किडनी फेल हुई तो कुकर से बनाई डायलिसिस मशीन, 13 साल से घर पर कर रहा इलाज
समझें क्या है पूरा मामला...
- किडनी फेल हुई तो कुकर से बनाई मशीन।
- 13 साल से कुकर वाली डायलिसिस मशीन पर जिंदा।
- गरीब छात्र की जुगाड़ से डॉक्टर भी हुए हैरान।
- अस्पताल का खर्च नहीं उठा सका तो बना ली मशीन।
- रसोई के बर्तनों से बनी जिंदगी बचाने वाली मशीन।
चीन के हू सोंगवेन की दोनों किडनियां 1993 में फेल हो गई थीं। अस्पताल का खर्च उठाते-उठाते उनका पूरा परिवार बर्बाद हो गया। 1999 में उन्होंने घर के बर्तनों और प्रेशर कुकर से अपनी डायलिसिस मशीन बना ली। पिछले 13 साल से वे इसी मशीन से अपना इलाज कर रहे हैं। उनकी कहानी सामने आने पर पूरे चीन में हैरानी जताई गई।
पढ़ाई के बीच टूटा सपना
हू सोंगवेन नानजिंग शहर में मौसम वैज्ञानिक बनने की पढ़ाई कर रहे थे। यह बात साल 1993 की है। परिवार ने उनकी पढ़ाई पर अच्छी रकम खर्च की थी।
इसी दौरान डॉक्टरों ने जांच में बताया कि उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो गई हैं। यह खबर पूरे परिवार के लिए बड़ा झटका थी।डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि जिंदा रहने के लिए हर हफ्ते डायलिसिस जरूरी है। इसका खर्च आम परिवार के लिए मुश्किल था।
इलाज के खर्च ने तोड़ी कमर
किडनी फेल होने के बाद हू सोंगवेन को छह साल तक अस्पताल जाना पड़ा। हर दो-तीन दिन में उन्हें डायलिसिस के लिए जाना होता था। हर विजिट पर लगभग 50 पाउंड यानी 5,000 रुपए से ज्यादा खर्च होता था। हफ्ते में दो-तीन बार होने वाला यह खर्च परिवार की कमर तोड़ने लगा।
छह साल में परिवार की पूरी जमा-पूंजी खत्म हो गई। यहां तक कि जमीन-जायदाद भी इलाज में चली गई। साल 1999 तक हालात इतने बिगड़ गए कि अस्पताल जाने के पैसे ही नहीं बचे।
किचन के सामान से बना डाली मशीन
पैसे खत्म होने के बाद भी हू सोंगवेन ने हार नहीं मानी। उन्होंने मेडिकल की एक पुरानी किताब उठाई और डायलिसिस की प्रक्रिया को समझना शुरू किया।
इसके बाद उन्होंने घर के बर्तनों, प्रेशर कुकर, मेडिकल ट्यूब्स और कुछ केमिकल्स की मदद से अपने घर के एक छोटे कमरे में डायलिसिस मशीन तैयार कर ली। यह खबर सामने आने के बाद वे दुनिया भर में मशहूर हो गए। उन्हें कई जगहों से इंटरव्यू के लिए बुलाया गया।
इंटरव्यू में बताई पूरी कहानी
हू सोंगवेन ने चीनी मीडिया संस्थान 'सॉदर्न वीकली' को इंटरव्यू दिया था। उनका कहना था कि हाई स्कूल की डिग्री और डायलिसिस की समझ होने पर यह मशीन सुरक्षित तरीके से चलाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि मशीन बनाने में सबसे बड़ा खर्च ब्लड पंप का था। पहले उन्होंने खुद ब्लड पंप बनाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए।
बाद में उन्होंने लगभग 500 पाउंड यानी करीब 50,000 रुपए खर्च करके एक मेडिकल ब्लड पंप खरीदा। इसके बाद हर ट्रीटमेंट का खर्च घटकर सिर्फ 6 पाउंड यानी करीब 600 रुपए रह गया।
फिल्टर को आठ बार करते थे इस्तेमाल
हू सोंगवेन ने बताया कि मशीन का सबसे जरूरी हिस्सा फिल्टर है। एक नया फिल्टर 10 पाउंड का आता है, लेकिन वे अपने तरीके से फिल्टर को साफ करके एक ही फिल्टर को आठ बार इस्तेमाल कर लेते थे। इससे खर्च और भी कम हो जाता था।
उनकी 81 साल की मां इस पूरे काम में उनकी मदद करती थीं। वे ही इस प्रक्रिया में असिस्टेंट और डॉक्टर दोनों की भूमिका निभाती रही हैं।
चीन के हेल्थ सिस्टम पर उठे सवाल
जब यह कहानी सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए वायरल हुई, तो पूरे चीन में चर्चा शुरू हो गई। लोग हैरान थे कि कोई व्यक्ति बिना मेडिकल डिग्री के 13 साल तक खुद का इलाज कैसे कर सकता है।
इस कहानी ने चीन के हेल्थ सिस्टम की एक कड़वी सच्चाई भी सामने ला दी। साल 2008 की एक रिसर्च के मुताबिक, किडनी के मरीजों में से सिर्फ 10 प्रतिशत लोग ही नियमित अस्पताल का खर्च उठा पाते थे। बाकी 90 प्रतिशत मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ देते थे। हू सोंगवेन की कहानी ने इस हकीकत को सबके सामने ला दिया।
डॉक्टरों ने बताया था खतरनाक
स्थानीय डॉक्टरों को जब हू की इस देसी मशीन के बारे में पता चला, तो वे हैरान रह गए। उन्होंने पहले हू को चेतावनी दी थी कि यह तरीका बेहद खतरनाक है और इससे इन्फेक्शन से जान भी जा सकती है।
वीडियो वायरल होने के बाद चीनी सरकार ने हू सोंगवेन को एक नई सरकारी मेडिकल इंश्योरेंस स्कीम में शामिल कर लिया। अब वे अस्पताल जाकर भी कम खर्च में इलाज करा सकते हैं। हालांकि, हू का कहना है कि उनके घर से नजदीकी अस्पताल बहुत दूर है। इसलिए आज भी उनकी यह देसी मशीन उनके बहुत काम आती है।
FAQ
- हू सोंगवेन की किडनी कब फेल हुई थी?
हू सोंगवेन की दोनों किडनियां 1993 में फेल हो गई थीं। वे तब कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। डॉक्टरों ने उन्हें रीनल फेलियर बताया था। - हू सोंगवेन ने डायलिसिस मशीन कैसे बनाई?
उन्होंने घर के बर्तनों, प्रेशर कुकर और मेडिकल ट्यूब्स से मशीन बनाई। मेडिकल किताब पढ़कर उन्होंने प्रक्रिया समझी। यह मशीन 1999 में तैयार हुई थी। - अब हू सोंगवेन का इलाज कैसे होता है?
चीन सरकार ने उन्हें मेडिकल इंश्योरेंस स्कीम में शामिल किया है। अब वे अस्पताल में भी कम खर्च में इलाज करा सकते हैं। फिर भी दूरी के कारण वे घर वाली मशीन का इस्तेमाल करते हैं।
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