सहकारी बैंकों में घोटाला: प्रशासकों को गुमराह कर करोड़ों डकार गए बैंककर्मी

Sanjay Sharma | Apr 10, 2026, 22:44 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्यप्रदेश में सहकारी बैंकों में घपलों का खुलासा। किसानों के लिए सरकारी योजनाओं में लाखों की हेराफेरी हो रही है। जानिए क्या है पूरा मामला और कैसे हो रही कार्रवाई।

News in Short

  • सहकारी बैंकों में हजारों करोड़ का घोटाला।
  • गबन में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं।
  • किसानों के पैसे का घोटाला, सरकार की योजनाओं में सेंध।
  • वेतन घोटाले और गैरकानूनी लोन।
  • सहकारी बैंक में अफसरशाही के चलते भ्रष्टाचार बढ़ा।

News in Detail

मध्य प्रदेश में सहकारी बैंक बेलगाम हो चुकी है। किसानों के लिए सरकार की योजनाएं, समितियों के जरिए राशन वितरण से लेकर लोन बांटने में भी भ्रष्टाचार चरम पर है।



सहकारिता विभाग द्वारा 13 साल से चुनाव न कराने से अब सहकारी समितियों से लेकर बैंकों तक प्रशासक काबिज हैं। जनप्रतिनिधियों का दखल न होने से अफसर, बैंककर्मी और सहकारिता के कर्मचारी भी निरंकुश हो गए हैं।



बीते एक दशक में प्रदेश के दर्जन भर सहकारी बैंकों में गबन, घोटालों की बाढ़ सी आ गई है। कहीं किसानों की कर्ज माफी, कहीं बैंक लोन और कहीं सरकारी योजनाओं के करोड़ों रुपए में सेंधमारी हुई है।



सहकारी बैंकों के जरिए पिछले एक दशक में हजारों करोड़ की हेराफेरी की गई है। अफसरशाही का रवैया इन घोटालों की जांच पर बेपरवाही भरा है। जिससे सहकारी क्षेत्र के घपलेबाज करोड़ों डकारने के बाद भी मजे में हैं। सहकारी बैंक और समितियों में घोटाले सामने आने के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।



एफआईआर तक सिमटी कार्रवाई

सहकारिता विभाग करोड़ों के गबन जैसे मामलों पर जांच कराता है और कार्रवाई एफआईआर तक सिमट कर रह जाती है। लोगों के करोड़ों रुपए डूब जाते हैं लेकिन उनकी वसूली को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। इससे सहकारी बैंकों का वित्तीय ढांचा चरमरा चुका है।



प्रशासकों की व्यवस्तता का फायदा

सहकारिता विभाग में बीते 13 साल से चुनाव नहीं हुए हैं। इस वजह से सहकारी बैंकों का प्रबंधन प्रशासक के रूप में अधिकारियों के हाथ में हैं। एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार जैसे अधिकारी प्रशासनिक व्यस्तता के चलते बैंक प्रबंधन पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।



इस स्थिति का फायदा उठाकर बैंककर्मी मनमानी पर उतारू हैं। यही वजह है कि एक के बाद एक मामले सामने आने, केस दर्ज होने के बावजूद करोड़ों की हेराफेरी नहीं रुक रही है।



वेतन बढ़ाकर लगाया 400 करोड़ का चूना

डेढ़ दशक में जिला सहकारी बैंकों में 400 करोड़ के वेतन घोटाले को अंजाम दिया गया है। सहाकारिता विभाग की अनुमति के बिना ही अधिकारियों की मिलीभगत से बैंककर्मियों का वेतन बढ़ाया गया।



सातवें वेतनमान के लिए 1 जनवरी 2011 में आदेश जारी किया था लेकिन यह वेतन 2006 से ही देना शुरू कर दिया गया। हर एक सहकारी बैंककर्मी ने निर्धारित वेतन से सालाना 3 लाख रुपए ज्यादा लिए।



400 कर्मचारियों को ज्यादा वेतन देने से 5 साल में 400 करोड़ से ज्यादा का नुकसान पहुंचा। सहकारिता विभाग द्वारा इस घाटे की भरपाई के लिए बैंकों के संचालक मंडल और प्रबंधकों को नोटिस जारी किए गए, लेकिन कार्रवाई यही अटककर रह गई है। सहकारिता विभाग ने अब तक वसूली को लेकर क्या कार्रवाई की और नोटिस के जवाब में क्या आया अब तक यह भी उजागर नहीं हुआ है।



