कांग्रेस का विचारक मॉडल कितना टिकेगा, संगठन के संकट पर बड़ा सवाल
ऐसे समझें मामला
- कांग्रेस सेवादल अब बूथ तक विचारक पहुंचाएगा।
- भोपाल बैठक में नई रणनीति पर मंथन होगा।
- प्रवक्ता नियुक्तियां अब तक पूरी नहीं हुईं।
- राजगढ़ मामले में ब्लॉक अध्यक्ष हटाए गए।
- कार्यक्रमों की खींचतान भी संगठन की चुनौती है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस में अब सिर्फ भाषण और चुनावी अभियान से आगे बढ़कर वैचारिक मोर्चा मजबूत करने की तैयारी है। कांग्रेस सेवादल भाजपा और आरएसएस की जमीनी वैचारिक पहुंच का मुकाबला करने के लिए प्रदेशभर में ‘विचारक टीम’ तैयार करने जा रहा है। टीम ब्लॉक, बूथ और गांवों तक जाएगी और स्थानीय मुद्दों पर लोगों से सीधा संवाद करेगी। लेकिन इसी समय कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक खींचतान, नियुक्तियों में देरी और अनुशासन से जुड़े विवाद नई रणनीति पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।
कांग्रेस की नई चाल, लेकिन घर के सवाल कायम
कांग्रेस सेवादल की प्रस्तावित रणनीति कागज पर दिलचस्प है। संगठन ऐसे कार्यकर्ताओं को तैयार करना चाहता है, जो सिर्फ चुनाव के दौरान सक्रिय न हों, बल्कि पूरे साल लोगों के बीच मौजूद रहें।
इन कार्यकर्ताओं को वैचारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही बेरोजगारी, महंगाई, किसान और आम जनता से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर संवाद करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।
यानी कांग्रेस अब सोशल मीडिया की बहस से आगे निकलकर गांव-कस्बों में सीधा वैचारिक मुकाबला खड़ा करना चाहती है।
भाजपा-आरएसएस के मॉडल का जवाब तलाशेगी कांग्रेस
कांग्रेस सेवादल का मानना है कि भाजपा और आरएसएस की ताकत सिर्फ चुनावी मशीनरी नहीं, बल्कि लगातार चलने वाला जमीनी संपर्क और वैचारिक संवाद भी है।
इसी मॉडल के जवाब में सेवादल ‘विचारकों’ की टीम तैयार करने की तैयारी में है। भोपाल में होने वाली बैठक में प्रदेशभर के जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे।
बैठक में संगठन विस्तार, प्रशिक्षण शिविर और आगामी अभियानों की रूपरेखा तय की जा सकती है।
लेकिन कांग्रेस के भीतर ही कई मोर्चे खुले
नई वैचारिक रणनीति के बीच कांग्रेस के अपने संगठनात्मक सवाल भी कम नहीं हैं। प्रदेश संगठन के पुनर्गठन और नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से चर्चा चलती रही है, जबकि प्रवक्ताओं की नियुक्तियां अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं।
दूसरी तरफ पार्टी के कार्यक्रमों में भी कई बार कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच खींचतान की स्थिति सामने आने की बात कही जाती रही है। ऐसे माहौल में सवाल सीधा है-क्या कांग्रेस पहले अपने संगठन को एकजुट कर पाएगी और फिर बूथ स्तर पर वैचारिक लड़ाई लड़ पाएगी?
राजगढ़ कार्रवाई ने अनुशासन पर सवाल बढ़ाए
इसी बीच राजगढ़ के ब्यावरा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल दांगी पर पार्टी ने कार्रवाई की है। गुना जिले के चाचौड़ा में पुलिस कार्रवाई के बाद सामने आए घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने उन्हें ब्लॉक अध्यक्ष पद से हटाने के साथ प्राथमिक सदस्यता से भी निष्कासित कर दिया।
प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले ने आदेश में कहा कि पार्टी के संज्ञान में राहुल दांगी के अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने की बात आई और ऐसी मानसिकता का पार्टी में कोई स्थान नहीं है। कार्रवाई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर की गई।
संजय कामले का पक्ष: पार्टी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संगठनात्मक कार्रवाई की है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि ऐसे आचरण को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अवनीश भार्गव का कहना
कांग्रेस सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष अवनीश भार्गव के मुताबिक संगठन अब वैचारिक संवाद को जमीनी स्तर तक ले जाने पर काम कर रहा है। उनका कहना है कि प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की टीम लोगों के बीच जाकर सामाजिक और जनसरोकार के मुद्दों पर संवाद करेगी।
उनके मुताबिक सेवादल का लक्ष्य केवल राजनीतिक भाषण करना नहीं, बल्कि लगातार लोगों के संपर्क में रहकर कांग्रेस की विचारधारा और जनहित के मुद्दों को सामने रखना है।
असली परीक्षा सम्मेलन के बाद होगी
कांग्रेस सेवादल की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन भाजपा-आरएसएस के मुकाबले अपनी अलग जमीनी वैचारिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन इसकी सफलता सिर्फ भोपाल की बैठक या प्रशिक्षण शिविरों से तय नहीं होगी। असली परीक्षा तब होगी, जब ये ‘विचारक’ गांव, बूथ और ब्लॉक स्तर पर लगातार दिखाई देंगे।
एक तरफ कांग्रेस वैचारिक मुकाबले का नया मॉडल तैयार कर रही है, दूसरी तरफ संगठन के भीतर नियुक्तियों, अनुशासन और आपसी तालमेल के सवाल बने हुए हैं। यही विरोधाभास आने वाले समय में सेवादल की नई रणनीति की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है।
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