CJP के अभिजीत दीपके पहुंचे बालाघाट, बच्चों की मौत का हिसाब लेंगे, न्याय दिलाएंगे

Sanjay Dhiman | Sept 12, 2026, 18:21 IST
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बालाघाट के आदिवासी गांवों में तीन महीने में 30 बच्चों की मौत हुई। सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे और न्याय दिलवाने का भरोसा दिया।

बालाघाट के आदिवासी गांवों में तीन महीने में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP – Cockroach Janata Party) के फाउंडर अभिजीत दीपके शनिवार को बालाघाट पहुंचे। उन्होंने पीड़ित गांवों का दौरा कर परिवारों से मुलाकात की। दीपके ने साफ पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को मुख्य वजह बताया। उन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया।



बालाघाट पहुंचे अभिजीत दीपके

अभिजीत दीपके शनिवार को बालाघाट जिले में पहुंचे। यहां के बैहर क्षेत्र की अडोरी और मछुरदा पंचायत में बीते तीन महीने में 30 बच्चों की जान जा चुकी है। दीपके इन प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं। वे बोंदारी और कोरका गांव भी जाएंगे। साथ में आदिवासी युवा भी मौजूद रहे।



जैसे ही उनकी गाड़ी वहां पहुंची, युवाओं में उनके साथ फोटो खिंचाने की होड़ मच गई। एक बच्चे ने ऑटोग्राफ की जिद की। दीपके ने उसका नाम पूछकर हाथ पर ऑटोग्राफ दिया।



साफ पानी और इलाज की कमी

दीपके ने कहा कि आदिवासी बच्चे लगातार बीमार हो रहे हैं। उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। टीकाकरण की व्यवस्था भी सही नहीं है। पीने का साफ पानी न मिलने से लोग झीरिया का पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।



दीपके ने कहा कि देश में 7.8 प्रतिशत ग्रोथ रेट का दावा किया जा रहा है। लेकिन मूल निवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ एयरपोर्ट और संसद चमकाने से देश विश्वगुरु नहीं बनेगा। आदिवासी इलाकों में बेहतर जिंदगी, शिक्षा और मौके देने होंगे।



मंत्रियों और अधिकारियों पर आरोप

सीजेपी फाउंडर ने आदिवासियों की इस हालत के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार तय किए। उन्होंने आदिवासी विकास मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को जिम्मेदार बताया। दीपके ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को हेलीकॉप्टर में उड़ने के लिए नहीं चुना गया है। पार्टी आदिवासियों की इस लड़ाई में पूरा साथ देगी।



पीड़ित परिवारों से मुलाकात

दीपके उन गांवों में गए जहां बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि जो भी जरूरी होगा, वह किया जाएगा। जिन परिवारों ने अपने बच्चे खोए हैं, उन्हें न्याय जरूर दिलाया जाएगा।



जवाबदेही तय न होने के सवाल पर दीपके ने कहा कि वे यही देखने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस उनके समर्थकों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी चलेगी। जितनी लंबी लड़ाई होगी, उतना बड़ा संघर्ष होगा।



अस्पताल में अब भी भर्ती हैं बच्चे

सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन के मुताबिक अस्पताल में अब भी करीब 50 बच्चे भर्ती हैं। इनमें खसरा, मलेरिया, निमोनिया, चर्मरोग और बुखार के मरीज शामिल हैं। हर दिन करीब 5 से 10 नए बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है।



बालाघाट के आदिवासी इलाकों में यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं रहा। यह सुविधाओं की कमी और जवाबदेही का सवाल बन गया है। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में हैं।



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