बैंक के गबन का दंश झेल रहे लोग

शिवपुरी जिला सहकारी बैंक में अधिकारी- कर्मचारियों ने गबन के जरिए 100 करोड़ से ज्यादा डकार लिए। ये करोड़ों रुपए बैंक में फिक्स डिपॉजिट के रूप में जमा किए गए थे।



लोगों की मेहनत की कमाई को बैंककर्मी चार साल तक हड़पते रहे और अधिकारी इस पर पर्दा डालते रहे। बैंक में करोड़ों का गबन तब सामने आया जब कुछ लोगों ने फिक्स डिपॉजिट की राशि वापस मांगी।



कुछ दिन तक बैंककर्मी टालते रहे बाद में पता कि एफडी अकाउंट में रुपया ही नहीं है। बैंक के अधिकारियों ने एक भृत्य को कैशियर का चार्ज थमाकर इस घोटाले को अंजाम दिया है। जिसकी एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। अब बैंक अधिकारी कानूनी कार्रवाई के नाम पर सैंकड़ों लोगों की लाखों रुपए की एफडी वापस लौटाने में हीलाहवाला कर रहे हैं।



बैंक अफसरों की कारगुजारी से डूबे करोड़ों

जिला सहकारी बैंकों के वित्तीय प्रबंधन पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। रसूखदार, नेताओं को बड़े- बड़े कर्ज बांटने के बाद अधिकारी वसूली को अनदेखा करते रहे हैं। इससे बैंकों के करोड़ों रुपए डूबने की स्थिति में पहुंच गए हैं।



जिला सहकारी बैंक सहकारिता विभाग की अनुमति के बिना 118 करोड़ रुपए निजी क्षेत्र के बैंक में निवेश करने का घोटाला कर चुके हैं। इससे जहां अफसरों को तगड़ा कमीशन मिला वहीं बैंक की राशि पांच साल के लिए उलझकर रह गई।



रायसेन जिला सहकारी बैंक का 148 करोड़ रुपए, राजगढ़ सहकारी बैंक के 183 करोड़, होशंगाबाद जिला सहकारी बैंक के 292 करोड़ रुपए का ऋण वसूला नहीं जा सका है।



इस वजह से इन बैंकों की माली हालत खस्ता हो चुकी है लेकिन बैंककर्मियों को वसूली की परवाह ही नहीं है। इसके पीछे ऋण बांटने में भारी कमीशन वसूली को वजह बताया जा रहा है।



केसीसी खातों में ट्रांसफर कर उड़ाए 6 करोड़

नवगठित मऊगंज जिले की पांच सहकारी समितियों में 6 करोड़ से ज्यादा का घपला जनवरी 2026 में सामने आया है। इन समितियों ने आम खातेदारों के करोड़ों रुपए किसान क्रेडिट कार्ड अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए। इससे लोगों का रुपया इन खातों में उलझकर रह गया है। अब जबकि लोग अपना रुपया निकालने पहुंच रहे हैं तो उन्हें खाली हाथ लौटाया जा रहा है।



हरदी, गौरी, देवरापटेरा तातिहारा और हटवा समिति के तीन हजार से ज्यादा लोग भटक रहे हैं।घोटाला बीते तीन साल में हुआ है तब मऊगंज रीवा जिले का हिस्सा था।



समितियों के एफडी खातों से 6 करोड़ रुपए गायब हैं। हरदी समिति से 4.29 करोड़, देवरा पटेरा समिति से 37.41 लाख, हटवा समिति से 14.38 लाख की हेराफेरी हुई है। कलेक्टर संजय जैन का कहना है शिकायत की जांच में गबन की पुष्टि होने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।



खाद वितरण की आड़े में 1.30 करोड़ डकारे

सहकारी बैंकों के गड़बड़झाले में ग्वालियर भी पीछे नहीं है। मार्च 2026 में जिले की तीन समितियों द्वारा 1.30 करोड़ की हेराफेरी सामने आई है। घोटाला उजागर होने पर सहकारी बैंक की तीनों समितियों के प्रबंधकों पर केस दर्ज कराया गया है।



हालांकि, केस दर्ज होने के बाद भी इन प्रबंधकों से राशि की वसूली अटकी हुई है। इन समितियों ने खाद वितरण की आड़ में घोटाले को अंजाम दिया है।



किसानों को खाद उपलब्ध कराने की योजना में सेंधमारी कर पुट्टी सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक पंकज भार्गव ने 50.37 लाख, अजयगढ़ समिति सहायक प्रबंधक नंदकिशोर शर्मा ने 26.67 लाख और किटोरा समिति के पूर्व सहायक प्रबंधक नाथूराम स्वामी ने 53.11 लाख रुपए का गबन किया है। मामला सामने आने पर ब्रांच मैनेजर भूपेन्द्र भदौरिया द्वारा नोटिस जारी करने की कार्रवाई रस्मअदायगी बन गई और 1.30 करोड़ की वसूली नहीं हो पाई है।



इन बैंकों में भी करोड़ों का गोलमाल...

