योजनाओं की मंजूरी मिली, बजट भी पहुंचा..फिर आखिर क्यों अटके हजारों निर्माण कार्य?
ऐसे समझें पूरे मामले को
- पिछले तीन वर्षों में 9,449 आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत।
- 3,724 भवनों का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ।
- पीएम जनमन और धरती आबा योजना में भी धीमी प्रगति।
- 13,982 बाल शौचालयों में केवल 1,442 का निर्माण पूरा।
- 15 जुलाई तक लंबित कार्य शुरू कराने के निर्देश जारी।
सरकारी योजनाओं में स्वीकृति और बजट के बाद भी हजारों निर्माण कार्य जमीन पर शुरू नहीं हो सके। अब लंबित परियोजनाओं को तय समय में शुरू कराने के लिए 15 जुलाई की डेडलाइन तय कर दी गई है।
सरकारी योजनाओं में अक्सर सबसे बड़ी चुनौती मंजूरी नहीं, बल्कि उन्हें जमीन तक पहुंचाना होती है। प्रदेश में कई निर्माण कार्यों की मौजूदा स्थिति इसी सवाल को फिर सामने ला रही है। फाइलों में स्वीकृति मिलने के बावजूद हजारों परियोजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर सकीं। ऐसे में अब प्रशासन ने लंबित कामों को तेजी से शुरू कराने के लिए सभी जिला पंचायतों को सख्त हिदायत दी गई हैं।
जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा काम?
पिछले तीन वर्षों में प्रदेशभर में 9,449 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। इनमें से 3,724 भवनों का निर्माण अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है।
यानी बड़ी संख्या में स्वीकृत परियोजनाएं अभी भी शुरुआती चरण तक नहीं पहुंच सकी हैं। यही वजह है कि अब इन्हें प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराने की तैयारी की जा रही है।
कई योजनाओं में एक जैसी तस्वीर
केवल एक योजना ही नहीं, बल्कि अलग-अलग सरकारी योजनाओं में भी निर्माण कार्यों की गति अपेक्षा से काफी धीमी रही है।
पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत 704 भवनों में केवल 36 का निर्माण शुरू हो सका। वहीं धरती आबा योजना में 66 स्वीकृत भवनों में से 52 पर ही काम शुरू हुआ।
सामान्य योजना के अंतर्गत स्वीकृत 8,679 भवनों में भी 1,685 निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सके।
बच्चों की सुविधाएं भी अधूरी
आंगनबाड़ियों में बच्चों के लिए बनाए जाने वाले 13,982 बाल सुलभ शौचालयों के लिए राशि जारी की गई थी, लेकिन अब तक केवल 1,442 शौचालय ही बन पाए हैं। यानी 10,479 शौचालयों का निर्माण अभी बाकी है।
इसका सीधा असर बच्चों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है।
15 जुलाई तक पूरा करने के निर्देश
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 15 जुलाई 2026 तक जिन निर्माण कार्यों की शुरुआत नहीं हुई है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराया जाए।
साथ ही लंबित परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग कर प्रगति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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