मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विभाग जरूरी फाइलें अटकाने में अव्वल, भड़के सीएम मोहन यादव
भोपाल से एक बड़ी खबर आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद अफसरों की क्लास लगाई है। वजह थी सरकार की जरूरी फाइलों का अटकना है। सीएम कार्यालय से जुड़ी नोटशीट पर समय पर फैसला नहीं हो रहा था। इसी बात पर सीएम नाराज हो गए।
नोटशीट पर सीएम सख्त
मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजी गई ए-प्लस नोटशीट पर ज्यादा से ज्यादा 15 दिन में फैसला लेना होता है। वहीं, 821 से ज्यादा नोटशीट दो महीने से अटकी हुई हैं। एसीएस (Additional Chief Secretary) और पीएस (Principal Secretary) फैसला लेने के बजाय फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग भेज रहे हैं। इससे जरूरी काम समय पर पूरे नहीं हो पा रहे।
कैलाश का विभाग जरूरी फाइलें अटकाने में अव्वल
जरूरी कामें की फाइलों को देखें तो सबसे ज्यादा नोटशीट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नगरीय विकास एवं आवास विभाग में लंबित मिली। यह वही मंत्री हैं जो अक्सर इंदौर की उपेक्षा की बात उठाते हैं। वहीं, उनके अपने विभाग में ही सबसे ज्यादा फाइलें अटकी निकलीं। मंत्री विजय शाह का जनजातीय कार्य विभाग भी इस लिस्ट में आगे है। मंत्री उदय प्रताप सिंह के स्कूल शिक्षा और गृह विभाग में भी देरी सामने आई। मंत्री प्रहलाद पटेल के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग का नाम भी इसमें शामिल है।
711 घोषणाएं, 70% अटकी
मुख्यमंत्री ने 10 विभागों से जुड़ी कुल 711 घोषणाएं की थीं। इनमें से करीब 70 प्रतिशत घोषणाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। सबसे ज्यादा 149 घोषणाएं लोक निर्माण विभाग में पेंडिंग हैं। इसे पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) भी कहा जाता है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नगरीय विकास विभाग की 121 घोषणाएं भी अटकी हैं। मंत्री प्रहलाद पटेल के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की 70 घोषणाएं पेंडिंग हैं।
261 ट्रांसफर भी रुके थे
सीएम ऑफिस की ए प्लस नोटशीट में 261 ट्रांसफर के मामले भी शामिल थे। इन्हें एसीएस, पीएस और सचिवों ने रोक रखा था। इसके अलावा ए कैटेगरी से जुड़े ट्रांसफर भी अफसरों ने रोके थे। इस तरह कुल 1889 ट्रांसफर लंबित पड़े थे। सीएम ने इस पर भी नाराजगी जताई।
बैठक में सीएम की सख्ती
शुक्रवार, 03 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ए, ए-प्लस नोटशीट और घोषणाओं के पालन की समीक्षा की। बैठक में हर विभाग के एसीएस, पीएस और विभागाध्यक्ष प्रजेंटेशन दे रहे थे। सबसे पहले नगरीय विकास विभाग ने अपनी प्रगति बताई। इसके बाद स्कूल शिक्षा और गृह विभाग ने अपनी रिपोर्ट रखी।
चौथे विभाग की बारी आने से पहले ही सीएम ने प्रजेंटेशन रोक दिया। उन्होंने पूछा कि जब काम सर्वोच्च प्राथमिकता का है तो फैसला क्यों नहीं हो रहा। सीएम ने कहा कि इन नोटशीट पर कार्रवाई के दिन पहले से तय होते हैं। इसके बावजूद फैसला न होना गलत बात है।
फाइल रोकना ठीक नहीं
