कांग्रेस का 'जवाब दो अभियान': CM मोहन यादव और सरकार की डिजिटल घेराबंदी की तैयारी
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ अपनी राजनीतिक लड़ाई को नए चरण में ले जाने का ऐलान किया है। पार्टी अब केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी। एक विशेष डिजिटल पोर्टल लॉन्च कर जनता से मुख्यमंत्री, मंत्रियों और उनके परिवार की कथित संपत्तियों एवं भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी जुटाएगी। इसी के साथ उज्जैन भूमि प्रकरण, किसानों की समस्याएं और युवाओं के मुद्दों पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की भी रणनीति बनाई गई है।
ऐसे समझें मामले को
- मुख्यमंत्री से उज्जैन भूमि प्रकरण पर सार्वजनिक जवाब की मांग।
- कांग्रेस लॉन्च करेगी शिकायतों के लिए विशेष डिजिटल पोर्टल।
- जानकारी देने वालों की पहचान गोपनीय रखने का दावा।
- 15 जुलाई को भोपाल में मुख्यमंत्री आवास घेरने की घोषणा।
- जुलाई के अंत में उज्जैन में बड़ा विरोध प्रदर्शन।
- विधानसभा से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की तैयारी।
- अंदरूनी विवाद के बीच दिग्विजय सिंह ने एकजुटता का संदेश दिया।
कांग्रेस ने बदली रणनीति, अब जनता से जुटाएगी जानकारी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी जल्द एक विशेष पोर्टल शुरू करेगी। इसके माध्यम से आम लोग मुख्यमंत्री, मंत्रियों और उनके परिवार की कथित संपत्तियों एवं भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी गोपनीय तरीके से भेज सकेंगे। कांग्रेस का दावा है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी और तथ्यों की जांच के बाद ही उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा।
मुख्यमंत्री से मांगा सार्वजनिक जवाब
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से उज्जैन भूमि प्रकरण सहित विभिन्न आरोपों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी है और यदि आरोपों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता तो मुख्यमंत्री को पद छोड़ने पर विचार करना चाहिए।
PAC बैठक में तय हुआ आंदोलन का रोडमैप
कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) की बैठक में तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई।
- उज्जैन भूमि प्रकरण।
- किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने की समस्या।
- युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दे।
इन सभी विषयों पर चरणबद्ध प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाने का फैसला लिया गया।
सड़क से विधानसभा तक सरकार को घेरने की तैयारी
कांग्रेस ने तय किया है कि विधानसभा सत्र में भी मुख्यमंत्री से जवाब मांगा जाएगा। मुख्यमंत्री जहां-जहां दौरे पर जाएंगे, वहां कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सार्वजनिक रूप से सवाल पूछेंगे। नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी करेगा।
15 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास का घेराव
कांग्रेस ने घोषणा की है कि 15 जुलाई को भोपाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। वहीं जुलाई के अंतिम सप्ताह में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उज्जैन पहुंचकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे।
दिग्विजय सिंह बोले- कांग्रेस में कोई मतभेद नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और मुख्यमंत्री से जुड़े भूमि प्रकरण को तार्किक एवं लोकतांत्रिक तरीके से अंत तक उठाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके और जीतू पटवारी के बीच मतभेद की खबरें भ्रामक हैं।
'दलाल' विवाद पर भी दी सफाई
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस के किसी नेता के लिए 'दलाल' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। उनका कहना था कि यह शब्द एक पत्रकार के संदर्भ में आया था, इसलिए इसे गलत तरीके से प्रचारित किया गया।
बैठक में उठी अंदरूनी नाराजगी
PAC की वर्चुअल बैठक में कुछ नेताओं ने जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह के अलग-अलग बयानों पर चिंता जताई। नेताओं का कहना था कि यदि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बयान अलग-अलग होंगे तो जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनेगी और कार्यकर्ताओं को जवाब देना मुश्किल होगा।
प्रभारी हरीश चौधरी ने कराया हस्तक्षेप
बैठक के दौरान बढ़ते विवाद के बीच प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी कांग्रेस आलाकमान को भेज दी गई है। अब आगे जो भी निर्णय होगा, वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) लेगी।
चार बड़े मुद्दों पर कांग्रेस का चरणबद्ध आंदोलन
कांग्रेस ने आने वाले दिनों में इन चार विषयों पर प्रदेशभर में अभियान चलाने का फैसला किया है।
- उज्जैन भूमि प्रकरण।
- NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे।
- CBSE परीक्षा में कथित गड़बड़ियां।
- किसानों को खाद वितरण में कथित अव्यवस्था।
राजनीतिक मायने
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यह है कि कांग्रेस अब केवल आरोप लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी डिजिटल पोर्टल, जनभागीदारी और चरणबद्ध आंदोलनों के जरिए सरकार पर लगातार दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
हालांकि पार्टी के भीतर उठे मतभेद के सवाल भी उसके सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। यदि कांग्रेस इन विरोधाभासों को दूर कर पाती है, तभी उसका आंदोलन राजनीतिक रूप से अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
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