इंदौर पुलिस कमिश्नरी में BNSS 170 में जमकर खेल, हर साल एक हजार को भेज रहे जेल
फरियादी तबरेज अली की इंदौर हाईकोर्ट में लगी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के बाद बीएनएसएस की धारा 170 चर्चा में है। इस पर हाईकोर्ट काफी सख्त हुआ है।
हालत यह है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी खजराना एसीपी ने 18 दिन बाद भी आरोपी को नहीं छोड़ा। इसके बाद एसीपी आशीष पटेल की पेशी लगी और हाईकोर्ट ने यहां तक कह दिया कि इंदौर में नौकरी करनी है या नहीं?
इसके बाद पटेल ने बिना शर्त माफी मांगी। वहीं आंकड़े बता रहे हैं कि इस धारा का जमकर उपयोग हो रहा है।
ऊटपटांग शर्त, NEYU छात्र नेता विवाद
हाल ही में दिल्ली जंतर-मंतर के साथ इंदौर में एनईवाययू के छात्र नेता रैली निकालने वाले थे। लेकिन पुलिस ने 6 नेताओं पर यह धारा लगाकर जेल भेज दिया।
जमानत की शर्त लगाई कि यह नेता किसी सरकारी कर्मचारी की गारंटी लेकर आएं। हाईकोर्ट ने फटकार लगाई और कहा कि कोई भी कर्मचारी क्यों गारंटी देगा। फिर बाउंडओवर पर छोड़ने के आदेश हुए।
पुलिस कमिश्नरी के बाद और तेजी
इंदौर में अधिवक्ता सौरभ त्रिपाठी ने इस मामले में याचिका भी दायर की है। जिसमें इस धारा को लेकर गृह सचिव, इंदौर पुलिस कमिशनर, डीसीपी, एसीपी से जवाब मांगा गया है।
त्रिपाठी ने बताया कि 9 दिसंबर 2021 को इंदौर में पुलिस कमिश्नरी लागू हुई। तब पहले सीआरपीसी की धारा लगती थी और जुलाई 2024 से बीएनएसएस हो गई।
सात हजार से ज्यादा को जेल
आरटीआई के अनुसार पुलिस कमिश्नरी के बाद इंदौर में शांति भंग के नाम पर सात हजार से ज्यादा को जेल भेजा गया है। बीते साल 2300 को जेल भेजा गया था।
एसीपी सराफा अभी तक तीन हजार को जेल भेज चुके हैं। एसीपी अन्नपूर्णा करीब दो हजार को जेल भेज चुके हैं। इंदौर के 12 एसीपी कोर्ट से हर साल औसतन एक हजार को जेल भेजा जा रहा है।
वह भी अपराध नहीं बल्कि अपराध की आशंका और शांति भंग की आशंका में। हाईकोर्ट में लगी याचिका में इसे मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का खुला उल्लंघन बताया गया है।
क्या होती है धारा 170
बता दें कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 पुलिस को बिना वारंट और बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति देती है, यदि वह किसी संज्ञेय (गंभीर) अपराध को करने की योजना बना रहा हो और उसे रोकने का कोई अन्य तरीका न हो। यह पुरानी CrPC की धारा 151 के समान है।
इस धारा की मुख्य बातें...
बिना वारंट गिरफ्तारी: पुलिस अधिकारी को अगर पता है कि कोई व्यक्ति गंभीर अपराध (Cognizable Offence) करने वाला है, तो वह उसे तुरंत हिरासत में ले सकता है।
अपराध रोकना: यह कार्रवाई तभी की जाती है जब पुलिस को लगे कि इस व्यक्ति को गिरफ्तार किए बिना अपराध को रोकना संभव नहीं है।
24 घंटे की सीमा: इस धारा के तहत गिरफ्तार किए गए किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, जब तक कि किसी अन्य कानूनी प्रावधान के तहत उसे आगे रोकना जरूरी न हो।
एक सक्षम जमानत, बाउंडओवर कराकर छोड़ा जाता है, लेकिन यह जमानत की शर्तें कई बार कठोर लगा दी जाती हैं और आरोपी बिना किसी अपराध के जेल में ही रहता है। कई दिनों तक जमानत ही नहीं ली जाती है और कोई न कोई बहाना बनाया जाता है।
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