IDA के स्नेहधाम से बुजुर्गों को हटाने का नोटिस, सीएम मोहन यादव ने किया था शुरू

Sanjay Gupta | Feb 06, 2026, 13:29 IST
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इंदौर में स्नेहधाम भवन में रहने वाले बुजुर्गों को अब भवन खाली करने का नोटिस मिला है। हैरानी की बात यह है कि इस भवन का उद्घाटन खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था। ऐसे में बुजुर्गों का कहना है कि अब हम कहां जाएंगे?

News In Short

  • इंदौर के स्नेहधाम भवन में रहने वाले बुजुर्गों को अब भवन खाली करने का नोटिस मिला है।
  • कंपनी के डायरेक्टर का कहना है कि उनका खर्चा बहुत बढ़ गया है।
  • बुजुर्गों से 35 हजार रुपए किराया लिया जाता है।
  • 18 करोड़ की लागत से बना स्नेहधाम भवन अब किसी और काम में इस्तेमाल किया जाएगा।
  • कंपनी अधिकारियों का कहना है कि वे बुजुर्गों को शिफ्ट करने की योजना बना रहे हैं।

News In Detail

INDORE. इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा बुजुर्गों के लिए शुरू किया गया स्नेहधाम भवन अब बुजुर्गों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। भवन को संभालने वाली कंपनी ने यहां रहने वाले बुजुर्गों को 28 फरवरी तक स्नेहधाम खाली करने का नोटिस दे दिया है।



ध्यान देने वाली बात यह है कि इस भवन का उद्घाटन खुद सीएम डॉ. मोहन यादव ने 25 जून 2025 को किया था। इसे बुजुर्गों के लिए एक बड़ा कदम माना गया था।



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बुजुर्गों से लिए दो लाख डिपॉजिट, 35 हजार किराया

यहां रहने वाली एक बुजुर्ग महिला ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की है। इसमें कहा गया है कि स्कीम 134 में बने आईडीए के ओल्ड एज होम को बालाजी कंपनी के डायरेक्टर विवेक तिवारी और नीरज गुर्जर संभालते हैं।



यहां रहने के लिए दो लाख रुपए डिपॉजिट लिए गए थे। साथ ही 35 हजार रुपए किराया लिया जाता है।



उन्होंने कहा कि हम महिलाएं 70 से 90 साल की हैं और कई दिव्यांग भी हैं। कंपनी ने हमें एक महीने में स्नेहधाम खाली करने का नोटिस दिया है। अब हम कहां जाएं? वे कह रहे हैं कि इस संस्थान का उपयोग अब किसी और काम के लिए किया जाएगा। कृपया हमारी मदद कीजिए।



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कंपनी बंद करने का यह दे रही तर्क

ऐसे में उनकी व्यवस्थाएं करना हमारे लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है। हम अपना टेंडर IDA को सरेंडर करना चाहते हैं। हमने बुजुर्गों को अन्य जगह शिफ्ट करने का भरोसा दिया है। साथ ही कुछ अन्य कंपनियों से बात कर रहे हैं ताकि वह इसे संभाल सके।



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18 करोड़ की लागत से बना है भवन

स्कीम 134 में 20 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर आईडीए ने यह 6 मंजिला भवन बनाया है। इसमें 22 फ्लैट्स दो बेडरूम वाले हैं और 10 फ्लैट्स एक बेडरूम वाले हैं।



यहां बुजुर्गों को सभी जरूरी सुविधाएं जैसे भोजन, टीवी, स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली, लॉन्ड्री आदि मिलती हैं। इसके लिए किराया 35 हजार रुपए है। आईडीए ने इसे 18 करोड़ की लागत से बनाया था।



वहीं, कंपनी का कहना है कि बच्चों को सोशल स्टेटस की चिंता होती है। जब वे अपने बुजुर्गों को यहां छोड़ते हैं, तो समाज में उन्हें अच्छा नहीं माना जाता। हमारे पास 20-25 बुजुर्ग आने वाले थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपना फैसला बदल लिया।



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आईडीए बुजुर्गों की करेगा मदद, नहीं खाली करेंगे

इस मामले में आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़ेने द सूत्र से कहा कि यह मामला संज्ञान में आया है। इसमें आईडीए किसी बुजुर्ग को परेशान नहीं होने देगा।



किसी एनजीओ के जरिए या फिर अन्य कंपनी से करार करके स्नेहधाम का संचालन होगा। वहां रहने वाले बुजुर्गों का हर तरह से ख्याल रखा जाएगा।



कंपनी ने आईडीए से करार ही नहीं किया

वहीं चौंकाने वाली बात ये है कि आईडीए ने स्नेहधाम के संचालन के लिए कंपनी बालाजी से जल्दबाजी में मौखिक करार ही किया। कंपनी से लिखित करार की बात चलती रही और कंपनी भी हां कहती रही, लेकिन औपचारिक करार और बैंक गारंटी जमा नहीं की गई।



आईडीए तीन महीने से कंपनी को समय दे रही थी, लेकिन जब करार नहीं हुआ, तो कंपनी को आखिरी चेतावनी दी गई। इसके बाद, कंपनी ने आर्थिक लाभ न होते देख बुजुर्गों को ही नोटिस थमा दिया।



इस मामले में कंपनी ने बुजुर्गों से पैसे तो ले लिए, लेकिन आईडीए को बैंक गारंटी नहीं दी। इस तरह कंपनी ने दोतरफा गड़बड़ी की।



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