डबरा लोकसेवा केंद्र की बड़ी लापरवाही : मृत्यु प्रमाणपत्र का आवेदन, बना डाला जन्म प्रमाणपत्र
ग्वालियर जिले के डबरा तहसील स्थित लोकसेवा केंद्र से एक हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है, जो सीधे तौर पर सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है। यह घटना ग्राम महाराजपुर दफाई निवासी मुन्नी बाई आदिवासी के साथ हुई, जिन्होंने अपने पति के मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। लेकिन लोकसेवा केंद्र के कर्मचारियों ने उनके आवेदन पर जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिया।
मुन्नी बाई ने बताया कि वह कई बार मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर चुकी थीं और अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर भी काट चुकी थीं। इस बार उम्मीद थी कि उनका काम जल्द हो जाएगा, लेकिन उन्हें जो प्रमाणपत्र मिला, वह पूरी तरह से गलत था। यह घटना दर्शाती है कि लोक सेवा केंद्रों में आवेदन की जांच कितनी लापरवाही से की जा रही है।
अफसरों की दलील: 'गलती तो इंसान से ही होती है'
जब यह मामला मीडिया में उछला और छीमक के नायब तहसीलदार संजय अगरिया से इस बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब काफी हल्का था। उन्होंने सारा ठीकरा लोकसेवा केंद्र के ऑपरेटरों पर फोड़ दिया। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर पर फीडिंग के दौरान गलती हो गई थी, जिसे अब सुधार दिया गया है।
हैरानी की बात तो तब हुई जब लोकसेवा केंद्र के संचालक महेंद्र राय ने इस पर बयान दिया। उन्होंने कहा, "काम करने वालों से ही तो गलती होती है, इसमें कौन सी बड़ी बात है? हमने सुधार कर दिया है और आवेदक अब संतुष्ट है।" अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी तंत्र में एक इंसान की मौत और जन्म के बीच का अंतर सिर्फ एक 'छोटी सी गलती' है?
एक गंभीर गलती को ‘साधारण’ मानना
लोकसेवा केंद्र की इस लापरवाही को गंभीरता से नहीं लिया गया और अधिकारियों ने इसे साधारण गलती कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। इस बयान से साफ नजर आता है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर चूक को हल्के में ले रहे हैं। सवाल यह उठता है कि यदि मृत्यु और जन्म जैसे संवेदनशील दस्तावेजों में ऐसी लापरवाही हो सकती है, तो अन्य दस्तावेजों की स्थिति क्या होगी?
आवेदक की परेशानी
मुन्नी बाई के लिए यह सिर्फ एक त्रुटि नहीं, बल्कि कई दिनों की भागदौड़, समय और मानसिक परेशानी का मामला है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि प्रशासन इस लापरवाही पर ठोस कार्रवाई करेगा या फिर इसे ‘सुधार कर दिया’ कहकर टाल दिया जाएगा।
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