कोर्ट का बोझ कम करेगा मिडिएशन कोर्स, जस्टिस रूसिया बोले- कोई नहीं चाहता मामला पहुंचे कोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी और धर्मशास्त्र लॉ यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू साइन हुआ।
- धर्मशास्त्र यूनिवर्सिटी में प्रदेश का पहला मान्यता प्राप्त मिडिएशन सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू होगा।
- एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने कहा कि लोग विवाद का समाधान चाहते हैं, लंबा मुकदमा नहीं।
- देश में मिडिएशन करने वाले प्रशिक्षित लोगों की भारी कमी है।
- जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस आनंद पाठक ने यूनिवर्सिटी की उपलब्धि की सराहना की।
लोगों को कोर्ट से पहले समाधान चाहिए
अक्सर जब दो पक्षों के बीच कोई विवाद होता है तो उनकी पहली कोशिश यही रहती है कि मामला आपस में सुलझ जाए। कोई भी व्यक्ति सालों तक कोर्ट के चक्कर नहीं लगाना चाहता।
इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए जबलपुर में एक नई पहल की गई है। मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी और धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू साइन हुआ है। इसके तहत प्रदेश का पहला मान्यता प्राप्त मिडिएशन सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किया जाएगा।
कोर्ट जाना किसी की पहली पसंद नहीं
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने कहा कि उनका मिडिएशन से विशेष जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या लेकर कोर्ट नहीं पहुंचना चाहता।
हर व्यक्ति चाहता है कि उसका विवाद जल्दी खत्म हो और उसे राहत मिले। मिडिएशन ऐसी व्यवस्था है जिसमें दोनों पक्ष बैठकर बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं। इससे समय भी बचता है और रिश्ते भी खराब नहीं होते।
इंदौर का उदाहरण देकर समझाया फायदा
जस्टिस रूसिया ने बताया कि जब वे इंदौर में थे तब जनसुनवाई के दौरान उन्होंने मिडिएशन शुरू करने का सुझाव दिया था। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय में अलग व्यवस्था बनाई गई। पहली ही सुनवाई में आए 25 मामलों में से 11 विवाद बातचीत के जरिए सुलझ गए।
इसी तरह जस्टिस रूसिया ने बताया कि अब तक लगभग 6000 मामलों का निपटारा मध्यस्थता के जारी हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे यह साबित हुआ कि कई मामलों को कोर्ट में जाने से पहले ही आसानी से निपटाया जा सकता है।
10 दिनों में मिली फास्ट ट्रैक मान्यता
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने बताया कि धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार उनसे दस दिन पहले किसी अन्य कार्यक्रम को लेकर मिलने आए थे और उसी दौरान मिडिएशन कोर्स पर चर्चा हुई थी। रुचि दिखने के बाद पूरी कागजी प्रक्रिया तेजी से पूरी की गई और दस दिनों के भीतर एमओयू साइन कर दिया गया।
इसे उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
मिडिएशन करने वाले लोगों की है बड़ी कमी
जस्टिस रूसिया ने कहा कि आज पूरे देश में मिडिएशन की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। लेकिन प्रशिक्षित लोगों की संख्या बहुत कम है। लंबित मामलों को देखते हुए करीब 2 लाख ऐसे लोगों की जरूरत है जो मिडिएशन का काम कर सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कोर्स के शुरू होने से नए प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार होंगे और लोगों को जल्दी समाधान मिलेगा।
10 साल में बड़ी पहचान बनाने पर मिली सराहना
कार्यक्रम में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस आनंद पाठक ने भी धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कई विश्वविद्यालय लंबे समय से कानून की पढ़ाई करा रहे हैं। लेकिन धर्मशास्त्र यूनिवर्सिटी ने केवल 10 वर्षों में ऐसी पहचान बनाई है कि प्रदेश का पहला मान्यता प्राप्त मिडिएशन कोर्स यहां शुरू किया जा रहा है। यह विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि है।
भरोसे पर खरा उतरने का वादा
धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, उसे पूरी ईमानदारी के साथ निभाया जाएगा। यूनिवर्सिटी ऐसे लोगों को तैयार करेगी जो बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने में मदद कर सकें। इससे लोगों को जल्दी राहत मिलेगी और कोर्ट पर भी मामलों का दबाव कम होगा।
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