सीएम किसान हेल्पलाइन: 2 दिन में जवाब देने का वादा, 7 दिन बाद भी नहीं आया फोन!
लेकिन जब आप खेती से जुड़ा सवाल पूछते हैं, तो जवाब मिलता है अभी जानकारी नहीं है, एक्सपर्ट से पूछकर बताएंगे।
सीएम किसान हेल्पलाइन रियलिटी चेक
आप इंतजार करते हैं। एक दिन, दो दिन, तीन दिन... और देखते ही देखते सात दिन गुजर जाते हैं। न एक्सपर्ट का फोन आता है और न ही कोई मैसेज। मध्यप्रदेश की सीएम किसान हेल्पलाइन के रियलिटी चेक में द सूत्र के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी देने के लिए 30 अप्रैल 2026 को सीएम किसान हेल्पलाइन नंबर 155253 शुरू किया था।
इसका मकसद था कि किसानों को खाद, बीज, फसल, मौसम और सरकारी योजनाओं से जुड़े सवालों के लिए भटकना न पड़े। उन्हें एक फोन पर सही मार्गदर्शन मिल सके। लेकिन हेल्पलाइन शुरू होने के करीब छह महीने बाद जब द सूत्र ने इसकी हकीकत जानने के लिए फोन किया, तो पता चला कि कॉल सेंटर पर सवाल तो दर्ज हो रहे हैं, लेकिन जवाब मिलने का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है।
पहले जानिए, क्या बातचीत हुई?
द सूत्र ने सीएम किसान हेल्पलाइन की पड़ताल के लिए 29 अक्टूबर 2026 को टोल-फ्री नंबर 155253 पर फोन लगाया। फोन लगते ही कॉल सेंटर पर मौजूद ऑपरेटर ने कॉल रिसीव की और रिपोर्टर से सामान्य जानकारी मांगी। रिपोर्टर ने खुद को भोपाल जिले की बैरसिया तहसील का किसान बताया। इसके बाद खेती से जुड़ा एक सामान्य सवाल पूछा। रिपोर्टर ने कहा, "मुझे इस बार गेहूं की फसल नहीं लगानी है। गेहूं की जगह कोई दूसरी फसल लगाना चाहता हूं। बताइए, इस मौसम में कौन-सी फसल लगाना ठीक रहेगा?"
ऑपरेटर ने अपने पास उपलब्ध जानकारी खंगालनी शुरू की। कुछ देर तक जवाब तलाशने के बाद उसने कहा कि फिलहाल उसके पास यह जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऑपरेटर ने बताया कि सवाल कृषि विशेषज्ञों को भेजा जाएगा और वहां से जानकारी मिलने के बाद जवाब दिया जाएगा।
फूलों की खेती पर भी सवाल पूछा
द सूत्र के रिपोर्टर ने बातचीत आगे बढ़ाते हुए दूसरा सवाल पूछा। अगर इस मौसम में फूलों की खेती करना चाहें, तो क्या यह सही रहेगा? लेकिन ऑपरेटर के पास इस सवाल का भी तत्काल जवाब नहीं था। उसने फिर कहा कि विशेषज्ञों से जानकारी मिलने के बाद ही इस बारे में कुछ बताया जा सकेगा। रिपोर्टर ने यह भी जानना चाहा कि विशेषज्ञों से जवाब कब तक मिलेगा। शुरुआत में कोई निश्चित समय नहीं बताया गया। बाद में दो दिन के भीतर फोन या मैसेज के जरिए जानकारी देने की बात कही गई। यानी हेल्पलाइन पर सवाल दर्ज हो गया था, लेकिन जवाब के लिए विशेषज्ञों का इंतजार करना था।
दो दिन का वादा, सात दिन बाद भी जवाब नहीं!
द सूत्र ने 29 अक्टूबर को हेल्पलाइन पर फोन किया था। ऑपरेटर की ओर से दो दिन में जानकारी देने की बात कही गई थी। लेकिन 30 अक्टूबर बीत गया। 31 अक्टूबर भी निकल गया। इसके बाद नवंबर शुरू हो गया। 5 नवंबर तक, यानी सात दिन बीत जाने के बाद भी हेल्पलाइन से कोई जवाब नहीं मिला। न किसी कृषि विशेषज्ञ का फोन आया और न ही किसी तरह का मैसेज। इस पूरे मामले का एक और दिलचस्प पहलू है। 30 अप्रैल 2026 को जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सीएम किसान हेल्पलाइन की शुरुआत की थी, तब उन्होंने खुद फोन करके इसका परीक्षण किया था। मुख्यमंत्री ने ऑपरेटर से पूछा था कि वे गर्मी के मौसम में तीसरी फसल लेना चाहते हैं, तो कौन-सी फसल लगाना ठीक रहेगा? उस समय भी ऑपरेटर मुख्यमंत्री के सवाल का तत्काल जवाब नहीं दे पाया था।