  • खंडवा जिला सहकारी बैंक की पिपलानी कृषि साख सहकारी समिति ने खातेदारों के 25 करोड़ डकार लिए हैं। नवम्बर 2025 में घोटाला तब सामने आया जब लोगों के खातों में रुपए ही नहीं बचे।

लोगों की शिकायतों पर जिला पंजीयक संजय आर्य द्वारा की गई जांच अब भी अधूरी पड़ी है। भंवरली गांव के किसान रामबक्श गिन्नारे का कहना है उन्हें इंदिरा सागर बांध के डूब प्रभावित होने पर मुआवजे में मिले 15.91 लाख रुपए एफडी के जरिए 2024 में जमा किए थे।



एक साल बाद उन्हें समिति ने 10 लाख का चेक दिया लेकिन यह बाउंस हो गया है। समिति में ऐसे कई लोगों की राशि गायब है। बीते पांच साल में गायब राशि 15 करोड़ से भी ज्यादा है।



  • रतलाम जिले के नगर सहकारी समिति में 200 किसानों को कर्जदार बना दिया गया है। नवम्बर 2025 में नोटिस मिलने के बाद किसानों ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की है।

इन किसानों ने बैंक समिति से ऋण ही नहीं लिया लेकिन उनके नाम पर बैंककर्मियों की मिलीभगत से लाखों रुपए निकाल लिए गए। समिति के 200 किसान कर्ज वसूली के नोटिस के बाद बैंक पहुंचते तक उन्हें ऋण लेने की जानकारी लगी। अब शिकायत के बाद भी जिम्मेदारी तय करने की जगह बैंक से किसानों को नोटिस भेजकर वसूली का दबाव बनाया जा रहा है।



  • खरगोन जिला सहकारी बैंक में 110 करोड़ रुपए के गबन को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। सहकारी बैंक से सनावद के सूत मिल वर्कर्स इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव सोसाइटी को नियम विरुद्ध लोन बांटने, सहकारी समितियों में सॉफ्टवेयर की खरीदी के नाम पर गड़बड़ी की गई।

इस घोटाले में बैंक के प्रबंध संचालक राजेन्द्र आचार्य को भूमिका संदेहास्पद पाए जाने पर बर्खास्त किया गया है। बैंक को 110 करोड़ रुपए का चूना बीते तीन साल में लगाया गया था। बैंक शाखा में करोड़ों रुपए की गड़बड़ी होती रही लेकिन अधिकारी एक- दूसरे को बचाने के लिए इस पर पर्दा डालकर बैठे रहे।



  • छिंदवाड़ा जिला सहकारी बैंक में मार्च 2022 में बैंककर्मियों द्वारा करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा हुआ था। ईओडब्ल्यु की जांच में भी गबन की पुष्टि हो चुकी है। बैंक क्लर्क अभिषेक जैन द्वारा कई बार लाखों रुपए अपने निजी खातों में ट्रांसफर किए गए।

बैंकों में हर महीने खातों की जांच के बाद भी अधिकारियों द्वारा इस वित्तीय अनियमितता को अनदेखा किया गया। विभागीय जांच में भी जैन के अलावा सहायक प्रबंधक अभय कुमार जैन और ऑडिट शाखा प्रभारी नीरज जैन की भूमिका पर सवाल उठे हैं। जांच के बाद बैंक प्रबंधन ने केस तो दर्ज कराया है लेकिन लाखों की वसूली के लिए कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है।



फिलहाल मामले की विवेचना जारी है और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। बैंकिंग तंत्र में इस तरह की घटना ने वित्तीय सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



  • राजगढ़ जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक की तलेन शाखा में बैंककर्मियों ने करोड़ों का घपला किया है। तलेन समिति के कम्प्युटर ऑपरेटर राकेश प्रजापति ने लोगों के बैंक खातों से 3 करोड़ रुपए अपने और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किए हैं।

हेराफेरी में कैशियर नीरज व्यास, शाखा प्रबंधक सत्यनारायण खींची, समिति प्रबंधक सीताराम कुंभकार और क्लर्क सुनील शर्मा की भूमिका सामने आई है। सहकारिता विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक इसकी शिकायत पहुंची है। इसके बावजूद अब तक न तो किसी पर केस दर्ज कराया गया है और वसूली की जा रही है।



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