बेहद खास है एमपी का ये चमत्कारी शक्तिपीठ, यहां बलूचिस्तान से आई थीं दो अखंड ज्योतियां

Kaushiki | Mar 22, 2026, 11:44 IST
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चैत्र नवरात्रि 2026 पर जानिए मध्य प्रदेश के रायसेन में स्थित मां हिंगलाज मंदिर का इतिहास। यहां बलूचिस्तान से लाई गई अखंड ज्योति और बेगम कुदसिया के चमत्कार की कथा है।

चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर भक्तों की भीड़ शक्तिपीठों की ओर उमड़ रही है। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की बाड़ी तहसील में एक दिव्य मंदिर स्थित है।



इसकी महिमा भोपाल रियासत की पहली महिला शासक बेगम कुदसिया ने भी देखी है।भोपाल से इस सिद्ध स्थान की दूरी मात्र 100 किलोमीटर की है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक बलूचिस्तान में माता सती का शीश गिरा था।



वह स्थान मुख्य शक्तिपीठ है जहां आज भी श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा जुड़ी है। रायसेन के बाड़ी में स्थित ये मंदिर 500 साल पुराना माना जाता है। इसे बलूचिस्तान के मुख्य मंदिर की उपशक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है।



हिंगलाज माता मन्दिर - विकिपीडिया


बलूचिस्तान से रायसेन तक की कठिन पदयात्रा

इस मंदिर की स्थापना की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है। 16वीं सदी में खाकी अखाड़े के महंत भगवानदास महाराज बलूचिस्तान की यात्रा पर गए थे। उन्होंने दो साल तक अत्यंत कठिन और दुर्गम रास्तों पर पदयात्रा की थी।



वे गंभीर बीमारी से पीड़ित थे फिर भी माता के दर्शन की लालसा रही। महंत जी बलूचिस्तान के मूल मंदिर से दो अखंड ज्योतियां लेकर आए थे।



उन्होंने कंदमूल खाकर अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा को पूरी श्रद्धा से निभाया था। यही ज्योतियां आज भी रायसेन के इस पावन मंदिर में प्रज्वलित रहती हैं। इन ज्योतियों के दर्शन मात्र से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।



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माता के चमत्कार की ऐतिहासिक कथा

मां हिंगलाज की महिमा से भोपाल की पहली महिला शासक भी प्रभावित हुई थीं। 1820 के आसपास बेगम कुदसिया ने मंदिर की आरती पर रोक लगा दी थी।



बेगम आरती के शोर से नाराज थीं और शांति चाहती थीं। मंदिर के महंत ने माता की सेवा रोकने से साफ मना कर दिया। बेगम ने माता की परीक्षा लेने के लिए मांस का थाल भेजा था।



जैसे ही वह थाल मंदिर पहुंचा वह चमत्कारिक रूप से मिठाई बन गया। यह देख बेगम कुदसिया दंग रह गईं और उन्होंने तुरंत माफी मांगी। उन्होंने श्रद्धापूर्वक मंदिर को विशाल जागीर और जमीन दान में दे दी।



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वर्तमान में मंदिर की व्यवस्था

आज इस मंदिर का संचालन एक विशेष ट्रस्ट समिति द्वारा किया जा रहा है। यहां की पाठशाला में बच्चे वेदों और कर्मकांडों का गहन अध्ययन करते हैं।



मंदिर परिसर के पास 65 एकड़ का बहुत बड़ा सुंदर बगीचा भी है। नवरात्रि में यहां का वातावरण बहुत ही आध्यात्मिक और दिव्य हो जाता है।



हिंगलाज माता का यह मंदिर सांस्कृतिक एकता का भी एक बड़ा प्रतीक है। यह स्थान हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच आपसी सम्मान का केंद्र है। नवरात्रि में यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी हर मुराद पूरी होती है।



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