BMW और मर्सिडीज को 757 किमी दौड़ाकर भेजा! जिला उपभोक्ता आयोग ने ठोका जुर्माना
News in Short
- भोपाल से विशाखापट्टनम भेजी जा रही थी बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज कार।
- बिना अनुमति सड़क पर चलाया गया।
- उपभोक्ता आयोग ने लॉजिस्टिक कंपनी को सेवा में कमी का दोषी माना।
- कंपनी को परिवहन शुल्क और मुआवजा लौटाने का आदेश दिया गया।
News in Detail
भोपाल से विशाखापट्टनम भेजी जा रही दो लग्जरी कारों BMW और मर्सिडीज के साथ लापरवाही का मामला सामने आया है। दोनों कारों को कंटेनर में सुरक्षित पहुंचाने के बजाय बिना ग्राहक की अनुमति के सड़क मार्ग पर चलाया गया। इसके बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग भोपाल ने लॉजिस्टिक कंपनी डीआरएस दिलीप रोड लाइंस लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी ठहराया।
कंपनी पर कार्रवाई
भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने आदेश दिया कि डीआरएस दिलीप रोड लाइंस कंपनी को 60 हजार रुपए का परिवहन शुल्क लौटाना होगा। साथ ही 25 हजार रुपए सेवा में कमी के लिए, 20 हजार रुपए मानसिक कष्ट के लिए और 5,000 रुपए वाद व्यय के रूप में देने होंगे। यह राशि दो महीने के भीतर चुकानी होगी। यदि कंपनी निर्धारित अवधि में राशि नहीं चुकाती तो उस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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ऐसे समझे दोनों मामले
पहला मामला नेशनल इनर्जी ट्रेडिंग एंड सर्विसेस लिमिटेड का है। कंपनी ने अपनी बीएमडब्ल्यू एम340आई एलसीआई एक्सड्राइव शेडो कार को भोपाल से विशाखापट्टनम भेजने के लिए डीआरएस दिलीप रोड लाइंस की सेवाएं ली थीं। इसके लिए 60,000 रुपए का भुगतान किया गया और वाहन को कंटेनर के माध्यम से सुरक्षित पहुंचाने का वादा किया गया।
जब कार विशाखापट्टनम (Visakhapatnam ) में डिलीवर हुई तो मीटर रीडिंग में लगभग 760 किमी का इजाफा हुआ। जांच में पाया गया कि भोपाल से हैदराबाद तक कार को कंटेनर में लाया गया, लेकिन बाद में बिना अनुमति के इसे सड़क मार्ग से चलाया गया।
दूसरी घटना में मर्सिडीज बेंज कार को भी डीआरएस दिलीप रोड लाइंस द्वारा भोपाल से विशाखापट्टनम भेजने का काम सौंपा गया था। हालांकि, डिलीवरी के समय मीटर रीडिंग में वृद्धि देखी गई। जांच में यह सामने आया कि कार को हैदराबाद के पास कंटेनर से उतारकर 757 किमी तक सड़क मार्ग से भेजा गया।
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क्या है कंपनी का तर्क?
डीआरएस दिलीप रोड लाइंस ने यह तर्क दिया कि हैदराबाद के पास रास्ते में एक जुलूस था, जिससे ट्रैफिक बाधित हुआ था। इसलिए समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए कारों को कंटेनर से उतारकर सड़क मार्ग से भेजा गया। हालांकि उपभोक्ता आयोग ने इसे अनुचित और सेवा में कमी माना।
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सर्विसिंग सामान्य गाड़ियों से महंगी
लॉजिस्टिक कंपनी ने कारों को सड़क पर दौड़ाया। इसका असर वाहन की स्थिति और सर्विसिंग लागत पर पड़ा। लग्जरी कारों की सर्विसिंग सामान्य गाड़ियों से महंगी होती है। बिना अनुमति इतनी दूरी तक कार चलाना उपभोक्ता के लिए समस्या बन गया है।