30 अक्टूबर से इंदौर में भाजपा की पदयात्रा, पीयूष गोयल और भूपेंद्र यादव संभालेंगे कमान, कांग्रेस के आरोपों का देंगे जवाब
वहीं, दूसरी तरफ मध्य प्रदेश की खाली राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार चुनने का अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
इंदौर में 30 अक्टूबर से शुरू होगी पदयात्रा
इंदौर में भाजपा की पदयात्रा 30 अक्टूबर को सुबह 10 बजे शुरू होगी। इसका फैसला स्थानीय भाजपा नेताओं की बैठक में लिया गया है। पहले पदयात्रा परदेशीपुरा से पाटनीपुरा तक निकाले जाने की बात सामने आई थी। बाद में इसका दूसरा रास्ता भी चर्चा में आया।
फिलहाल यात्रा का अंतिम रूट स्पष्ट नहीं है। स्थानीय आयोजकों की आधिकारिक जानकारी के बाद ही यह तय होगा कि पदयात्रा किन रास्तों से निकलेगी।
प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और दूसरे भाजपा नेता इस कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे हैं। व्यापारियों के साथ अन्य वर्गों से भी समर्थन जुटाया जा रहा है।
इंदौर के बाद भोपाल में बड़ा कार्यक्रम करने की तैयारी है। जबलपुर में भी पदयात्रा आयोजित करने की योजना है। हालांकि, दोनों शहरों में कार्यक्रम की तारीखें और उनका क्रम अभी स्पष्ट नहीं है।
इंदौर और भोपाल में कौन आएगा, अभी तय नहीं
मध्य प्रदेश में होने वाली भाजपा की पदयात्राओं में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और भूपेंद्र यादव प्रमुख चेहरे होंगे।
चर्चा है कि अगर पीयूष गोयल इंदौर की पदयात्रा में शामिल होते हैं, तो भूपेंद्र यादव भोपाल में कार्यक्रम की अगुवाई कर सकते हैं। वहीं, भूपेंद्र यादव के इंदौर आने पर पीयूष गोयल भोपाल जा सकते हैं।
हालांकि, पार्टी की ओर से अभी दोनों नेताओं की जिम्मेदारी का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।
इन कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश भाजपा के दूसरे वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे।
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने की तैयारी
भाजपा प्रदेशभर में लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ अभियान चला रही है। इसके तहत इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा और जबलपुर सहित सात शहरों में बड़े कार्यक्रम करने की योजना है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। भाजपा इन आरोपों को दुष्प्रचार बताती है।
पार्टी अब पदयात्राओं और Public Outreach के जरिए लोगों तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी में है। इसके लिए बूथ स्तर पर संपर्क किया जाएगा। विद्यार्थियों से बातचीत और मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी देने की भी योजना है।
नवंबर में दूसरे राज्यों में भी इसी अभियान के तहत पदयात्राएं आयोजित की जाएंगी।
हालांकि, चुनावी प्रक्रिया को लेकर दोनों दलों के बीच चल रही बहस में दस्तावेज और प्रमाण भी महत्वपूर्ण रहेंगे। भाजपा को कांग्रेस के आरोपों का जवाब देना होगा, जबकि कांग्रेस को भी अपनी आपत्तियों के समर्थन में ठोस तथ्य सामने रखने होंगे।
मुख्यमंत्री निवास में राज्यसभा उम्मीदवार पर चर्चा
एक तरफ भाजपा पदयात्राओं की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ राज्यसभा की खाली सीट के लिए उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया भी चल रही है। वहीं, 26 अक्टूबर को मुख्यमंत्री निवास पर भाजपा की कोर कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर चर्चा की गई थी।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने करीब दस नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजने पर सहमति की बात कही थी। बैठक में मध्य प्रदेश के नेताओं के साथ दूसरे राज्यों से जुड़े संभावित उम्मीदवारों के नामों पर भी चर्चा हुई। हालांकि, किसे टिकट मिलेगा, इसका अंतिम फैसला दिल्ली में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
बाहरी उम्मीदवार को टिकट मिला तो क्या होगा?
राज्यसभा सीट के लिए मध्य प्रदेश के नेताओं के अलावा दूसरे राज्यों से जुड़े नाम भी चर्चा में हैं। यदि केंद्रीय नेतृत्व किसी बाहरी नेता को उम्मीदवार बनाता है, तो प्रदेश के उन नेताओं की उम्मीदों को झटका लग सकता है, जो लंबे समय से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
वहीं, प्रदेश के किसी नेता को मौका मिलता है, तो स्थानीय प्रतिनिधित्व को मजबूती मिल सकती है। फिलहाल किसी उम्मीदवार का नाम तय नहीं हुआ है। इसलिए बाहरी या स्थानीय उम्मीदवार को लेकर पार्टी के अंदर नाराजगी होने की बात अभी सिर्फ संभावना है, कोई पुष्ट जानकारी नहीं।
राज्यसभा चुनाव के लिए 2 नवंबर तक नामांकन
केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक, नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 2 नवंबर है। उम्मीदवार 5 नवंबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 12 नवंबर को मतदान कराया जाएगा।
यानी भाजपा के पास उम्मीदवार तय करने के लिए सीमित समय है। पार्टी को एक तरफ Rajya Sabha By-Election के लिए नाम तय करना है, तो दूसरी तरफ पदयात्राओं की तैयारियां भी पूरी करनी हैं।
केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी से क्या संदेश देना चाहती है भाजपा?
मध्य प्रदेश में इन पदयात्राओं की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्रियों को देने से साफ है कि भाजपा इन कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर आयोजित करना चाहती है। पार्टी की कोशिश ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं और आम लोगों को अभियान से जोड़ने की है। केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी से संगठन की सक्रियता बढ़ सकती है।
हालांकि, स्थानीय नेताओं के सामने भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। उन्हें कार्यक्रमों की तैयारी, कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
अब नजर 30 अक्टूबर को इंदौर में होने वाली पदयात्रा पर है। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि भोपाल और जबलपुर के कार्यक्रमों की तारीखें कब तय होती हैं और राज्यसभा सीट के लिए भाजपा किसे उम्मीदवार बनाती है।