कौन राजा पटेरिया?’... कलेक्टर का पलटवार, शिकायत पर सियासी शोर या प्रोटोकॉल उल्लंघन?
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- अनंत अंबानी के खजुराहो दौरे से प्रोटोकॉल विवाद शुरू हुआ।
- राजा पटेरिया ने राज्यपाल और मुख्य सचिव से शिकायत की।
- कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने आरोपों से इनकार किया।
- शिकायत पर अभी आधिकारिक जांच या कार्रवाई घोषित नहीं हुई।
- दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।
छतरपुर कलेक्टर आईएएस पार्थ जायसवाल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री राजा पटेरिया आमने-सामने हैं। विवाद उद्योगपति अनंत अंबानी के खजुराहो दौरे से जुड़ा है।
राजा पटेरिया ने आरोप लगाया है कि निजी यात्रा पर आए अनंत अंबानी को सरकारी प्रोटोकॉल दिया गया, जबकि कलेक्टर ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा कलेक्टर के उस जवाब की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा- "कौन राजा पटेरिया? मैं तो उन्हें जानता ही नहीं हूं।"
इसके बाद मामला केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सियासी रणनीति और शिकायत की गंभीरता पर भी सवाल उठने लगे।
कांग्रेस नेता राजा पटेरिया ने राज्यपाल और मुख्य सचिव से शिकायत की।
- आरोप है कि निजी दौरे पर आए अनंत अंबानी को सरकारी प्रोटोकॉल दिया गया।
- कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने आरोपों से साफ इनकार किया।
- कलेक्टर बोले- "मैं किसी के स्वागत के लिए नहीं गया था।"
- शिकायत की प्रति मांगने पर राजा पटेरिया ने उपलब्ध नहीं कराई।
- अब सवाल है कि शिकायत पर कार्रवाई होगी या मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा।
कलेक्टर का जवाब बना चर्चा का केंद्र
जब छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल से शिकायत के बारे में पूछा गया तो उनका पहला जवाब था- "कौन राजा पटेरिया? मैं तो उन्हें जानता ही नहीं हूं।" बाद में जब उन्हें बताया गया कि शिकायत अनंत अंबानी के कथित स्वागत को लेकर की गई है, तब उन्होंने कहा- "ऐसा कुछ नहीं है।
मैं वहां किसी के स्वागत के लिए नहीं गया था। मीटिंग के सिलसिले में गया था। अगर आपके पास कोई फोटो हो तो जरूर बताइए।"
यानी कलेक्टर ने साफ कहा कि उन्होंने किसी तरह का विशेष स्वागत या सरकारी प्रोटोकॉल नहीं दिया।
राजा पटेरिया ने क्या कहा?
पूर्व मंत्री राजा पटेरिया का कहना है कि उन्होंने नियमों के उल्लंघन की शिकायत की है। उनका कहना था- "मैंने शिकायत की है। प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है।
कलेक्टर आगवानी कर रहा है, इससे बड़ी बात और क्या होगी?" हालांकि, जब उनसे शिकायत के तथ्यों के बारे में विस्तार से पूछा गया तो उन्होंने कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी और बातचीत समाप्त कर दी।
यह विवाद अब केवल कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन का नहीं रह गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि क्या यह शिकायत किसी ठोस कार्रवाई तक पहुंचेगी या फिर केवल राजनीतिक संदेश देने की कोशिश साबित होगी।
क्योंकि फिलहाल शिकायत पर किसी आधिकारिक जांच या कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि आरोप सही हैं या गलत।
सबसे बड़ा सवाल क्या है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजा पटेरिया की शिकायत पर राज्य सरकार, मुख्य सचिव या राजभवन स्तर पर कोई कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी कई अन्य राजनीतिक शिकायतों की तरह फाइलों तक सीमित रह जाएगा?
इसका जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेगा
फिलहाल इस मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। एक तरफ कांग्रेस नेता प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कलेक्टर हर आरोप को निराधार बता रहे हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी सक्षम प्राधिकरण ने इस मामले में जांच या कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा की है।
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