साइबर ठगी का पैसा वापस लेना भी महंगा, 500 के रिफंड पर देना होगा 1000 का बॉन्ड

Aman Vaishnav | Aug 26, 2026, 08:09 IST
MP में साइबर ठगी
मध्यप्रदेश में साइबर फ्रॉड के पैसे वापस पाने के लिए पीड़ितों को एक हजार रुपए का बॉन्ड भरना पड़ रहा है। अगर किसी के 500 रुपए डूबे हैं, तो भी एक हजार रुपए की स्टाम्प ड्यूटी देनी पड़ रही है। वहीं राजस्थान में इस बॉन्ड राशि को 200 रुपए किया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में साइबर ठगी पीड़ितों की होल्ड राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
  • लेकिन रिफंड के लिए पीड़ितों को 1000 रुपए का क्षतिपूर्ति बॉन्ड भरना पड़ रहा है।
  • यह नियम इंडियन स्टाम्प एक्ट-1899 के तहत मप्र में लागू है।
  • राजस्थान और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों ने बॉन्ड राशि घटाकर सिर्फ 200 रुपए कर दी है।
  • साइबर पुलिस ने गृह विभाग को इसे 100 रुपए करने का प्रस्ताव भेजा है।

मामला क्या है

केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के बाद मध्य प्रदेश में साइबर ठगी पीड़ितों को राहत मिलनी शुरू हुई है। बैंक खातों में होल्ड कराई गई ठगी की रकम अब वापस मिल सकती है।



वहीं इस प्रक्रिया में एक बड़ी अड़चन सामने आई है। रिफंड पाने के लिए पीड़ित को एक हजार रुपए का क्षतिपूर्ति बॉन्ड भरना पड़ता है। यह नियम तब भी लागू होता है जब ठगी की रकम सिर्फ 500 रुपए हो।



जानकारी के अनुसार यह समस्या इंडियन स्टाम्प एक्ट-1899 से जुड़ी है। इस पुराने कानून के तहत मध्य प्रदेश में बॉन्ड पर एक हजार रुपए की ड्यूटी तय है।



चाहे रकम कितनी भी छोटी हो, बॉन्ड की कीमत नहीं घटती। यही वजह है कि छोटे मामलों में भी पीड़ितों को बड़ा बोझ उठाना पड़ता है।



क्यों जरूरी है बॉन्ड

बॉन्ड सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है। यह एक तरह का कानूनी सुरक्षा कवच है। अगर राशि वापस करने के बाद कोई दूसरा दावेदार अदालत पहुंच जाए, तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी होता है।



कई बार अदालत किसी और वैधानिक कारण से भी राशि वापस मांग सकती है। ऐसे में बॉन्ड भरने वाला व्यक्ति ही जवाबदेह रहता है। इसीलिए यह प्रक्रिया लगभग सभी राज्यों में अनिवार्य रखी गई है।



वहीं दिक्कत यह है कि एसओपी (SOP – Standard Operating Procedure) में यह साफ नहीं लिखा कि किस रकम पर कितना स्टाम्प लगे।



नतीजा यह होता है कि छोटी रकम के मामलों में भी पीड़ित को पूरा एक हजार रुपए का बॉन्ड भरना पड़ता है। इससे कई लोग रिफंड लेने से भी कतराने लगते हैं।



एमपी बनाम राजस्थान

राजस्थान ने इस समस्या को पहले ही पहचान लिया था। वहां बॉन्ड की राशि घटाकर सिर्फ 200 रुपए कर दी गई है। जम्मू-कश्मीर समेत कुछ और राज्यों ने भी यही रास्ता अपनाया है। इससे पीड़ितों को काफी राहत मिली है, खासकर छोटी रकम वाले मामलों में।



मध्य प्रदेश अभी भी एक हजार रुपए के पुराने नियम पर टिका हुआ है। इससे कई पीड़ित परेशान नजर आते हैं। खासकर वे लोग जिनकी ठगी की रकम बॉन्ड की कीमत से भी कम है।



साइबर पुलिस का प्रस्ताव

राज्य साइबर पुलिस (MP साइबर पुलिस) ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है। पुलिस ने गृह विभाग को एक प्रस्ताव भेजा है। इसमें बॉन्ड राशि घटाकर 100 रुपए करने की सिफारिश की गई है।



गृह विभाग अब इस प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजेगा। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो मध्य प्रदेश के पीड़ितों को बड़ी राहत मिल सकती है। तब तक पुराना नियम ही लागू रहेगा।



ऐसे मिलेगी होल्ड राशि

राज्य साइबर के आईजी (IG – Inspector General) शियाज ए. के मुताबिक पूरी प्रक्रिया एक पोर्टल के जरिए पूरी होती है। पीड़ितों को कुछ आसान चरण अपनाने होते हैं।



जरूरी दस्तावेज और स्टेप्स

सबसे पहले मनी रेस्टोरेशन सिटीजन पोर्टल पर जाना होता है। इसका लिंक है mrm-ncrp.mha.gov.in। यहां शिकायत के एकनॉलेजमेंट नंबर या ओटीपी से लॉगइन करना होता है।



लॉगइन के बाद स्क्रीन पर साफ दिखता है कि किस बैंक खाते में कितनी राशि होल्ड है। इसके बाद आईएफएससी कोड, बैंक डिटेल्स और धोखाधड़ी की राशि का विवरण देना होता है।



पैन कार्ड, एफआईआर की कॉपी और अगर उपलब्ध हो तो कोर्ट का रिफंड ऑर्डर भी अपलोड करना पड़ता है।



सारी जानकारी भरने के बाद 'Raise Request For Refund' पर क्लिक करना होता है। इससे एक यूनिक आईडी नंबर जनरेट होता है।



यह रिक्वेस्ट संबंधित जांच अधिकारी के पास जांच के लिए जाती है। सत्यापन पूरा होने और पीड़ित का बॉन्ड जमा होने के बाद ही खाते में राशि वापस आती है।



FAQ

  1. MP में साइबर ठगी की राशि वापस लेने के लिए कितना बॉन्ड भरना पड़ता है?
    मध्य प्रदेश में पीड़ितों को 1000 रुपए का क्षतिपूर्ति बॉन्ड भरना पड़ता है। यह नियम इंडियन स्टाम्प एक्ट-1899 पर आधारित है। ठगी की रकम चाहे जितनी भी हो, बॉन्ड की राशि नहीं बदलती।

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