Census 2027 में पहली बार होगी जातिगत गिनती, पूछे जाएंगे ये 40 सवाल
जनगणना 2027 में पहली बार सामान्य जातियों की गिनती होगी। केंद्र सरकार ने 40 सवालों की सूची अधिसूचित कर दी है। इसमें जाति, धर्म, शिक्षा और रोजगार जैसे सवाल शामिल हैं। लोगों से आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट नंबर भी पूछा जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार ने भी यह अधिसूचना अपने राजपत्र में प्रकाशित कर दी है।
देश की अगली जनगणना अब सिर्फ नाम और उम्र पूछने तक सीमित नहीं रहेगी। इस बार का फॉर्म पहले से कहीं बड़ा और विस्तृत होगा। केंद्र सरकार ने शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को जनगणना के दूसरे चरण के लिए 40 सवालों की सूची अधिसूचित की। इसे Population Enumeration चरण कहा जा रहा है।
28 अगस्त को मध्यप्रदेश शासन ने इसी अधिसूचना को अपने राजपत्र में दोबारा प्रकाशित किया। साथ ही राज्य में इसे लागू करने के आदेश जारी कर दिए। इन सवालों में जाति के अलावा धर्म, मातृभाषा, शिक्षा, रोजगार और पलायन से जुड़ी जानकारी शामिल है। परिवार से जुड़े कई निजी सवाल भी पूछे जाएंगे।
जाति की गिनती सबसे बड़ा बदलाव क्यों
सबसे ज्यादा चर्चा सवाल नंबर 10 की हो रही है। इसमें अनुसूचित जाति (SC – Scheduled Caste), अनुसूचित जनजाति (ST – Scheduled Tribe) और जाति पूछी जाएगी। जाति के लिए कॉलम खुला रखा गया है। व्यक्ति अपनी जाति जिस नाम से बताएगा, उसे वैसे ही दर्ज किया जाएगा।
अब तक जनगणना में सिर्फ SC और ST का डेटा दर्ज होता रहा है। पहली बार अन्य जातियों की भी गिनती होगी। जुलाई में 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इसका प्री-टेस्ट किया गया था। यही तरीका अब अंतिम जनगणना में भी अपनाया जाएगा।
जातिगत आंकड़ों को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस चलती रही है। Census 2027 के आंकड़े आने के बाद यह डेटा आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व की बहस में अहम भूमिका निभा सकता है। इसीलिए इस बदलाव को बड़ा माना जा रहा है।
आधार से बैंक खाते तक
इस बार जनगणना में पहचान से जुड़ी जानकारियां भी शामिल की गई हैं। जहां उपलब्ध हो, वहां मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी और पासपोर्ट की जानकारी दर्ज होगी। ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं, यह भी पूछा जाएगा।
व्यक्ति के कुल बैंक खातों की संख्या भी दर्ज की जाएगी। हालांकि इन दस्तावेजों की उपलब्धता और नंबर से जुड़े विवरण अलग-अलग तरीके से पूछे जाएंगे। कोविड-19 का टीका कहां लगाया गया, यह सवाल भी फॉर्म में शामिल है।
शिक्षा और डिजिटल साक्षरता को भी पहली बार इतनी स्पष्टता से शामिल किया गया है। व्यक्ति पढ़ा-लिखा है या नहीं, डिजिटल रूप से साक्षर है या नहीं, यह दर्ज होगा। साथ ही उसकी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता भी पूछी जाएगी।
नौकरी, कारोबार और पलायन
रोजगार को भी 40 सवालों में काफी जगह मिली है। पिछले एक साल में व्यक्ति ने काम किया या नहीं, यह पूछा जाएगा। उसका व्यवसाय, उद्योग और कामगार की श्रेणी भी दर्ज होगी।
जो लोग काम नहीं कर रहे, उनसे काम तलाशने की जानकारी ली जाएगी। काम की जगह तक आने-जाने का ब्योरा भी जुटाया जाएगा। पलायन को लेकर भी कई सवाल शामिल किए गए हैं।
व्यक्ति कहां पैदा हुआ, पिछला निवास स्थान क्या था, यह पूछा जाएगा। पलायन का कारण और मौजूदा जगह पर रहने की अवधि भी दर्ज होगी। महिलाओं से जीवित बच्चों की संख्या से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।
सरकार की अधिसूचना के अनुसार ये जानकारी जुटाएंगे.
- व्यक्ति का नाम
- परिवार के मुखिया से संबंध
- लिंग
- जन्मतिथि और पूरी हो चुकी उम्र
- वर्तमान वैवाहिक स्थिति
- शादी के समय उम्र
- पति या पत्नी का नाम
- व्यक्ति द्वारा बताई गई राष्ट्रीयता
- धर्म
- अनुसूचित जाति (SC)/अनुसूचित जनजाति (ST)/जाति
- पिता से संबंधित जानकारी
- माता से संबंधित जानकारी
- दिव्यांगता
- मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं
- साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की स्थिति
- शिक्षण संस्थान में पढ़ाई की वर्तमान स्थिति
- प्राप्त उच्चतम शैक्षणिक स्तर और विषय/स्ट्रीम
- पिछले एक साल में किसी समय काम किया या नहीं
- आर्थिक गतिविधि की श्रेणी
- व्यवसाय
- उद्योग, व्यापार या सेवा की प्रकृति
- कामगार की श्रेणी
- गैर-आर्थिक गतिविधि
- काम की तलाश या काम के लिए उपलब्धता
- काम की जगह तक आने-जाने की जानकारी
- जन्म स्थान
- पिछला निवास स्थान
- पलायन का कारण
- पिछले पलायन के बाद इस गांव/शहर में रहने की अवधि
- स्थायी आवासीय पता
- वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या
- जीवन में पैदा हुए कुल जीवित बच्चों की संख्या
- पिछले एक साल में जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या
- कोविड-19 वैक्सीनेशन की जगह
- कुल बैंक खातों की संख्या
- मोबाइल नंबर, अगर उपलब्ध हो
- आधार नंबर, अगर उपलब्ध हो
- वोटर आईडी नंबर, अगर उपलब्ध हो
- पासपोर्ट नंबर, अगर भारतीय पासपोर्ट धारक हैं
- ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं
कब से शुरू होगी Census 2027
जनगणना का दूसरा चरण 17 अगस्त 2026 से शुरू हो चुका है। यह लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बर्फीले इलाकों में पहले शुरू किया गया। देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में होगी।
केंद्र सरकार ने Census Act, 1948 के तहत यह अधिसूचना जारी की है। इसके जरिए जनगणना अधिकारियों को Household Schedule से जानकारी जुटाने का अधिकार मिला है। यह जनगणना सिर्फ आबादी गिनने तक सीमित नहीं रहेगी।
जाति से लेकर शिक्षा, रोजगार, पलायन और बैंक खातों तक का डेटा एक साथ जुटाया जाएगा। खासकर जातिगत जनगणना का फैसला इसे राजनीतिक और सामाजिक दोनों नजरिए से अहम बनाता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि 2027 में यह आंकड़े कैसी तस्वीर सामने लाते हैं।
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