एमपी में बस किराया दो रुपए प्रति किमी पहुंचा, राजस्थान में सिर्फ 95 पैसे, सुगम परिवहन सेवा में भी राहत नहीं!
समझें क्या है पूरा मामला...
- सरकार ने बस ऑपरेटरों की चेतावनी पर बस किराया 60 फीसदी बढ़ा दिया है।
- मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बसों में भी निजी बसों जितना ही किराया तय किया गया है।
- देखा जाए तो पडोसी राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश की बस यात्रा महंगी है।
किस राज्य में बस किराया कितना?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य प्रदेश में बस किराया 2 रुपए से 3.50 रुपए प्रति किलोमीटर है। उत्तर प्रदेश में यह 1.35 रुपए से 2.86 रुपए तक है। छत्तीसगढ में 1.25 रुपए से 2.81 रुपए प्रति किलोमीटर लगता है।
गुजरात में यह दर 0.95 रुपए से 2.70 रुपए तक है। वहीं राजस्थान में 0.95 रुपए से 2.10 रुपए तक किराया तय है। न्यूनतम और अधिकतम, दोनों में मध्य प्रदेश सबसे ऊपर है। गुजरात और राजस्थान की न्यूनतम दर बराबर है यानी 0.95 रुपए।
अधिकतम किराए में कितना फर्क?
अधिकतम दर में राजस्थान सबसे सस्ता है। वहां यह 2.10 रुपए प्रति किलोमीटर है। मध्य प्रदेश की अधिकतम दर उससे 1.40 रुपए ज्यादा है। अधिकतम दर पर 500 किलोमीटर के सफर में फर्क 700 रुपए बैठता है।
सुगम सेवा में भी वही किराया
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा (Sugam Parivahan Seva) की शुरुआत 25 सितंबर को हुई। पहले दिन 7 शहरों में 351 बसें उतारी गईं। पहले साल में 1500 बसें चलाने की योजना है। जानकारी के अनुसार निजी बसों का किराया ही इन बसों में भी लगेगा।
यानी किराए के मामले में सरकारी और निजी बस का फर्क नहीं रहेगा। हालांकि इस सेवा में इलेक्ट्रिक बसें और नए बस स्टॉप भी शामिल हैं।
आम यात्री की जेब पर कितना असर?
बता दें कि अगस्त 2026 से पहले साधारण बस का प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपए था। अब यही किराया 2 रुपए हो गया है। यानी हर किलोमीटर पर 75 पैसे ज्यादा देने पडते हैं। 100 किलोमीटर का किराया 125 रुपए से बढ़कर 200 रुपए हो गया। शुरुआती 5 किलोमीटर का न्यूनतम किराया अब 10 रुपए तय है।
राजस्थान में किराया इतना सस्ता क्यों?
राजस्थान बस किराया 10 साल बाद सिर्फ 10 पैसे बढ़ा। राज्य सरकार ने यह फैसला अगस्त 2025 में लिया था। साधारण बसों का किराया 85 पैसे से बढ़कर 95 पैसे प्रति किलोमीटर हुआ। सुपर लग्जरी एसी (AC – Air Conditioner) बसों में भी अधिकतम किराया 2.10 रुपए है।
मध्य प्रदेश में 5 साल में 60 फीसदी
वहीं मध्य प्रदेश में जुलाई 2026 तक 2021 के किराए पर बसें चलीं। वह किराया 20 अप्रैल 2021 को तय हुआ था। यानी सरकार को किराया तय किए सिर्फ 5 साल हुए थे। फिर भी किराया 60 फीसदी बढ़ गया।
राजस्थान में 10 साल में साधारण बस का किराया करीब 12 फीसदी बढ़ा। मध्य प्रदेश में आधे समय में पांच गुना ज्यादा बढोतरी हुई।
बस ऑपरेटर की चेतावनी का असर
बस ऑपरेटरों ने किराया न बढ़ने पर हडताल की चेतावनी दी थी। वे 5 साल से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि 2021 में डीजल 69 रुपए प्रति लीटर था। अब वही डीजल 100 रुपए के पार पहुंच चुका है।
सरकार और ऑपरेटरों की बैठक के बाद हडताल टल गई। सरकार ने महज एक चेतावनी पर किराया बढ़ा दिया। यह मध्य प्रदेश बस किराया बढ़ोतरी (MP Bus Fare Hike) का बडा फैसला था। रिपोर्ट में परिवहन विभाग का पक्ष शामिल नहीं है।
सवाल सीधा है। यात्री को नई सेवा से क्या राहत मिलेगी?
यह खबर क्यों जरूरी है
बस आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरत है। नौकरी, पढ़ाई और इलाज के लिए लोग रोज इसी पर निर्भर रहते हैं। जब किराया 60 फीसदी बढ़ता है, तो घर के बजट पर सीधा असर पड़ता है। सरकारी सेवा का मकसद सस्ता और भरोसेमंद सफर देना होता है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि नई सेवा जनता को असल में क्या राहत देती है। सार्वजनिक सेवाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियाद है।
- मध्य प्रदेश में बस का प्रति किलोमीटर किराया कितना है?
- मध्य प्रदेश में सुगम परिवहन सेवा की बसों का किराया कितना होगा?