बड़बोले प्रीतम लोधी पर पार्टी सख्त, नोटिस देकर तीन दिन में मांगा जवाब

Sanjay Dhiman | Apr 22, 2026, 18:20 IST
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मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने विधायक प्रीतम लोधी को अनुशासनहीनता पर नोटिस थमाया। पार्टी ने 3 दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। जानें क्या है पूरा मामला।

भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का बड़बोलापन अब उनके लिए मुसीबत का सबब बन गया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनके विवादित बयानों को लेकर फटकार लगाते हुए तीन दिन में जबाव मांगा है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि अनुशासनहीनता अब बर्दाश्त नहीं होगी।



क्या है पूरा मामला? क्यों मिला नोटिस?

बीते कुछ दिनों से करैरा एसडीओपी आईपीएस आयुष जाखड़ को लेकर प्रीतम लोधी के विवादित बयान चर्चा में हैं। उन्होंने IPS जाखड़ को लेकर तुम्हारे डैडी में दम हो तो, बंगला गोबर से भर दूंगा जैसे धमकी भरे बयान दिए थे। पार्टी के अनुसार उनका व्यवहार भाजपा की रीति-नीति के खिलाफ पाया गया है। हेमंत खंडेलवाल ने पत्र में उनके आचरण को 'अत्यंत आपत्तिजनक' बताया है। पार्टी का मानना है कि इससे संगठन की छवि खराब हुई है। इसीलिए उन्हें अपनी सफाई देने के लिए 3 दिन का समय मिला है।



अनुशासन का डंडा: 3 दिन का मिला है अल्टीमेटम

भाजपा आलाकमान ने इस बार तेवर काफी सख्त दिखाए हैं। पत्र में स्पष्ट लिखा है कि जवाब न मिलने पर कार्रवाई होगी। पार्टी प्रीतम लोधी के खिलाफ कड़े अनुशासनात्मक कदम उठा सकती है। मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के कार्यालय से यह निर्देश जारी हुआ है। अब सबकी नजरें लोधी के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।



इन बड़े दिग्गजों को भेजी गई है पत्र की कॉपी

यह केवल एक सामान्य नोटिस नहीं बल्कि बड़ा सियासी संकेत है। इस पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी भेजी गई है। साथ ही संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और अजय जामवाल को भी सूचित किया गया है। प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह को भी इसकी पूरी जानकारी दी गई है। इससे साफ है कि मामला काफी ऊंचे स्तर तक पहुंच चुका है।



प्रीतम लोधी का पुराना विवादों से रहा है गहरा नाता

बता दें कि शिवपुरी के पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी हमेशा अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। ब्राह्मण समाज पर की गई टिप्पणी के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि, बाद में उनकी घर वापसी हुई और उन्होंने चुनाव भी जीता। लेकिन अब अनुशासन का उल्लंघन उन्हें भारी पड़ सकता है।





प्रीतम लोधी के राजनीतिक करियर पर सवाल?

सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या लोधी को निकाला जाएगा? यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो निष्कासन की संभावना भी है। भाजपा फिलहाल जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना भी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है। लोधी का आधार क्षेत्र पिछोर और शिवपुरी जिला माना जाता है।जीरो टॉलरेंस



निष्कर्ष: संगठन की मजबूती सर्वोपरि

हेमंत खंडेलवाल के इस पत्र ने संदेश साफ कर दिया है। भाजपा में व्यक्ति से बड़ा संगठन और अनुशासन माना जाता है। आने वाले तीन दिन मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए अहम हैं। लोधी का स्पष्टीकरण ही तय करेगा कि उनका भविष्य क्या होगा। जनता और कार्यकर्ता अब पार्टी के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।



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