कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में दिग्विजय सिंह पर क्यों भड़कीं सोनिया गांधी? जानें वजह...
कांग्रेस कार्यसमिति (Congress Working Committee) की बैठक में पुरानी बात फिर उठी। मुद्दा नीतीश कुमार के इंडिया गठबंधन छोड़ने का था। इंडिया गठबंधन यानी विपक्षी दलों का साझा मंच (Indian National Developmental Inclusive Alliance)। इसी पर सोनिया गांधी और दिग्विजय सिंह के बीच तीखी बहस हो गई। सूत्रों के मुताबिक बैठक मंगलवार, 29 सितंबर को हुई थी।
कुछ रिपोर्ट में इसे सोनिया गांधी का सख्त जवाब बताया गया है। बात छोटी थी, लेकिन कांग्रेस के भीतर चल रही सोच को दिखाती है।
बैठक में क्या चर्चा थी?
बैठक ऐसे समय हुई, जब कांग्रेस चुनाव आयोग पर हमलावर है। चर्चा का बड़ा हिस्सा भाजपा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर केंद्रित था। पार्टी एसआईआर (Special Intensive Revision) को लेकर भी रणनीति पर बात कर रही थी। एसआईआर यानी मतदाता सूची की गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया। बैठक इंडिया गठबंधन के दलों की साझा बैठक से पहले हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा मौजूद थे।
दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?
इसी चर्चा के बीच नीतीश कुमार का जिक्र आया। सूत्रों के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन को 2024 में नीतीश को जाने नहीं देना चाहिए था। उनका तर्क था कि नीतीश साथ रहते, तो हालात अलग हो सकते थे। यानी गठबंधन शायद ज्यादा मजबूत होता। यह राय कार्यसमिति के कई नेताओं के सामने रखी गई।
सोनिया गांधी का जवाब क्या था?
सोनिया गांधी दिग्विजय सिंह के राय से सहमत नहीं थीं। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने साफ कहा कि नीतीश पहले ही मन बना चुके थे। वे गठबंधन से बाहर निकलने का मौका तलाश रहे थे।
मीडिया रिपोर्ट में सोनिया का बयान बताया गया है। उन्होंने कहा कि भगवान का शुक्र है कि नीतीश समय पर गए। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा वहीं जाने वाले थे। यानी सोनिया ने नीतीश के जाने को नुकसान नहीं माना।
खड़गे ने भी दिया साथ
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सोनिया गांधी की बात का समर्थन किया। एक रिपोर्ट में खड़गे के हवाले से कहा गया कि नीतीश पहले अपनी बात रख चुके थे। वे बिहार की राजनीति में सक्रिय रहने की इच्छा जता चुके थे। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन के समर्थन की बात भी करते थे।
नीतीश का मुद्दा क्यों अहम?
यह मुद्दा फिर क्यों गरमाया, इसे समझने के लिए पीछे चलना होगा। 2024 की शुरुआत में इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई थी। उसमें खड़गे को गठबंधन का अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनी थी। नीतीश कुमार को संयोजक बनाने का प्रस्ताव भी आया था।
वहीं, नीतीश ने तब इस पर हामी नहीं भरी थी। जदयू (Janata Dal United) के नेता संजय कुमार झा ने कहा था कि अभी मंजूरी नहीं दी गई है। बाद में 2024 में नीतीश गठबंधन से अलग हो गए। तब से यह सवाल विपक्ष में उठता रहा है कि क्या उन्हें रोका जा सकता था।
बैलेट पेपर पर भी उठी बात
दिग्विजय सिंह ने बैठक में एक और मांग उठाई। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने चुनावों में बैलेट पेपर वापस लाने की वकालत की। कांग्रेस अभी चुनाव आयोग और एसआईआर पर सवाल उठा रही है। ऐसे में यह मांग भी उसी बड़ी बहस का हिस्सा मानी जा रही है।
आगे क्या होगा?
अब नजर इंडिया गठबंधन की बैठक पर है। वहां एसआईआर, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग की भूमिका पर साझा रणनीति बननी है। कांग्रेस के भीतर की यह बहस बाहर आने से राजनीतिक चर्चा भी तेज हुई है।
यह पूरी जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। बैठक बंद कमरे में हुई थी। इसलिए अलग-अलग रिपोर्ट में शब्द थोड़े अलग हो सकते हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में सोनिया गांधी, दिग्विजय सिंह या खड़गे का सीधा बयान नहीं है। कांग्रेस की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दिखी है। कोई अधिकृत बयान आने पर तस्वीर और साफ होगी।