पूरे शहर की बिजली कटवाने वाले जज रामावतार पटेल की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, हाईकोर्ट तक जाएगी शिकायत
न्याय की कुर्सी पर बैठकर कानून की रक्षा करने वाले जब खुद आपा खो बैठें, तो प्रशासनिक व्यवस्था का बेपटरी होना तय है। मध्य प्रदेश के चित्रकूट से कुछ दिन पहले एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया था। यहां अपने सरकारी आवास की बिजली गुल होने से नाराज एक जज साहब ने कथित तौर पर पूरे शहर की बत्ती गुल करवा दी थी।
अब इस मामले ने गंभीर प्रशासनिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। बिजली विभाग की शिकायत और पुलिस की शुरुआती जांच के बाद अब यह मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंचने वाला है। इससे जज रामावतार पटेलकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
हाईकोर्ट तक जाएगी शिकायत
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जूनियर इंजीनियर प्रवीण वर्मा तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थानीय पुलिस बल को भी बुला लिया। जैसे ही इस गंभीर प्रशासनिक टकराव की खबर उच्च अधिकारियों तक पहुंची, सतना ग्रामीण के डिविजनल इंजीनियर पंकज द्विवेदी भी तुरंत सतना से चित्रकूट के लिए रवाना हो गए थे।
वर्तमान में क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम है और बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक (SP) इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेज रहे हैं। चूंकि मामला न्यायपालिका के एक अधिकारी से जुड़ा है, इसलिए अब सीधे हाईकोर्ट के स्तर से ही इस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
थाने तक पहुंचा हाई-प्रोफाइल मामला
कस्बे की बिजली अचानक दोबारा बंद होने से स्थानीय नागरिकों का गुस्सा भड़क उठा। करीब 50 बिजली उपभोक्ता विरोध दर्ज कराने रजौला सब स्टेशन पहुंच गए थे। वहां जब उन्हें पता चला कि खुद जज रामावतार पटेल ने आकर बिजली बंद करवाई है, तो जनता का आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया था।
सब स्टेशन पर ही विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी होने लगी। जनता का भारी दबाव और बढ़ता आक्रोश देखकर आखिरकार जज साहब ने कमरे का दरवाजा खोला और बिना कुछ बोले चुपचाप वहां से अपने घर की तरफ निकल गए थे।
इस घटना के बाद पीड़ित बिजली बिल ऑपरेटर ने जज रामावतार पटेल के खिलाफ चित्रकूट थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखित आवेदन दे दिया है।
ये था पूरा मामला...
पूरे विवाद की शुरुआत गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात करीब 2:00 बजे आए एक तेज आंधी-तूफान से हुई थी। इस प्राकृतिक आपदा के कारण मझगवां से आने वाले 33 केवी के दो मुख्य फीडर पूरी तरह ठप हो गए थे। चूंकि फॉल्ट घने जंगलों के बीच हुआ था और रात बेहद अंधेरी थी, इसलिए बिजली कंपनी की मेंटेनेंस टीम को पेट्रोलिंग करने और खराबी ढूंढने में काफी लंबा वक्त लगा था।
इसके बाद अगले दिन यानी शुक्रवार दोपहर 12:00 बजे मुख्य बिजली सप्लाई को बहाल किया जा सका। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण अभियंता प्रशांत सिंह के मुताबिक, शुक्रवार देर शाम तक आम जनता की लगभग सभी शिकायतों का निवारण कर दिया गया था। केवल कुछ व्यक्तिगत शिकायतें बची थीं, जिनमें दुर्भाग्य से जज साहब का सरकारी बंगला भी शामिल था।
सब स्टेशन पहुंचे जज साहब, मचा हड़कंप
शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे तक जब जज साहब के बंगले की बिजली नहीं सुधरी, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। वे खुद चित्रकूट के रजौला सब स्टेशन पहुंच गए थे। वहां ड्यूटी पर तैनात ऑपरेटर पवन सिंह को उन्होंने देर से लाइन सुधारने को लेकर जमकर फटकार लगाई थी।
उनका गुस्सा यहीं शांत नहीं हुआ। ऑपरेटर पवन सिंह के बयानों के मुताबिक, जज साहब ने रौब दिखाते हुए उसे दो-चार थप्पड़ भी जड़ दिए थे। जज के इस कड़े रुख और प्रशासनिक खौफ के आगे कर्मचारी पूरी तरह नतमस्तक हो गया।
खुद को कमरे में किया बंद, पूरे कस्बे को किया अंधेरे के हवाले
प्रत्यक्षदर्शियों और ऑपरेटर के अनुसार, इसके बाद सब स्टेशन पर एक अजीबोगरीब हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हुआ था। जज साहब ने ऑपरेटर को जबरन कमरे से बाहर निकाल दिया और खुद को अंदर से लॉक कर लिया था। उन्होंने बिजली स्टाफ को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए साफ कह दिया कि जब तक उनके बंगले की बिजली चालू नहीं होगी, तब तक पूरा कस्बा अंधेरे में डूबा रहेगा।
इस धमकी के बाद डरे-सहमे मेंटेनेंस स्टाफ ने आनन-फानन में सब स्टेशन का काम छोड़ जज साहब के बंगले की लाइन ठीक करना शुरू किया था। इस पूरे ड्रामे के दौरान करीब 1 घंटे तक रजौला सब स्टेशन से पूरे चित्रकूट की बिजली ठप रही और करीब 4 घंटे तक धर्मनगरी चित्रकूट का एक बड़ा हिस्सा अंधेरे के साए में रहा।
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