एमपी मे फैला ठगी का नया वायरस, बॉस स्कैम के जरिए खाली हो रहे बैंक अकाउंट
समझें क्या है पूरा मामला...
- साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका खोजा है, जिसे बॉस स्कैम कहा जाता है।
- ठग सोशल मीडिया से कर्मचारी के बॉस की जानकारी निकालते हैं।
- फिर बॉस के नाम से फर्जी व्हाट्सएप नंबर बनाकर मैसेज भेजते हैं।
- भरोसा जीतने के बाद वे अर्जेंट भुगतान या फर्जी लिंक भेजते हैं।
- इंदौर में एक व्यक्ति ने ऐसी ही ठगी में 1.78 लाख रुपए गंवाए।
साइबर ठगी के तरीके अब पहले से ज्यादा शातिर हो गए हैं। ठग अब कंपनी के अंदर की जानकारी जुटाकर हमला करते हैं। इसी वजह से लोग आसानी से इनके जाल में फंस जाते हैं।
मध्य प्रदेश राज्य साइबर सेल ने इस नए फ्रॉड को लेकर अलर्ट जारी किया है। सेल का कहना है कि यह ठगी खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों को निशाना बना रही है। इसे बॉस स्कैम नाम दिया गया है।
ठग कैसे बनाते हैं शिकार
सबसे पहले ठग सोशल मीडिया खंगालते हैं। वे पता लगाते हैं कि कोई व्यक्ति किस कंपनी में काम करता है। साथ ही उसके वरिष्ठ अधिकारी कौन हैं, यह भी जान लेते हैं।
इसके बाद बॉस के नाम से एक फर्जी व्हाट्सएप नंबर बनाया जाता है। कर्मचारी को मैसेज आता है कि यह मेरा नया नंबर है, इसे सेव कर लो। शुरुआत में सिर्फ सामान्य बातचीत होती है।
भरोसा जीतने का पूरा खेल
अगर कर्मचारी नए नंबर पर कॉल कर पुष्टि करने की कोशिश करे, तो जवाब मिलता है कि अभी मीटिंग में हूं। बाद में बात करूंगा, ऐसा कहकर टाल दिया जाता है।
इसके बाद ठग कंपनी या किसी चल रहे प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी साझा करते हैं। इससे कर्मचारी को पूरा यकीन हो जाता है कि सामने वाला सच में उसका बॉस ही है। कुछ दिन की बातचीत के बाद भरोसा पूरी तरह बन जाता है।
स्क्रीन शेयरिंग एप का खतरा
भरोसा बनने के बाद अपराधी कर्मचारी को एक लिंक भेजते हैं। इस लिंक पर क्लिक करते ही कई बार स्क्रीन शेयरिंग एप इंस्टाल हो जाता है। इससे मोबाइल फोन की पूरी जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती है।
कई मामलों में ठग सीधे बैंक खाते में तुरंत राशि ट्रांसफर करने का निर्देश देते हैं। मैसेज में अर्जेंट, कॉन्फिडेंशियल या अभी भुगतान करें जैसे शब्दों से दबाव बनाया जाता है। कर्मचारी बॉस का आदेश समझकर बिना पुष्टि किए पैसा भेज देता है।
इंदौर में 1.78 लाख की ठगी
बता दें कि शहर के सांवेर क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक व्यक्ति को निशाना बनाया है। उसके बैंक खाते से कुल एक लाख 78 हजार रुपए उड़ा लिए गए। पुलिस ने तकनीकी आधार पर जांच शुरू कर दी है।
सांवेर थाना पुलिस के अनुसार यह घटना 17 से 18 जुलाई के बीच हुई। पीड़ित का नाम अनिल पिता चिंतामण चौधरी है, जो ग्राम कजलाना के रहने वाले हैं। उनकी उम्र 42 साल बताई गई है।
बैंक से राशि कटने का मैसेज आने पर उन्हें धोखाधड़ी का पता चला। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर जांच जारी है।
किन बातों से बचें
- सिर्फ व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर कभी भुगतान न करें।
- नए नंबर या बैंक खाते की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
- अर्जेंट या कॉन्फिडेंशियल शब्दों के दबाव में जल्दबाजी न करें।
- बिना फोन कॉल के किसी भी निर्देश पर भरोसा न करें।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर सेल का कहना है कि सतर्कता ही इस ठगी से बचने का सबसे कारगर तरीका है। किसी भी नए नंबर, बैंक खाते या भुगतान निर्देश की पुष्टि हमेशा फोन कॉल से करें। संभव हो तो आमने-सामने बातचीत करके ही आगे बढ़ें।
बड़े भुगतान के लिए कंपनियों को डुअल अप्रूवल प्रक्रिया अपनानी चाहिए। साथ ही कर्मचारियों को बॉस स्कैम और बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज जैसे फ्रॉड के बारे में नियमित रूप से जागरूक किया जाना चाहिए। यही आदत आगे चलकर बड़े नुकसान से बचा सकती है।
FAQ
- बॉस स्कैम क्या है?
बॉस स्कैम में ठग कंपनी के बॉस के नाम से फर्जी व्हाट्सएप नंबर बनाते हैं। वे कर्मचारी से भरोसा जीतकर अर्जेंट भुगतान की मांग करते हैं। बाद में यह ठगी साबित होती है। - बॉस स्कैम से कैसे बचें?
किसी भी नए नंबर या भुगतान निर्देश की फोन कॉल से पुष्टि करें। सिर्फ व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर पैसा ट्रांसफर न करें। बड़े भुगतान के लिए डुअल अप्रूवल अपनाएं।
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