कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, कपिल सिब्बल की दलीलें नाकाम

Anjali Dwivedi | Apr 18, 2026, 14:54 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने सेमरिया विधायक अभय मिश्रा की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। भाजपा उम्मीदवार ने नौ आपराधिक केस छिपाने के आरोप में उनकी जीत को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

News In Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने विधायक अभय मिश्रा की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।
  • भाजपा नेता कृष्ण पति त्रिपाठी ने नौ आपराधिक मामले छिपाने का आरोप लगाया है।
  • नवंबर 2023 के चुनाव में मिश्रा मात्र 637 वोटों से जीते थे।
  • कोर्ट ने मिश्रा को हाईकोर्ट में ही चुनाव याचिका का विरोध करने की छूट दी है।
  • विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा था।

News In Detail

मध्य प्रदेश के रीवा जिले की सेमरिया सीट से कांग्रेस विधायक अभय कुमार मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी निराशा हाथ लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपनी जीत को चुनौती देने वाली इलेक्शन पिटीशन रद्द करने की मांग की थी। इस फैसले के बाद अब विधायक को हाईकोर्ट में ही अपनी लड़ाई लड़नी होगी।



सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। विधायक मिश्रा की ओर से दिग्गज वकील कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे थे। सुनवाई के दौरान बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि, याचिकाकर्ता मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका का विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं?



अदालत ने साफ कहा कि कानून में उपलब्ध ऑप्शन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जब बेंच ने मामले में रुचि नहीं दिखाई, तो सिब्बल ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।



क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला साल 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। रीवा जिले के सेमरिया सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा था। कांग्रेस के अभय कुमार मिश्रा को 56 हजार 24 वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और भाजपा उम्मीदवार कृष्ण पति त्रिपाठी को 55 हजार 387 वोट मिले थे। महज 637 वोटों से चुनाव हारने के बाद केपी त्रिपाठी ने जबलपुर हाईकोर्ट में मिश्रा की जीत को चुनौती दी थी।



आपराधिक मामलों को छिपाने का आरोप

भाजपा नेता केपी त्रिपाठी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि अभय मिश्रा ने चुनाव के दौरान अपने खिलाफ दर्ज नौ आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया। दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।



उनका तर्क है कि उनके खिलाफ न तो कोई मामला लंबित है और न ही उन्हें किसी केस में दोषी ठहराया गया है। मिश्रा ने हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी जीत के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करने से मना कर दिया गया था।



जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और कानूनी पेच

इस कानूनी लड़ाई में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-33Aका भी जिक्र आया है। विधायक पक्ष का कहना है कि उन मामलों का खुलासा करने की जरूरत नहीं होती जिनमें कोर्ट ने उम्मीदवार को बरी कर दिया हो या आरोप तय न हुए हों।



हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद यह तय हो गया है कि अभय मिश्रा को जबलपुर हाईकोर्ट की बेंच के सामने ही इन आरोपों का जवाब देना होगा।



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