दमोह में मिले ब्रिटिश काल के सिक्के, खजाने पर विवाद, मजदूर बोले 35 किलो, मालिक बोले 42 सिक्के
समझें क्या है पूरा मामला
- दमोह के फुटेरा वार्ड में पुराने मकान की खुदाई के दौरान चांदी का खजाना मिला।
- मकान मालिक शिक्षक आलोक सोनी ने पुलिस को केवल 42 चांदी के सिक्के सौंपे।
- मजदूर ओमप्रकाश अठ्या का दावा है कि मटके में 30 से 35 किलो चांदी थी।
- पुलिस ने दो मकान सील किए और पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) के संरक्षण सहायक ने सिक्कों को ब्रिटिश काल का बताया।
दमोह में खुदाई बनी सनसनी की वजह
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक पुराने मकान की खुदाई ऐसी खबर लेकर आई जिसने पूरे शहर को हिला दिया। फुटेरा वार्ड में रहने वाले स्कूल शिक्षक आलोक सोनी अपना पुराना पैतृक मकान तुड़वाकर नया मकान बनवा रहे थे। शनिवार को इस खुदाई के दौरान कुछ ऐसा निकला जिसने पूरे मोहल्ले में हलचल मचा दी।
खुद मकान मालिक आलोक सोनी रविवार को दमोह कोतवाली पहुंचे। उन्होंने पुलिस को बताया कि खुदाई में 42 चांदी के सिक्के मिले हैं और वो उन्हें जमा करने आए हैं। लेकिन तभी कहानी में एक नया मोड़ आया।
मजदूरों ने पुलिस थाने में किया बड़ा खुलासा
जब पुलिस मकान मालिक से पूछताछ कर ही रही थी, तभी उसी मकान पर काम करने वाले कुछ मजदूर भी थाने पहुंच गए। उनका बयान सुनकर पुलिस और वहाँ मौजूद सभी लोग चौंक गए।
मजदूर ओमप्रकाश अठ्या ने बताया कि शनिवार को खुदाई के वक्त पहले उन्हें जमीन में एक घड़ा मिला जो खाली था। लेकिन थोड़ा और खोदने पर एक बड़ा मटका निकला। उस मटके के भीतर चांदी के सिक्कों के साथ-साथ चांदी की रॉड भी भरी हुई थी। मजदूरों के मुताबिक इस पूरे खजाने का वजन 30 से 35 किलोग्राम के आसपास था।
मजदूरों ने आगे बताया कि जैसे ही यह खजाना मिला, मकान मालिक ने उन्हें डराया और धमकाया। उनके परिजनों ने एक बाल्टी में सारा सामान भरकर रख लिया। शाम को जब मजदूर घर जाने लगे तो मकान मालिक ने उन्हें 500-500 रुपए थमा दिए। जब मजदूर अपने गांव पहुंचे और लोगों को यह किस्सा सुनाया, तो गांव वालों ने उन्हें पुलिस के पास भेजा। और वो थाने पहुंच गए।
दो मकान सील, पुरातत्व की टीम मौके पर
मजदूरों की शिकायत के बाद मामला सिर्फ पुलिस तक नहीं रहा। जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग को भी तुरंत सूचना दी गई। दोनों विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं। जांच के बाद पुलिस ने दो मकान सील कर दिए।
तपती दोपहरी में पुलिस, प्रशासन और पुरातत्व की टीम घंटों जांच-पड़ताल करती रही। हालांकि 42 सिक्कों की बरामदगी तो हुई, लेकिन बाकी का माल अभी तक जब्त नहीं हो पाया। अगर मजदूरों का दावा सच है तो 35 किलो चांदी की बाजार में कीमत करोड़ों रुपए तक पहुंचती है।
ब्रिटिश काल के हैं सिक्के, पुरातत्व ने बताया बेशकीमती
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण सहायक शुभम अरजरिया ने सिक्कों की जांच की। उन्होंने बताया कि ये सिक्के अंग्रेजों के शासनकाल यानी ब्रिटिश हुकूमत के दौर के हैं। इन्हें निकले 100 साल से भी ज्यादा समय हो चुका है।
