सीएम मोहन यादव ने सिंगल क्लिक से जारी की 213 करोड़ की पेंशन राशि, नरसिंहपुर को मिली सांदीपनि की सौगात
मुख्यमंत्री मोहन यादव रविवार को नरसिंहपुर जिले के दौरे पर थे। यहां उन्होंने सांदीपनि स्कूल लोकार्पण के साथ स्कूल बस सेवा की शुरुआत की। इसी मंच से सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 35.56 लाख से ज्यादा हितग्राहियों को राशि भेजी गई। यह सिंगल क्लिक ट्रांसफर 213.41 करोड़ रुपए से ज्यादा का रहा। स्वामित्व योजना (SVAMITVA – Survey of Villages Abadi and Mapping with Improvised Technology in Village Areas) के तहत पात्र ग्रामीणों को संपत्ति अधिकार अभिलेख भी मिले।
स्कूल बस को दिखाई हरी झंडी
मुख्यमंत्री ने शासकीय सांदीपनि स्कूल बस सेवा का शुभारंभ किया। उन्होंने हरी झंडी दिखाकर छात्रों की बस को रवाना किया। यह बस विद्यार्थियों के आने-जाने के लिए चलेगी। यह स्कूल बस सेवा सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए है।
कार्यक्रम से पहले 15 बसों का जिक्र आया था। इस संख्या की पुष्टि बाकी है। सोचिए एक बार। स्कूल पहुंचने की फिक्र घटे, तो पढ़ाई पर कितना ध्यान बढ़ेगा?
सांदीपनि विद्यालय की खासियत
नरसिंहपुर का सांदीपनि विद्यालय अब आम जनता के लिए खुल गया। इसे लोकार्पण कहते हैं, यानी नए भवन की औपचारिक शुरुआत। शासकीय यानी सरकारी स्कूल, जहां पढ़ाई सबके लिए खुली है।
इन स्कूलों का नाम महर्षि सांदीपनि पर रखा गया है। वे भगवान कृष्ण के गुरु माने जाते हैं।
लागत और सुविधाएं कितनी?
कार्यक्रम से पहले एक ब्योरे में भवन की लागत 42.52 करोड़ रुपए बताई गई। दूसरे ब्योरे में यह रकम 45 करोड़ रुपए से ज्यादा लिखी गई। यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है।
एक ब्योरे में डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब और विज्ञान प्रयोगशाला गिनाई गई। यानी बच्चों को किताब के साथ आधुनिक सुविधा भी मिलनी है।
35.56 लाख खातों में पेंशन
मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि भेजी। यानी पैसा सीधे बैंक खातों में पहुंचा। बीच में किसी के हाथ से रकम नहीं गुजरी।
प्रदेश के 35.56 लाख से ज्यादा हितग्राहियों के खातों में राशि पहुंची। कुल रकम 213.41 करोड़ रुपए से ज्यादा रही। हितग्राही यानी योजना का लाभ पाने वाले लोग।
यह पेंशन बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग जैसे जरूरतमंदों के लिए चलती है। मध्य प्रदेश में यह योजना लाखों परिवारों का सहारा है।
हर हितग्राही को कितना मिला?
रकम बड़ी लगती है, लेकिन कितने लोगों में बंटी? 213.41 करोड़ रुपए को 35.56 लाख लोगों में बांटिए। औसतन करीब 600 रुपए हर हितग्राही के हिस्से आते हैं।
पिछली बार 24 सितंबर को देवास में राशि भेजी गई थी। तब 35.42 लाख लोगों को 212.57 करोड़ रुपए मिले थे। इस बार करीब 14,000 हितग्राही बढ़ गए। राशि भी करीब 84 लाख रुपए ज्यादा रही। छोटी रकम भी जरूरतमंद के घर में बड़ा सहारा बनती है।
स्वामित्व योजना से हक का कागज
कार्यक्रम में पात्र ग्रामीणों को संपत्ति के अधिकार अभिलेख बांटे गए। ये कागज स्वामित्व योजना के तहत मिलते हैं। कागज हाथ में हो, तो घर का हक सिर्फ जुबानी दावा नहीं रहता। यह गांव के घरों का मालिकाना हक दर्ज करने वाली योजना है।
संपत्ति अधिकार अभिलेख क्या है?
यह मालिकाना हक का सरकारी कागज होता है। इससे ग्रामीण अपने घर पर अपना हक साबित कर सकते हैं। जमीन-मकान के विवाद घटाने में भी ऐसे कागज मददगार माने जाते हैं।
इसी मंच से विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ सौंपे गए। किन योजनाओं के कितने लोग थे, यह ब्योरा अभी सामने नहीं आया है।
सांदीपनि स्कूलों का विस्तार
क्या यह सिर्फ एक स्कूल की कहानी है? जवाब है, नहीं। जुलाई में उज्जैन में मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों का खर्च बताया था। उनके मुताबिक प्रदेशभर में विस्तार की लागत 25,500 करोड़ रुपए है।
दूसरे चरण में 405 नए स्कूल
अगस्त की रिपोर्ट में दूसरे चरण का जिक्र आया। इसमें 405 नए सांदीपनि स्कूल खोले जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा का यह बड़ा अभियान है। यानी नरसिंहपुर का भवन अकेला नहीं है, सूची आगे बढ़ रही है।
नरसिंहपुर को और क्या मिला?
कार्यक्रम में 175.14 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की भी घोषणा की गई। इन विकास कार्यों में कौन से काम शामिल हैं, यह अभी साफ नहीं है। यानी एक ही मंच से पढ़ाई, पेंशन और हक का कागज मिला।
मुख्यमंत्री का नरसिंहपुर दौरा शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और संपत्ति अधिकार से जुड़ा रहा। अब नजर इस पर रहेगी। बच्चों तक इसका फायदा कितनी जल्दी पहुंचेगा?
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नरसिंहपुर जिले के दौरे में क्या-क्या ऐलान किए?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नरसिंहपुर जिले में सांदीपनि स्कूल का लोकार्पण किया, स्कूल बस सेवा की शुरुआत की, और सिंगल क्लिक ट्रांसफर के जरिए 35.56 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों को 213.41 करोड़ रुपए भेजे। - सांदीपनि विद्यालय की विशेषताएँ क्या हैं?
सांदीपनि विद्यालय सरकारी स्कूल है, जिसमें डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब और विज्ञान प्रयोगशाला जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसकी लागत 42.52 करोड़ रुपए से 45 करोड़ रुपए के बीच बताई गई है। - स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति अधिकार अभिलेख का क्या महत्व है?
स्वामित्व योजना के तहत दिए गए संपत्ति अधिकार अभिलेख ग्रामीणों को उनके घरों पर मालिकाना हक साबित करने में मदद करते हैं, जो धरातलीय विवादों को भी कम कर सकते हैं।