शिवराज के तीखे तेवर पर सीएम मोहन यादव ने मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट, बोले- दूध का दूध और पानी का पानी होगा
क्या कहा था शिवराज सिंह चौहान ने ?
दरअसल बुदनी क्षेत्र के कोसमी गांव में 12 घरों पर वन विकास निगम की कार्रवाई हुई थी। इस मामले को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बयान सामने आया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट भी मांगी है।
क्या है पूरा मामला?
सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विकास निगम ने कार्रवाई की है। यहां कई आदिवासी परिवार लंबे समय से रह रहे हैं। इन परिवारों के मकान गिराए जाने का मामला सामने आया है। कार्रवाई से बरेला आदिवासी समुदाय के लोग प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके खेतों की फसलें भी उजाड़ी गईं। कई परिवारों के सामने रहने की परेशानी खड़ी हो गई है।
यह गांव बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता है। शिवराज सिंह चौहान पहले इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। वर्तमान में वे विदिशा से सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री हैं। घटना की जानकारी मिलने पर वे गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी परेशानी सुनी।
मोहन यादव ने रिपोर्ट की तलब
मोहन यादव (Mohan Yadav) से इस बारे में सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि मामला उनकी जानकारी में आया है। उसके बाद उन्होंने जांच कराने की बात कही। मुख्यमंत्री ने सीएस (CS) से रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने अधिकारियों से भी रिपोर्ट मांगी है। मुख्यमंत्री ने जांच कराने की बात दोहराई।
दूध का दूध, पानी का पानी: मोहन यादव
यहां वरिष्ठ नेता का संदर्भ शिवराज सिंह चौहान की तरफ है। इस कहावत का मतलब है, सच और झूठ अलग हो जाएगा।
वन भूमि अतिक्रमण पर विभाग का पक्ष
दरअसल विभाग इसे वन भूमि अतिक्रमण का मामला मानता है। अतिक्रमण यानी सरकारी जमीन पर बिना इजाजत कब्जा। विभाग का कहना है कि उसकी जमीन पर कब्जा हुआ है। उसके मुताबिक नोटिस देने के बाद ही कार्रवाई की गई।
इस मामले में तीन बातें अहम हैं। पहली, जमीन वन विभाग की बताई जा रही है। दूसरी, परिवार बारेला आदिवासी समुदाय के हैं। तीसरी, कार्रवाई नोटिस के बाद हुई। इस सीहोर अतिक्रमण (Sehore encroachment) विवाद में दूसरा पक्ष भी है। वह पक्ष शिवराज सिंह चौहान का है।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
शिवराज का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों से पहले बात की थी। उनके मुताबिक उन्होंने कार्रवाई न करने की बात भी कही थी। इसके बावजूद घर टूटे। उन्होंने मांग की कि दोषी अधिकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाए। अब सवाल यह है कि रिपोर्ट में क्या निकलेगा?
शिवराज-मोहन पर क्या बोला विपक्ष?
विपक्ष ने इसे दोनों नेताओं के बीच विवाद के रूप में पेश किया है। पहले से अटकलें थीं कि शिवराज और मोहन यादव में नहीं बन रही है। अब MP politics में ये अटकलें तेज हैं। विपक्ष को इस मामले में मौका मिल गया है।