सीएम हाउस में किसान संघ की 48 मांगें, 11 लाख डिफॉल्टर किसानों का ब्याज माफ करने की मांग

Aman Vaishnav | Nov 04, 2026, 14:19 IST
सीएम हाउस में डॉ. मोहन यादव और किसान संघ के बीच 48 मांगों पर चर्चा हुई, जिसमें कर्ज निपटारे और समर्थन मूल्य पर जोर दिया गया।
CM Mohan Yadav and Bharatiya Kisan Sangh leaders hold high level meeting on loan waiver MSP procurement and farmer welfare issues
राजधानी भोपाल स्थित सीएम हाउस में उस समय माहौल काफी गरमा-गरम हो गया, जब भारतीय किसान संघ के 20 प्रतिनिधि अपनी 48 मांगों को लेकर पहुंचे। मंगलवार को हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ कृषि विभाग, राजस्व, वन और बिजली विभाग के तमाम बड़े अफसर मौजूद थे। बैठक करीब दो घंटे तक चली, जिसमें किसानों के रोजमर्रा के मुद्दों से लेकर सरकारी नीतियों पर बात हुई।

बैठक के दौरान कई बार किसान नेताओं और कृषि विभाग के सचिव निशांत वरबड़े के बीच सीधी बहस भी देखने को मिली। आइए जानते हैं कि इस बैठक में कौन-कौन से मुख्य मुद्दे उठे और उन पर क्या बातचीत हुई...



किसानों का कर्ज माफ करने और ब्याज छूट की मांग

बैठक का सबसे बड़ा और अहम मुद्दा डिफाल्टर किसानों से जुड़ा था। किसान संघ के नेताओं ने सरकार के सामने साफ शब्दों में अपनी बात रखी।



  • किसान संघ ने कहा कि पिछली कर्ज माफी योजना की वजह से प्रदेश के 11 लाख से ज्यादा किसान डिफाल्टर बन चुके हैं।
  • उन्होंने मांग की कि इन सभी किसानों का ब्याज पूरी तरह माफ किया जाए।
  • वहीं अगर सरकार इन किसानों से केवल मूलधन दो आसान किश्तों में जमा करा लेती है, तो सभी किसानों का कर्ज माफ होने जैसी स्थिति बनेगी और वे फिर से नियमित किसान बन जाएंगे।

इस बड़ी मांग को सुनने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने भरोसा दिया कि वे इस पूरे मामले को दिखवाएंगे कि किसानों के हित में क्या सबसे बेहतर फैसला लिया जा सकता है।



कृषि सचिव और किसान संघ में तीखी नोकझोंक

बैठक के दौरान जब मंडियों की अव्यवस्था और फसलों की खरीदी का मुद्दा उठा, तो भारतीय किसान संघ मध्य प्रदेश के अध्यक्ष (MP agriculture department) के नेता कमल सिंह आंजना और कृषि सचिव निशांत वरबड़े आमने-सामने आ गए। इस बातचीत में खुद मुख्यमंत्री को भी बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा।



मंडियों में 10 टन के तौल कांटे: कमल सिंह आंजना ने सवाल उठाया कि मंडियों में 10 टन वाले बड़े कांटे अभी तक क्यों नहीं लगे? इस पर सचिव ने कहा कि कांटे लगाए जा रहे हैं। आंजना ने तुरंत जवाब दिया कि 6 महीने बीत जाने के बाद भी 131 में से सिर्फ 29 कांटे ही लग पाए हैं। इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सचिव से पूछा कि जब फंड की कोई कमी नहीं है तो इतनी देरी क्यों हो रही है? सचिव ने जवाब दिया कि तीन महीने के भीतर टेंडर कराकर सभी कांटे लगवा दिए जाएंगे।



फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी: किसानों ने बात उठाई कि छतरपुर में मूंगफली और भिंड-मुरैना में बाजरे की सरकारी खरीद समर्थन मूल्य पर नहीं हो रही है। जब किसानों ने कहा कि जैसे मूंग खरीदी और अन्य उपजों की व्यवस्था बनती है, वैसे ही इनकी भी खरीद हो, तो सचिव ने कहा कि वे इसे देखते हैं। इस पर किसान नेता आंजना ने दो-टूक कहा कि इसे देखना नहीं है बल्कि सरकार को इसे खरीदना ही पड़ेगा।



सूखाग्रस्त इलाकों में बोरवेल पर रोक: किसान संघ ने मांग रखी कि कम बारिश वाले और सूखाग्रस्त जिलों में नए नलकूप खनन पर तुरंत रोक लगाई जाए। जब अफसरों ने कहा कि यह काम तो जिला कलेक्टरों का है, तो किसान नेताओं ने कहा कि क्या हम कलेक्टरों के पास जाएं? यह आदेश सीधे शासन स्तर से यहां से जारी होगा तो ज्यादा ठीक रहेगा।



बड़े तालाब का कैचमेंट और पश्चिमी बायपास का मुद्दा

बैठक में सिर्फ खेती-किसानी ही नहीं, बल्कि जमीन अधिग्रहण और शहरी विकास से जुड़े नुकसान पर भी बात हुई।



  • किसान संघ ने भोपाल के बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया का मुद्दा अलग से उठाया।
  • उन्होंने साफ कहा कि तालाब संरक्षण के नाम पर आसपास के किसानों का किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए।
  • पश्चिमी बायपास के प्रोजेक्ट को लेकर भी किसानों ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के चक्कर में किसी भी किसान की जमीन या रोजी-रोटी का नुकसान नहीं होना चाहिए।
  • किसान प्रतिनिधियों ने स्पष्ट मांग रखी कि गांवों का स्वरूप न बिगाड़ा जाए और गांव को गांव ही रहने दिया जाए।

इस बैठक में भारतीय किसान संघ (Bharatiya Kisan Sangh) की ओर से कमल सिंह आंजना, महेश चौधरी और गिरिजा देवी ठाकुर सहित प्रमुख सदस्य मौजूद रहे।



प्राकृतिक खेती और गोपालन करने वालों को मिलेगा अनुदान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक के अंत में किसानों और पशुपालकों के हित में एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गोशालाओं की देखभाल करने वाले ऐसे सभी पशुपालकों को अनुदान का फायदा देगी, जो जैविक और प्राकृतिक खेती को मजबूत बनाने का काम करेंगे।



साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवंश से प्राकृतिक खेती को बहुत बड़ा संबल मिलता है। इसी सोच के साथ किसानों की सहकारी समितियों को गोपालन के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने कम बारिश वाले सूखा प्रभावित जिलों में नए बोरवेल खनन पर रोक लगाने की पहल भी शुरू कर दी है।

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