डेली कॉलेज के पूर्व छात्र संदीप पारिख, रंजीत, मानवीर, अनुराग को आशंका धाराएं बढ़ाएगी पुलिस

Sanjay Gupta | May 16, 2026, 19:00 IST
daly college
डेली कॉलेज चुनाव विवाद के बीच पूर्व छात्रों को आशंका है कि पुलिस उनके खिलाफ और गंभीर धाराएं जोड़ सकती है। इसी डर से संदीप पारिख समेत चार लोग अग्रिम जमानत के लिए जिला कोर्ट पहुंचे, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिकाएं निरस्त कर दीं।

News in Short

  • डेली कॉलेज चुनाव को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है।
  • सोशल मीडिया पेज को लेकर चार पूर्व छात्रों पर केस दर्ज हुआ।
  • आरोप है कि कॉलेज की छवि खराब करने वाली पोस्ट डाली गईं।
  • पुलिस द्वारा और धाराएं बढ़ाने की आशंका जताई गई।
  • जिला कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिकाएं निरस्त कर दीं।

News in Detail

Indore: डेली कॉलेज चुनाव 21 मई को होना है। हालांकि इसमें एक पद न्यू डोनर कैटेगरी टू बी टू के लिए ही चुनाव हो रहा है। इसमें हरपाल उर्फ मोनू भाटिया के विरुद्ध पूर्व छात्रों का एक गुट उतरा है। इसका प्रतिनिधित्व राजेश अग्रवाल कर रहे हैं।



वहीं वाइस ऑफ डीसी सोशल मीडिया पेज को लेकर डेली कॉलेज प्रबंधन ने चार पूर्व छात्रों पर केस दर्ज कराया है। इसमें अब आशंका है कि धाराएं बढ़ाई जाएंगी और गिरफ्तारी होगी। इसी को लेकर मामला जिला कोर्ट पहुंचा।



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यह है मामला

वाइस ऑफ डीसी नाम से एक सोशल मीडिया पेज बनाया गया। आरोप है कि इस पर डेली कॉलेज की प्रतिष्ठा धूमिल करने संबंधी पोस्ट की गईं। इसके लिए अजय खड़िया द्वारा क्राइम ब्रांच इंदौर में शिकायत की गई। जिस पर संदीप पारिख, अनुराग जैन, रंजीत सिंह और मानवीर बायस के खिलाफ बीएनएस धारा 319(2) के तहत केस दर्ज हुआ।



अब इसमें बीएनएस की धारा 79, 336, 336(3)(4), 340 और 342(2) भी बढ़ने की आशंका है। इसके लिए शासकीय अधिवक्ता ने क्राइम ब्रांच को विधिक सलाह दी है। इसी को लेकर अग्रिम जमानत लेने के लिए पूर्व छात्रों ने जिला कोर्ट में आवेदन लगाया।



लेकिन जिला कोर्ट ने निरस्त की याचिकाएं

इस मामले में जिला कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिकाएं निरस्त कर दीं। जिला कोर्ट ने आदेश में कहा कि अभी तक जो केस दर्ज है, उसकी धारा 319(2) जमानती धारा है। वहीं जो धाराएं बढ़ाने के लिए पुलिस को अभिमत मिला है, उस पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है।



यह धाराएं भी अधिकतम सात साल के कारावास की हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट के अरनेश कुमार केस में जारी गिरफ्तारी गाइडलाइन का पालन जरूरी है। वहीं याचिकाकर्ताओं को पूर्व में ही हाईकोर्ट से गिरफ्तारी संबंधी मामले में राहत मिल चुकी है और कोर्सिव एक्शन पर रोक लगी हुई है। ऐसे में उन्हें किसी अजमानती अपराध में गिरफ्तारी की आशंका नजर नहीं आती। इसलिए यह आवेदन निरस्त किया जाता है।



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