घटिया इलेक्ट्रॉनिक सामान से करोड़ों का खेल! जांच में गड़बड़ी साबित, फिर भी कार्रवाई अटकी

Ramanand Tiwari | Mar 12, 2026, 21:07 IST
electronics scam
मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय विभाग में घटिया इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदी की गड़बड़ी सामने आई है। जांच में आरोप सही पाए गए, लेकिन विभाग की कार्रवाई छह महीने से लंबित है।

BHOPAL. मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों में खरीदी को लेकर सवाल खड़ा हुआ है। सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में गड़बड़ी सामने आई है। जांच में पाया गया कि मेसर्स साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम, भोपाल ने अमानक सामान सप्लाई किया।



इसके अलावा साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक्स ने सामान की कीमत ज्यादा बताकर भुगतान लिया। जांच कमेटी ने छह महीने पहले संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की थी। अभी तक ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई नहीं की गई। इससे विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।



10 करोड़ से ज्यादा की खरीदी

दरअसल, विभाग को जनपद, जिला कार्यालयों और संचालनालय के लिए कंप्यूटर और अन्य उपकरण खरीदने थे। इसके लिए 18 सितंबर 2024 को करीब 10 करोड़ 99 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। इसके बाद 23 सितंबर 2024 को जेम (GeM) पोर्टल के जरिए ई-निविदा जारी की गई। 31 अक्टूबर 2024 को जब टेंडर खुले, तो सबसे कम दर देने वाली कंपनी मेसर्स साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम, भोपाल को काम मिल गया।



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किन-किन उपकरणों की हुई खरीदी

इस निविदा में विभाग ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बड़ी मात्रा खरीदने की मंजूरी दी थी। खरीदी का विवरण इस प्रकार है: 467 कंप्यूटर, 457 प्रिंटर, 453 यूपीएस, 5 लैपटॉप, 1 वॉलटॉप कंप्यूटर। हालांकि, शुरुआती चरण में संस्था ने 44 कंप्यूटर, 34 प्रिंटर और 30 यूपीएस सप्लाई किए।



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शिकायत के बाद बनी जांच कमेटी

उपकरणों की गुणवत्ता पर सवाल 23 जून 2025 को उठे। उस दिन जगदीश रायकवार ने शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद विभाग ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इस कमेटी में तीन सदस्य शामिल थे।


उप संचालक आरके सिंह


डॉ. श्रवण कुमार पचौरी


लेखाधिकारी लाजवंती अभिचंदानी


जांच में शिकायत के लगभग सभी आरोप सही पाए गए।



जांच में सामने आई चौंकाने वाली गड़बड़ियां

कमेटी की जांच में कई तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।



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जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य

कंप्यूटर के BIOS में इंस्टॉलेशन डेट 22 जुलाई 2024 दिखाई गई, जबकि विभाग ने इन्हें दिसंबर 2024 में खरीदा और स्थापित किया। कुछ कंप्यूटरों को खरीद आदेश से पहले ही इंस्टॉल दिखाया गया, जिससे विभाग को गुमराह किया गया।



कंप्यूटर खोलकर जांच करने पर पता चला कि अनुबंध के अनुसार एसर कंपनी की SSD नहीं लगी थी, बल्कि लोकल कंपनी की SSD लगाई गई थी। रैंडम जांच में तीन में से दो कंप्यूटरों में रेम और SSD दोनों अनुबंध के अनुसार नहीं पाए गए। इससे साफ हुआ कि उपकरणों में छेड़छाड़ कर घटिया हार्डवेयर लगाया गया।



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यूपीएस की कीमत में भी बड़ा खेल

जांच में यूपीएस की कीमत को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया। सप्लाई किए गए सायबर पॉवर कंपनी के यूपीएस के डिब्बे पर कीमत 6085 रुपए लिखी थी। जेम पोर्टल पर पांच साल की वारंटी के साथ ऑफर प्राइस 3754 रुपए था। लेकिन विभाग ने संस्था को प्रति यूपीएस 11247 रुपए के हिसाब से भुगतान किया। कमेटी के अनुसार यह वित्तीय अनियमितता और विभाग को गुमराह कर अधिक भुगतान लेने का मामला है।



स्मार्ट क्लास उपकरण भी निकले खराब

जांच के दौरान कमेटी ने शासकीय दृष्टिबाधित विद्यालय, भोपाल और आशा निकेतन भोपाल में लगाए गए स्मार्ट क्लास उपकरणों का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण में यह उपकरण भी मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए और उनकी गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिली।



ब्लैकलिस्ट की सिफारिश

जांच पूरी होने के बाद सितंबर 2025 में कमेटी ने संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और देय राशि राजसात करने की सिफारिश कर दी थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि छह महीने बाद भी विभाग ने सिर्फ नोटिस भेजने तक ही कार्रवाई सीमित रखी है। इससे सवाल उठ रहा है कि आखिर गड़बड़ी साबित होने के बाद भी संस्था पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।



क्या है पूरा मामला

सामाजिक न्याय विभाग में 10.99 करोड़ की इलेक्ट्रॉनिक खरीदी में गड़बड़ी।


साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम, भोपाल पर अमानक सामान सप्लाई करने का आरोप।


कंप्यूटर में लोकल SSD और हार्डवेयर लगाने की पुष्टि।


यूपीएस की कीमत में हजारों रुपए का अंतर, ज्यादा भुगतान लिया गया।


शिकायत के बाद बनी जांच कमेटी ने सभी आरोप सही पाए।


सितंबर 2025 में ब्लैकलिस्ट की सिफारिश, लेकिन छह महीने से कार्रवाई लंबित।



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