आंगनबाड़ी भर्ती में रिश्वतखोरी! छतरपुर के महिला बाल विकास अधिकारी सस्पेंड

Sanjay Dhiman | Aug 06, 2026, 19:03 IST
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छतरपुर में आंगनबाड़ी भर्ती में रिश्वत मांगने के आरोप में DPO दिनेश दीक्षित निलंबित। कलेक्टर की सिफारिश पर सागर कमिश्नर ने की कार्रवाई। मेरिट लिस्ट में हुई गड़बड़ी सामने आई।

छतरपुर में आंगनबाड़ी भर्ती के दौरान रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी दिनेश दीक्षित पर यह आरोप था। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही साबित हुए। सागर संभाग कमिश्नर अनिल सुचारी ने उन्हें निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई नई कलेक्टर मृणाल मीणा की सिफारिश पर हुई।



रिश्वत मांगने का आरोप

छतरपुर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका पदों पर भर्ती चल रही थी। इस दौरान नौकरी दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगी गई। यह शिकायत सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू की।



जांच में सामने आया कि आरोप सही थे। अधिकारी दिनेश दीक्षित इस पूरे मामले में सीधे शामिल पाए गए। उन पर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगा।



मेरिट लिस्ट में हुई गड़बड़ी

जांच के दौरान एक और बड़ी बात सामने आई। जिन कैंडिडेट्स ने रिश्वत नहीं दी, उनकी नियुक्ति रोक दी गई। ये उम्मीदवार मेरिट लिस्ट में सबसे ऊपर थे।



इनके दस्तावेजों में भी हेरफेर किया गया। इसके बदले कम मेरिट वाले कैंडिडेट्स को मौका दिया गया। जिन उम्मीदवारों ने रिश्वत दी, उन्हें पात्र घोषित कर दिया गया।



यह पूरा खेल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। सरकारी नौकरी में इस तरह की गड़बड़ी युवाओं के भरोसे को कमजोर करती है।



वीडियो बना सबूत

रिश्वत मांगने का एक वीडियो सामने आया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। छतरपुर कलेक्टर ने इस वीडियो की जांच कराई।



वीडियो के सत्यापन के बाद तस्वीर साफ हो गई। कलेक्टर मृणाल मीणा ने निलंबन का प्रस्ताव सागर संभाग आयुक्त को भेजा। कमिश्नर अनिल सुचारी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया।



मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की गई। अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का आदेश जारी हुआ।



कलेक्टर का सख्त रुख

मृणाल मीणा ने हाल ही में छतरपुर कलेक्टर का पदभार संभाला है। पदभार लेने के बाद से ही उन्होंने भ्रष्टाचार पर सख्ती दिखाई है।



इस निलंबन को प्रशासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा बताया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं और भर्ती में पारदर्शिता जरूरी है।



आगे क्या होगा

प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी। भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों पर नजर रखी जाएगी।



फिलहाल दिनेश दीक्षित निलंबित हैं। आगे विभागीय जांच में उनकी भूमिका और स्पष्ट होगी। मेरिट लिस्ट में हुए बदलाव की भी समीक्षा हो सकती है।



यह मामला सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। यह पूरी भर्ती व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया जरूरी है।



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