सीएम एक्शन के बाद सस्पेंड बैंक CEO पीएस धनवाल को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं, स्टे से इनकार
News in Short
सीएम मोहन यादव के निर्देश पर CEO निलंबित।
सहकारी बैंक के सीईओ धनवाल कुछ ही दिनों में होने वाले थे रिटायर।
निलंबन आदेश पर तत्काल रोक लगाने से कोर्ट का इनकार।
अगली सुनवाई 31 मार्च 2026 को निर्धारित।
News in detail
सीधी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) पीएस धनवाल के लिए यह घटना एक बड़ा झटका है। दरअसल, वे कुछ ही दिनों में रिटायर होने वाले थे। अचानक निलंबन की कार्रवाई से उनके सर्विस रिकॉर्ड और प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस कारण उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। वे चाहते थे कि रिटायरमेंट से पहले निलंबन हटाया जाए और उनका कार्यकाल सामान्य रूप से पूरा हो सके।
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हाईकोर्ट ने स्टे देने से किया इनकार
जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनिंदर एस भट्टी की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने निलंबन आदेश पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट का मानना था कि इस स्तर पर सभी पक्षों की पूरी दलील और जवाब सुने बिना कोई अंतरिम राहत देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले अपेक्स बैंक और शासन की ओर से विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद ही मामले के मेरिट पर विचार किया जाएगा। इस आदेश के बाद फिलहाल धनवाल का निलंबन यथावत रहेगा।
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अपेक्स बैंक और शासन ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान अपेक्स बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपरा और कपिल दुग्गल ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि निलंबन गंभीर आरोपों के आधार पर किया गया है। इसलिए इसे तुरंत स्थगित करना उचित नहीं होगा। शासन की ओर से उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि पूरा जवाब तैयार है। उन्होंने कहा कि उसे रिकॉर्ड पर लाने का अवसर दिया जाए। दोनों पक्षों के ठोस विरोध को देखते हुए कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार किया और स्टे देने से मना कर दिया।
CM के दौरे के बाद हुई थी कार्रवाई
यह पूरा मामला बीते रविवार को सामने आया था, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव सीधी जिले के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने जनसंवाद कार्यक्रम के जरिए आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद किया। साथ ही विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर फीडबैक लिया। शिकायतों और अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने सख्त रुख अपनाया और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसी के तहत जहां कलेक्टर को हटाया गया। वहीं, सहकारी बैंक के CEO पीएस धनवाल को भी निलंबित कर दिया गया।
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31 मार्च पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 31 मार्च 2026 तय की है। इस दिन अपेक्स बैंक और शासन अपना विस्तृत जवाब पेश करेंगे। कोर्ट इसी आधार पर आगे की दिशा तय करेगा। फिलहाल धनवाल के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि निलंबन आदेश प्रभावी है और उन्हें कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। अगली सुनवाई में कोर्ट का रुख क्या रहेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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निलंबन आदेश में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक ने पीएस धनवाल का निलंबन आदेश जारी किया है। नाबार्ड के निरीक्षण प्रतिवेदन में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। इसमें कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) के आंकड़ों का मिलान न होना, बैंक की संचित हानि में वृद्धि और गबन के मामलों में कार्रवाई न करना शामिल है। इसके अलावा, उन पर कर्मचारियों को अनुचित लाभ देने, जांच टीम को दस्तावेज न देने और असहयोग करने के आरोप हैं। इन कृत्यों को मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के तहत दंडनीय अपराध माना गया है।