री और वीवीआईपी लोगों का बिना अनुमति के गर्भगृह में प्रवेश हुआ। इस घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि वीवीआईपी लोग कब जिम्मेदारी समझेंगे।

महाशिवरात्रि के दिन रविवार, 15 फरवरी को भस्मारती से पहले कैबिनेट मंत्री ने महाकाल के गर्भगृह में जाकर जल चढ़ाया था। वहीं दोपहर में सांसद की बहन योगेश्वरी फिरोजिया और महापौर मुकेश टटवाल बिना अनुमति के महाकाल के गर्भगृह में पहुंच गए थे।



वीवीआईपी लोग कब जिम्मेदारी समझेंगे?

इसके पहले सुबह कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी गर्भगृह में जाकर जल चढ़ाया था। पूरे दिन मंदिर के गलियारों में ये चर्चा होती रही कि आम जनता ने तो समझदारी दिखाई और बैरिकेड्स में कतार में लगकर दर्शन किए हैं। वीवीआईपी लोग कब जिम्मेदारी समझेंगे।



वीआईपी व्यवस्था देखकर नाराज हुए सांसद

मंदिर में वीआईपी व्यवस्था देखकर सांसद अनिल फिरोजिया को गुस्सा आ गया। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई और बैरिकेड्स के पीछे से दर्शन करने चले गए। मंदिर के अफसरों ने उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं माने।



दरअसल वह दोपहर में तहसील पूजा के दौरान मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान जब जिला अफसरों को पूजा कराई जा रही थी। आम लोग बैरिकेड्स से दर्शन कर रहे थे इस बात पर सांसद काफी नाराज हो गए।



भावनाओं में बहकर चली गई थी

सांसद की बहन डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया ने कहा कि भावनाओं में बहकर गर्भगृह में चली गई थी। इसके लिए मुझे खेद है। उस वक्त मेरे सामने मेरे पिता महादेव थे और मेरी मां भी साथ में थीं। इसलिए मुझे सिर्फ बाबा ही नजर आ रहे थे और परिधान का ध्यान नहीं रख पाई। बता दें कि योगेश्वरी फिरोजिया कालिदास संस्कृत अकादमी की उपनिदेशक भी है।



आम श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश बंद

महाकालेश्वर मंदिर की समिति ने 4 जुलाई 2023 से मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया था। सावन के महीने में मंदिर में भीड़ बहुत ज्यादा हो गई थी। इसलिए इसे अस्थाई रूप से बंद किया गया था। बाद में इसे आम दर्शन के लिए फिर से नहीं खोला गया है।



इस मुद्दे पर पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। हाल ही में हाईकोर्ट ने कहा था कि इस फैसले पर कलेक्टर ही अनुमति दे सकते हैं।



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