खनन माफिया पर कार्रवाई कर दूसरों के लिए मिसाल बनें: चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सख्त टिप्पणी की है।
- कोर्ट ने मददगारों के खिलाफ हिरासत के आदेश जारी करने को कहा है।
- मुरैना में ऐसे 551 लोगों की पहचान हो चुकी है।
- कोर्ट ने पूछा कि इन लोगों को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
- मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार 22 जुलाई को स्पष्ट कहा कि Chambal Sanctuary में अवैध रेत खनन (Illegal Sand Mining) में मदद करने वालों पर नरमी नहीं दिखाई जानी चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। यह सुनवाई चंबल में जलीय वन्यजीवों (Aquatic Wildlife) को हो रहे नुकसान से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले में हुई।
पीठ ने कहा कि ऐसे लोग प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसलिए वे किसी सहानुभूति के हकदार नहीं हैं।कोर्ट ने निर्देश दिया कि अवैध खनन में मदद करने वालों के खिलाफ एहतियाती हिरासत के आदेश जल्द जारी किए जाएं।
मुरैना में 551 लोगों की पहचान
सुनवाई के दौरान (Supreme Court) को बताया गया कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में 551 लोग अवैध रेत खनन में मदद करते पाए गए हैं।इस पर पीठ ने पूछा कि पहचान होने के बाद भी इन लोगों को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया।कोर्ट ने कहा कि इनके खिलाफ कार्रवाई होने से दूसरे लोगों को भी कड़ा संदेश मिलेगा।
चंबल अभयारण्य (Chambal Sanctuary) के बारे में
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है। यह करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।यह अभयारण्य लुप्तप्राय घड़ियाल, लाल कछुए और दुर्लभ डॉल्फिन का प्रमुख प्राकृतिक आवास है।
यह चंबल नदी के किनारे स्थित है। इसका क्षेत्र राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं तक फैला है।इसे वर्ष 1978 में मध्य प्रदेश में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। वर्तमान में तीनों राज्य मिलकर इसका प्रबंधन करते हैं।
प्रकृति के संतुलन पर जोर
कोर्ट ने कहा कि चंबल नदी और उसकी सहायक नदियों का प्राकृतिक बहाव बना रहना चाहिए।पीठ के अनुसार, मानव हस्तक्षेप कम होने पर प्रकृति अपना संतुलन स्वयं बना लेती है।
कोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
तीनों राज्यों ने दिया कार्रवाई का ब्यौरा
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने अपनी कार्रवाई का ब्यौरा पेश किया।राज्यों ने दर्ज एफआईआर और जब्त किए गए वाहनों एवं अन्य सामान की जानकारी भी कोर्ट को दी।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अवैध रेत खनन रोकने के लिए तीनों राज्यों को और सख्ती बरतनी होगी।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।तब तक तीनों राज्यों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर कार्रवाई करनी होगी।कोर्ट की नजर अब अवैध खनन में मदद करने वालों के खिलाफ जारी होने वाले हिरासत आदेशों पर रहेगी।
यह मामला सीधे मध्य प्रदेश के मुरैना जिले और चंबल अभयारण्य से जुड़ा है।इसका असर राजस्थान और उत्तर प्रदेश पर भी पड़ेगा। तीनों राज्य मिलकर इस अभयारण्य का प्रबंधन करते हैं।
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट ने चंबल मामले में क्या आदेश दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत खनन में मदद करने वालों के खिलाफ हिरासत के आदेश जारी करने को कहा है। यह निर्देश चंबल के पर्यावरण और जलीय वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए दिया गया है। - मुरैना में कितने लोगों की पहचान हुई है?
मुरैना जिले में 551 लोगों की पहचान हुई है। ये लोग अवैध रेत खनन में मदद करते पाए गए हैं। - चंबल अभयारण्य में कौन-कौन से जीव पाए जाते हैं?
चंबल अभयारण्य में लुप्तप्राय घड़ियाल, लाल कछुए और दुर्लभ डॉल्फिन पाई जाती हैं। यह अभयारण्य इन जीवों के संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ये भी पढ़ें...
मुरैना में अवैध रेत खनन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 19 आरोपी जिलाबदर
35 हजार ट्रैक्टरों में लगेगा GPS ट्रैकिंग सिस्टम, चंबल में अवैध रेत खनन पर रोक
चंबल नदी में अवैध रेत खनन: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद परिवहन विभाग के 7 अफसरों के तबादले
चंबल में अवैध रेत खनन पर SC सख्त, कहा-सिर्फ ड्राइव ही नहीं असली माफिया को पकड़ना जरूरी