सूत्रों के मुताबिक सीएम ने अफसरों से कहा कि कानूनी अड़चन होने पर फाइल उनके सामने पेश करें। फाइलें अपने पास रोककर रखना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि रोकने से बेहतर है कि मामले का निराकरण हो जाए।
सीएम ने यह भी कहा कि जनता और जनप्रतिनिधि बड़ी उम्मीद से आते हैं। उन्हें भरोसा रहता है कि उनकी बात सुनी जाएगी। अफसरों को उनके साथ अच्छा व्यवहार रखना चाहिए। इससे विपरीत हालात नहीं बनने चाहिए।
आधी रात आदेश जारी
सीएम की सख्ती का असर उसी रात दिखा। मुख्यमंत्री ने विभागों के एसीएस और पीएस से कहा कि 03 जुलाई की रात ही आदेश जारी करें। इसके बाद रात 12:30 बजे तक कई विभागों ने आदेश जारी कर दिए। कुछ विभागों ने आधी रात में ही फाइलों पर फैसला ले लिया।
अफसरों को नसीहत भी
सीएम मोहन यादव ने बैठक में अफसरों को आपसी संवाद बढ़ाने की सलाह भी दी। उनका कहना था कि तालमेल की कमी से फाइलें बिना वजह अटकती हैं। सीएम ने साफ कहा कि सरकारी सेवकों के तबादले और जनता से जुड़े काम प्राथमिकता में आते हैं। इन पर देरी होने से आम लोगों को परेशानी होती है।
टॉप 10 विभागों की लिस्ट
नगरीय विकास विभाग की जिम्मेदारी एसीएस संजय दुबे पर है और यह पहले नंबर पर है। दूसरे नंबर पर स्कूल शिक्षा विभाग है, जिसके पीएस डॉ. संजय गोयल हैं। तीसरे नंबर पर गृह विभाग है, जिसके एसीएस संजय कुमार शुक्ल हैं। चौथे नंबर पर जनजातीय कार्य विभाग है, जिसके पीएस गुलशन बामरा हैं। पांचवें नंबर पर पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग है, जिसकी एसीएस दीपाली रस्तोगी हैं।
इसके बाद स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग छठे नंबर पर है, जिसके एसीएस अशोक बर्णवाल हैं। सातवें नंबर पर राजस्व विभाग है, जिसके पीएस रमेश कुमार हैं। आठवें नंबर पर लोक निर्माण विभाग है, जिसके पीएस सुखबीर सिंह हैं। नौवें नंबर पर वन विभाग है, जिसके पीएस संदीप यादव हैं। दसवें नंबर पर जल संसाधन विभाग है, जिसके एसीएस डॉ. राजेश राजौरा हैं।
इस पूरी लिस्ट से साफ है कि बड़े विभाग ही जरूरी फाइलें ज्यादा अटका रहे हैं। सीएम की सख्ती के बाद अब इन विभागों पर नजर बनी रहेगी। आने वाले दिनों में इसका असर आम जनता के कामों पर भी दिख सकता है।
नोटशीट क्या होती है
सीएम ऑफिस से निकलने वाली सबसे जरूरी फाइलों को ए प्लस नोटशीट कहा जाता है। इसे 24 घंटे से पांच दिन के भीतर निपटाना होता है। इसके अलावा ए कैटेगरी की फाइल 15 दिन में पूरी करनी होती है। बी कैटेगरी में विधायक, सांसद और मंत्रियों की सिफारिशें आती हैं। यह नोटशीट बड़े पैमाने पर आती है, इसलिए इसकी कोई मॉनिटरिंग नहीं होती। 'सी' कैटेगरी में जनता की शिकायतें आती हैं। इनकी कोई तय समयसीमा नहीं होती।
ये खबरें भी पढ़िए...
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम को क्या चिट्ठी लिखी? मचा राजनीतिक घमासान
मैंने भी संघ की चड्डी पहनी है... अफसरों पर कैलाश विजयवर्गीय का तंज
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पुत्र आकाश को सौंपी विधानसभा एक, क्या हो रही 2028 की तैयारी?
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले- हम काफिर तो हमारी बनाई सड़क पर मत चलो, लाड़ली बहना की राशि मत लो