डेली कॉलेज चुनाव पर ओडीए सदस्यों की लगी आपत्तियां, चुनाव अधिकारी 27 अप्रैल को लेंगे फैसला
News in Short
- डेली कॉलेज चुनाव 21 मई को प्रस्तावित।
- नया और पुराना संविधान बना विवाद का कारण।
- ओडीए सदस्यों ने सैकड़ों आपत्तियां दर्ज कराईं।
- वोटर लिस्ट और शेड्यूल पर सवाल।
- 27 अप्रैल को चुनाव अधिकारी लेंगे फैसला।
Intro
डेली कॉलेज चुनाव घोषित शेड्यूल के मुताबिक 21 मई को होना है। लेकिन किस संविधान से इसे लेकर असमंजस है। वोटर लिस्ट से लेकर अन्य मुद्दों पर सैकड़ों आपत्तियां ईमेल के जरिए और व्यक्तिगत तौर पर भी मुख्य चुनाव अधिकारी को मिल चुकी हैं। अब इनके द्वारा 27 अप्रैल को फैसला लिया जाएगा।
News in Detail
डेली कॉलेज चुनाव का शेड्यूल 21 अप्रैल को जारी हुआ, लेकिन चुनाव किस संविधान से होंगे यह अभी तक औपचारिक घोषित नहीं हुआ है। अभी लागू संविधान और प्रस्तावित नए संविधान में सबसे ज्यादा प्रभावित ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन (ओडीए) हो रहा है। इनके अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि यदि नए संविधान से होता है तो इसमें निर्वाचन प्रक्रिया ही खत्म है और प्राथमिकता से ओडीए प्रेसीडेंट और सेक्रेट्री ही डेली कॉलेज बोर्ड में जाएंगे। इसी बात की लड़ाई चल रही है।
ओडीए गुट ने लगाई आपत्तियां
ओडीए के हित को प्रभावित करने वाले नए प्रस्तावित प्रावधानों के विरोध में नीरज देसाई, राजेश अग्रवाल, जयेश पटेल, अनुराग जैन व अन्य हैं। इनके द्वारा चुनाव अधिकारी हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस सुशील गुप्ता के सामने व्यक्तिगत तौर पर भी आपत्तियां लगा दी गई हैं। साथ ही देश-विदेश में रहने वाले कई अन्य सदस्यों ने भी ईमेल के जरिए आपत्तियां भेजी हैं।
इन सभी पर फैसला अब चुनाव अधिकारी को 27 तक करना है, क्योंकि 28 अप्रैल से नामांकन प्रक्रिया है। ऐसे में साफ करना जरूरी है कि किस संविधान से चुनाव हो रहे हैं और ओडीए से दो सदस्यों का निर्वाचन होना है या नहीं। आपत्तियां लगाने वालोें को भी चुनाव अधिकारी ने बता दिया है कि वह 27 तक फैसला ले लेंगे।
यह है प्रमुख आपत्तियां
- चुनाव शेड्यूल के पहले साफ होना चाहिए कि किस संविधान से चुनाव हो रहा है।
- यदि नए संविधान से चुनाव होना है तो वह तो शेड्यूल जारी होने के पहले मंजूर ही नहीं हुआ है। इस संबंध में फर्म एंड सोसायटी ने सूचना के अधिकार में सत्यापित कॉपी 23 अप्रैल को दी है। इस कॉपी के अनुसार वर्तमान संविधान ही है।
- यदि वर्तमान संविधान है तो फिर इसके तहत चुनाव शेड्यूल 90 दिन का होना था, लेकिन यह केवल 30 दिन का दिया है।
- ओडीए के करीब 6 हजार सदस्य हैं, इसमें हजार से अधिक सदस्य विदेश में और दो हजार करीब देश भर के हिस्से में फैले हुए हैं। ऐसे में 4 से 19 मई केवल 15 दिन में इनके मतपत्र कैसे पहुंचेंगे और एक दिन में 20 मई को यह कैसे वापस आ सकेंगे। पहले इसके लिए कम से कम 45 दिन दिए जाते थे।
- वोटर लिस्ट में कई मृतक सदस्यों के भी नाम अभी तक जुड़े हुए हैं। ऐसे में इनके डाक मतपत्र का दुरुपयोग हो सकता है
- नया संविधान किसी हाल में मंजूर नहीं है, क्योंकि यह ओडीए के अस्तित्व को ही नकारता है और निर्वाचन की जगह चयन पर जोर देता है। इससे बोर्ड में लोकतांत्रिक प्रक्रिया खत्म होगी।
यह हमारी संस्था की प्रतिष्ठा की लड़ाई
सदस्य पटेल, देसाई व अन्य ने कहा कि इन चुनाव और बोर्ड से हमारा कोई हित और अहित नहीं जुड़ा है। हमारी लड़ाई केवल डीसी की गरिमा और प्रतिष्ठा की है। वैसे ही बोर्ड का समय दिसंबर में ही पूरा हो गया था। लेकिन अतिरिक्त कार्यकाल के दौरान मार्च में नया संविधान पास किया गया, जबकि इस दौरान वह केवल केयरटेकर की भूमिका में थे और उन्हें संविधान संशोधन नहीं करना था। वहीं फर्म एंड सोसायटी भोपाल स्तर पर पहले ही केस लगे हैं, जिसमें फैसला नहीं हुआ है, ऐसे में नया संविधान नहीं आ सकता है।
चुनाव अधिकारी से अभी जवाब नहीं
फर्म एंड सोसायटी से द सूत्र ने जब दो दिन पहले बात की तो उन्होंने कहा था कि नया संविधान अभी मंजूर नहीं किया है। वहीं चुनाव अधिकारी हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस गुप्ता से भी द सूत्र ने फोन किया और मैसेज कर जानकारी चाही, तो जवाब नहीं आया है।
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