पुरातत्व की दृष्टि से ये सिक्के बेहद बेशकीमती हैं। ऐसे सिक्के न सिर्फ ऐतिहासिक धरोहर होते हैं, बल्कि इनकी वजह से पुराने जमाने के व्यापार, आर्थिक व्यवस्था और जीवनशैली की झलक भी मिलती है।
मकान मालिक की सफाई, पुलिस की जांच जारी
आलोक सोनी का कहना है कि उन्होंने खुद ईमानदारी से 42 सिक्के पुलिस को दिए। उनके मुताबिक मजदूर किसी षड्यंत्र के तहत इतनी बड़ी मात्रा का झूठा दावा कर रहे हैं।
वहीं दमोह कोतवाली के थाना प्रभारी मनीष कुमार और तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी ने कहा कि अभी सच्चाई पूरी तरह सामने नहीं आई है। 42 सिक्कों की पुष्टि हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही असली तस्वीर साफ हो पाएगी।
कानून क्या कहता है खजाने के बारे में
भारत में जमीन के नीचे से मिलने वाले पुराने खजाने को लेकर स्पष्ट कानून है। खजाना अधिनियम (Treasure Trove Act) और पुरातत्व एवं ऐतिहासिक स्थल और अवशेष अधिनियम (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act) के तहत ऐसी कोई भी ऐतिहासिक धरोहर सरकार की संपत्ति मानी जाती है। इसे छुपाना या अपने पास रखना कानूनी अपराध है।
अगर मजदूरों का दावा सच निकला, तो मकान मालिक आलोक सोनी के खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पुलिस की जांच अभी जारी है और यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।
जरूरी FAQ
दमोह के फुटेरा वार्ड में खुदाई में क्या मिला और विवाद क्यों हुआ?
दमोह के फुटेरा वार्ड में स्कूल शिक्षक आलोक सोनी के पुराने पैतृक मकान की खुदाई के दौरान चांदी का खजाना मिलने की बात सामने आई। मकान मालिक ने पुलिस को सिर्फ 42 चांदी के सिक्के सौंपे, जबकि मजदूरों का दावा है कि एक बड़े मटके में 30 से 35 किलोग्राम चांदी निकली थी जिसमें सिक्के और चांदी की रॉड दोनों शामिल थीं। मालिक पर मजदूरों को डराने और 500-500 रुपए देकर चुप कराने का आरोप है। इसी दावे और जवाबी बयान के बीच यह मामला बड़े विवाद में बदल गया।
दमोह में मिले सिक्के कितने पुराने हैं और इनकी क्या अहमियत है?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण सहायक शुभम अरजरिया के मुताबिक ये सिक्के ब्रिटिश हुकूमत के दौर के हैं और 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। पुरातत्व की दृष्टि से ये बेहद बेशकीमती हैं। ऐसे सिक्के इतिहास, संस्कृति और उस दौर की आर्थिक व्यवस्था को समझने में मदद करते हैं। यही वजह है कि इन्हें संग्रहालयों और सरकारी संरक्षण में रखा जाना जरूरी है।
जमीन में मिले खजाने पर कानूनी तौर पर किसका हक होता है?
भारत में जमीन के नीचे से मिलने वाली पुरानी ऐतिहासिक संपत्ति पर मकान मालिक का नहीं, बल्कि सरकार का हक होता है। खजाना अधिनियम और पुरातत्व एवं ऐतिहासिक स्थल व अवशेष अधिनियम के तहत ऐसी चीजें सरकार को सौंपना अनिवार्य है। अगर कोई ऐसा खजाना छुपाता है या उसे अपने पास रखता है तो यह कानूनी अपराध माना जाता है और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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