बंटी वाडिवा को सीएम मोहन यादव ने किया सम्मानित, KBC में जाने वाले पहले आदिवासी कंटेस्टेंट

Ravi Singh | Sept 08, 2024, 20:19 IST
bunty wadiva kbc
मध्‍य प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए 8 सितंबर 2024 को खालवा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ( CM Mohan Yadav ) ने बैतूल की प्रतिभा बंटी वाडिवा का सम्मान किया।

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के असाड़ी गांव के रहने वाले बंटी वाडिवा ( bunty wadiva ) ने सोनी टीवी के फेमस प्रोग्राम KBC (कौन बनेगा करोड़पति) में 50 लाख रुपए जीतकर इतिहास रच दिया है। बंटी ने अपने गांव और जिले का नाम रोशन किया है। एमपी का नाम रोशन करने के लिए रविवार 8 सितंबर 2024 को बंटी वाडिवा का खंडवा जिले के खालवा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ( CM Mohan Yadav ) ने सम्मान किया।



1 करोड़ के सवाल पर फंसे

बंटी वाडिवा KBC 16 शो के पहले आदिवासी कंटेस्टेंट हैं, उन्होंने BCA से ग्रेजुएशन किया है। बंटी MPPSC में ग्रेड 3 नौकरी के तैयारी भी कर रहे हैं। बंटी वाडिवा ने शो में 50 लाख तक के सभी सवालों का सही जवाब दिया था लेकिन जैसे ही वे 1 करोड़ के सवाल पर पहुंचे तो वे सोच में पड़ गए।



ये था सवाल

अमिताभ बच्चन ने बंटी वाडिवा से 1 करोड़ के लिए सवाल पूछा था कि 1948 में, बंगाली मूर्तिकार चिंतामोनी कर ने द स्टैग नामक एक कलाकृति के लिए क्या जीता था। इस सवाल के लिए चार ऑप्शन मिले थे - पाइथागोरस पुरस्कार, नोबेल पुरस्कार, ओलंपिक पदक और ऑस्कर अवार्ड। बंटी इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए थे। इस सवाल का सही जवाब ओलंपिक मेडल था ।



https://thesootr.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-garbhkal-the-sootr-survey-6952867



अकाउंट में थे 260 रुपए

बंटी वाडिवा ने बताया कि जब वे शो में गए थे तब उनके अकाउंट में 260 रुपए ही थे, KBC शो में जाना उनका सपना था। साथ ही उनका कहना है कि सम्मान और पहचान पाने के लिए KBC पर जाना मेरा सपना था। मैं हमेशा से आने वाली पीढ़ियों के लिए रोल मॉडल बनना चाहता था। KBC की मदद से मैं जो कुछ अचीव कर पाया, वो मेरी इच्छाओं से भी बहुत ज्यादा है, उनके पिता ने खेत में बोरवेल करने के लिए 80 हजार रुपए का कर्ज लिया था।



बंटी के घर में टीवी भी नहीं थी

बंटी के पिता गुलबू वाडिवा बहुत गरीब हैं। वह थोड़ी-सी खेती के अलावा मजदूरी करके अपने दोनों बच्चों की परवरिश करते हैं । बंटी ने अपने माता-पिता के साथ काम में हाथ बंटाने के साथ ही ग्रेजुएशन किया। गांव के झोपड़ीनुमा मकान में रहने वाले बंटी जब बिजली नहीं रहती थी, तब मोबाइल की लाइट में पढ़ाई करते थे। उनके घर में सुख सुविधा नाम की कोई चीज नहीं हैं।



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