दो लाख की रिश्वत लेते सीजीएसटी अफसर गिरफ्तार, CBI की छापेमारी में घर से मिले 72 लाख
भोपाल में सीजीएसटी अफसर गिरफ्तार
भोपाल में सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा ने बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने सेंट्रल जीएसटी की प्रिवेंटिव विंग के सुपरिटेंडेंट राजेश कुमार गुप्ता को 2 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तारी के बाद अधिकारी को विशेष अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें दो दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है। सीबीआई ने आधिकारिक बयान जारी कर इस कार्रवाई की पुष्टि की है।
स्क्रैप कारोबारी से रिश्वत का आरोप
राजेश कुमार गुप्ता सीजीएसटी सुपरिटेंडेंट के पद पर तैनात हैं। शिकायत मंडीदीप के स्क्रैप कारोबारी की है। वे अमीर ट्रेडर्स के प्रोपराइटर मुबीन खान हैं।
मुबीन खान ने 09 अक्टूबर को सीबीआई में शिकायत दी थी। आरोप है कि उनसे स्क्रैप कारोबारी से रिश्वत के नाम पर रकम मांगी गई थी।
15 सितंबर को क्या हुआ था
शिकायत के मुताबिक 15 सितंबर को गुप्ता ने कारोबारी का वाहन रोका था। वाहन इंदौर से भोपाल आ रहा था। आरोप है कि ई-वे बिल (E-way Bill – माल ढुलाई का ऑनलाइन बिल) न होने की बात कही।
उसी रात मंडीदीप के गोदाम पर छापा मारा गया था। आरोप है कि कारोबार चौपट करने की धमकी देकर 11 लाख रुपए वसूले गए थे।
दो लाख मासिक बंधी की मांग
कारोबारी ने सीबीआई को बताया कि गुप्ता ने उन्हें जहांगीराबाद के कॉफी हाउस बुलाया था। वहां उन्हें धमकाया गया था। कहा गया कि गाड़ियां बिना रोक-टोक चलने देने के बदले पैसे देने होंगे।
आरोप के मुताबिक यह दो लाख मासिक बंधी थी। साल भर में यह रकम 24 लाख रुपए बनती है।
9 अक्टूबर को गुप्ता ने वाट्सएप कॉल की था। उन्होंने कारोबारी को अगले दिन बुलाया था।
सीबीआई ने कैसे बिछाया जाल
शिकायत पर सीबीआई ने स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में मांग की पुष्टि की। इसके बाद गुप्ता को दो लाख रुपए लेते पकड़ लिया गया।
CBI Bhopal action यहीं नहीं रुकी। गिरफ्तारी के बाद कई टीमें सक्रिय हुईं।
72 लाख रुपए कहां से मिले
सीबीआई टीमों ने आरोपी अफसर के भोपाल और कानपुर के घरों पर छापे मारे। देर रात तक तलाशी चली। दोनों ठिकानों से कुल 72 लाख 50 हजार रुपए नकद मिले।
यानी 72 लाख रुपए बरामद हुए और साथ में 50 हजार रुपए। इसके अलावा कई अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं। इन सबकी जांच जारी है।
रिमांड में क्या खुल सकता है
दो दिन की रिमांड के दौरान सीबीआई आरोपी अधिकारी से कई सवालों के जवाब तलाशेगी। सबसे बड़ा सवाल है कि बरामद 72 लाख 50 हजार रुपए कहां से आए? अचल संपत्तियों में निवेश के लिए पैसा कहां से मिला? विभाग में किन-किन अधिकारियों से उनके संबंध हैं?
सीबीआई यह भी जांच करेगी कि 15 सितंबर को कथित तौर पर वसूले गए 11 लाख रुपए के मामले में दूसरे अधिकारी भी शामिल थे या नहीं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस पूरे मामले में और किन लोगों की भूमिका रही है।
प्रिवेंटिव विंग की साख पर सवाल
सीजीएसटी की प्रिवेंटिव शाखा का काम टैक्स चोरी रोकना है। वह बिना बिल या बिना ई-वे बिल के माल परिवहन को भी पकड़ती है। रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यालय स्तर के सुपरिटेंडेंट पर प्रोटेक्शन मनी (सुरक्षा के नाम पर वसूली) का आरोप लगा है। इससे विभाग की विजिलेंस व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
इन्हीं सवालों के बीच CGST superintendent bribe का यह मामला सामने आया है।
आय से अधिक संपत्ति का केस संभव
गुप्ता क्लास-2 स्तर के अफसर हैं। इतनी नकदी मिलने से शुरुआती तौर पर आय से अधिक संपत्ति का केस बन सकता है। सूत्रों के मुताबिक ब्योरा आय से मेल न खाने पर सीबीआई अलग डीए (DA – Disproportionate Assets) केस दर्ज कर सकती है।
अभी आरोपी को दोषी नहीं कहा जा सकता। मामले में आगे की कार्रवाई अदालत और जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।