गांधीसागर अभयारण्य में लाए जाएंगे चीते, 64 वर्ग किमी क्षेत्र में बाड़ा बनकर तैयार, भोजन के लिए कान्हा नेशनल पार्क से लाए 23 चीतल

Jitendra Shrivastava | Jan 09, 2024, 24:00 IST
गांधीसागर अभयारण्य में लाए जाएंगे चीते, 64 वर्ग किमी क्षेत्र में बाड़ा बनकर तैयार, भोजन के लिए कान्हा नेशनल पार्क से लाए 23 चीतल
दूसरे चरण में मार्च तक अफ्रीका नामीबिया से आने वाले चीतों को बसाने के लिए गांधीसागर अभयारण्य को तैयार किया जा रहा है।

BHOPAL. कूनो नेशनल पार्क के वातावरण में चीते रम गए हैं। इन चीतों को यहां लाए लगभग एक साल पूरा हो गया है। अब दूसरे चरण में अफ्रीका नामीबिया से मार्च तक आने वाले चीतों को बसाने के लिए गांधीसागर अभयारण्य को तैयार किया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री को भी बुलाया जाएगा। इसी के चलते वन विभाग का पूरा ध्यान चीतों के भोजन के लिए अभयारण्य में हिरण व चीतल को बसाने का है। विभाग ने 1250 चीतल-हिरण यहां लाने का लक्ष्य रखा है।



1250 चीतल और हिरण छोड़ने का लक्ष्य



कुछ समय पहले नरसिंहगढ़ सेंचुरी से लगभग 150 से अधिक चीते लाए गए थे। सोमवार को भी कान्हा नेशनल पार्क से 23 चीतल व हिरण यहां लाकर छोड़े गए हैं। चीतों को बसाने के लिए गांधीसागर से रामपुरा रोड पर 64 वर्ग किमी क्षेत्र में बाड़ा बनाकर तैयार किया जा रहा है। इन बड़े-बड़े बाड़े में चीतों को छोड़ा जाएगा। गांधीसागर अभयारण्य में स्थित घास के मैदानों को पहले ही वन्य जीव संस्थान देहरादून के जीव विज्ञानी चीतों के लिए अनुकूल बता चुके हैं। अभी बाड़े बनाने का कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके साथ ही चीतों के भोजन के लिए चीतल व हिरण को भी लाकर छोड़ा जा रहा है। गांधीसागर अभयारण्य में कुल 1250 चीतल, हिरण छोड़े जाना है। गांधीसागर अभयारण्य लगभग 300 वर्ग किमी में फैला हुआ हैं। यह मप्र के मंदसौर-नीमच जिले के साथ ही राजस्थान के चित्तौड़ व कोटा जिले में भी फैला हुआ है।



गांधीसागर चीतों के दूसरे घर के रूप में तैयार



फरवरी-मार्च के बाद कभी भी अफ्रीका, नामीबिया से आने वाली चीतों की दूसरी खेप में से यहां चीतों को रखा जाएगा। अभी इनकी संख्या कितनी होगी यह तय नहीं है मगर चीतों के भोजन के लिए हिरण चीतल को यहां लाया जा रहा है। इसके लिए बोमा तकनीक से कान्हा नेशनल पार्क, नरसिंहगढ़ अभयारण्य, वन विहार नेशनल पार्क भोपाल से चीतल हिरण लाने का कार्य किया जा रहा है। शाजापुर से कृष्ण मृग हिरण भी लाएंगे। वन मंडल अधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश के श्योपुर में कूनो नेशनल पार्क में चीतों की सफलता के बाद गांधीसागर अभयारण्य को चीतों का दूसरे घर के रूप में तैयार किया जा रहा है।



500 में से 23 हिरण अभयारण्य में पहुंचे



शेष कार्य अंतिम चरण में है। इसी बीच चीतल हिरण को लाना भी शुरू हो गया है। गांधीसागर अभयारण्य में चीतों के पुनर्स्थापना के पूर्व शाकाहारी वन्य प्राणियों की संख्या बढ़ाने हेतु 1250 चीतल हिरण लाने की योजना है, ताकि चीतों को शिकार के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध हो सके। कान्हा नेशनल पार्क से आने वाले कुल 500 में से 23 हिरण सोमवार को गांधीसागर अभयारण्य में पहुंचे हैं। इन्हें पशु चिकित्सक की निगरानी में शाकाहारी वन्य प्राणी हेतु निर्मित 90 हेक्टेयर के बाड़े में छोड़ दिया गया है।



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