दमोह में समग्र ID में बड़ी गड़बड़ी: एक समग्र आईडी पर 105 बच्चे लिए गोद, 6 लोगों पर मामला दर्ज
दमोह समग्र ID में गड़बड़ी
दमोह समग्र आईडी मामला (Damoh Samagra ID Case) सामने आया है। प्रशासनिक जांच में बच्चों के पारिवारिक रिकॉर्ड पर सवाल उठे हैं। उपलब्ध विवरण में एक परिवार से 105 रिकॉर्ड जुड़े मिले। इनमें कई बच्चों का रिश्ता गोद लिया हुआ दर्ज था।
ये रिकॉर्ड अलग-अलग समय पर परिवार आईडी में दर्ज हुए थे। इसलिए सभी बच्चों का एकसाथ वहां रहना साबित नहीं होता। सभी 105 बच्चों को वास्तव में गोद लेने की पुष्टि नहीं। फिलहाल जांच का केंद्र रिकॉर्ड और उससे जुड़े दस्तावेज हैं।
बच्चों के पंजीकरण (Child Registration) में कथित अनियमितताओं का आरोप है। संबंधित दस्तावेजों में भी कई तरह के अंतर बताए गए हैं। अब अधिकारियों को बच्चों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है।
शिकायत से शुरू हुई जांच
मामला जिला बाल कल्याण समिति की शिकायत से सामने आया। समिति अध्यक्ष दीपक तिवारी ने कलेक्टर को इसकी जानकारी दी। शिकायत में बच्चों के गलत पंजीकरण का आरोप लगाया गया। उनके पारिवारिक रिकॉर्ड में कथित बदलाव का मुद्दा भी उठाया गया। इसके बाद कलेक्टर ने चार सदस्यों की जांच टीम बनाई। टीम ने समग्र रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की। बच्चों को परिवारों में जोड़ने वाली एंट्री भी देखी गईं। जांच के निष्कर्षों के आधार पर पुलिस कार्रवाई की जानकारी है।
कथित गड़बड़ियों की अवधि जनवरी 2013 से जून 2024 तक है। इस तरह मामला करीब साढ़े ग्यारह साल के रिकॉर्ड से जुड़ा। पुराने पंजीकरण और बाद में हुए बदलाव जांच में शामिल हैं। दस्तावेजों के आधार पर इन बदलावों की वजह तलाशनी होगी।
छह लोगों पर केस दर्ज
जानकारी के मुताबिक दमोह देहात थाने में एफआईआर दर्ज हुई। इसमें छह लोगों के नाम शामिल होने की जानकारी है। संजीव लेवार्ट और रामलाल कश्यप का नाम बताया गया है। प्रवीण पॉल और जगदीश का भी इसमें नाम शामिल किया गया है। पार्थ राजपूत और दिलीप के नाम भी विवरण में शामिल हैं।
परिवारों के बीच बदले रिकॉर्ड
समग्र रिकॉर्ड में हेरफेर (Samagra Record Manipulation) का आरोप भी है। एक बच्चे का रिकॉर्ड पहले दूसरे परिवार में दर्ज था। उस परिवार के मुखिया के तौर पर संजीव लेवार्ट दर्ज थे। बाद में रिकॉर्ड दूसरी परिवार आईडी में जोड़ने का उल्लेख है। यह बदलाव जनपद पंचायत दमोह के लॉगिन से बताया गया है। बच्चे का रिकॉर्ड उसी परिवार आईडी में जोड़ा गया था। उस आईडी से अलग-अलग समय पर 105 रिकॉर्ड जुड़े मिले।
दूसरी एंट्री भी जांच में
जांच केवल एक परिवार के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रही। अन्य परिवारों की संबंधित एंट्री भी जांच में सामने आईं। प्रवीण पॉल के परिवार में ऐसा पंजीकरण मिलने का उल्लेख है। वहां एक बच्चे का संबंध गोद लिया हुआ दर्ज था।
गोद लिया हुआ मामला जांच का विषय है। इस एंट्री के लिए इस्तेमाल दस्तावेजों पर सवाल बताए गए हैं। उपलब्ध कॉपी में दूसरी परिवार आईडी का भी उल्लेख है। उस आईडी की संख्या अलग रिपोर्ट में अलग लिखी मिली।
पहचान के दस्तावेजों पर सवाल
जांच में बच्चों की पहचान संबंधी रिकॉर्ड भी देखे गए हैं। जन्मतिथि और आधार से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल का उल्लेख है। एक मामले में अलग रिकॉर्ड के बीच अंतर बताया गया। परिवार रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जानकारी मेल नहीं खाई।
इस अंतर की वजह अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई। जांच को बताना होगा कि बदलाव किस आधार पर हुआ। किसने दस्तावेज जमा किए और किसने एंट्री मंजूर की थी। संबंधित बच्चों की मौजूदा स्थिति भी पता लगाने की कोशिश है।
उपलब्ध जानकारी से बच्चों के गायब होने का निष्कर्ष नहीं निकलता। सभी बच्चों की वर्तमान जगह का स्पष्ट विवरण भी नहीं है। इसलिए उनकी स्थिति पर कोई अतिरिक्त दावा करना सही नहीं होगा। जांच पूरी होने पर इन सवालों के जवाब सामने आएंगे।
धर्मांतरण की जांच का विषय आया सामने
धर्मांतरण जांच (Religious) का पहलू भी सामने आया है। दीपक तिवारी ने मामले की गहरी पड़ताल की जरूरत बताई है। उनके मुताबिक पंजीकरण से जुड़े हालात की विस्तृत जांच जरूरी है। उन्होंने धर्मांतरण की संभावना की जांच का भी उल्लेख किया। फिलहाल धर्मांतरण होने की पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं हुई है। बच्चों की पहचान और गोद संबंधी एंट्री जांच के केंद्र हैं। इनके किसी धर्मांतरण गतिविधि से संबंध की पड़ताल बताई गई है। रिकॉर्ड की गड़बड़ी से ऐसा संबंध अपनेआप साबित नहीं होता।
समग्र आईडी क्या है ?
समग्र आईडी मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी की जाने वाली एक विशिष्ट पहचान संख्या (Samagra Portal) है, जो राज्य के नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ देने के लिए दी जाती है। समग्र आईडी दो तरह की होती है। समग्र परिवार आईडी और सदस्य समग्र आईडी।
समग्र ID का काम क्या है?
दमोह प्रशासन की वेबसाइट समग्र पोर्टल का उद्देश्य बताती है। इसमें मध्य प्रदेश के परिवारों और सदस्यों का पंजीकरण होता है। परिवार के लिए आठ अंकों की अलग आईडी मिलती है। प्रत्येक सदस्य के लिए नौ अंकों की आईडी होती है।
ये पहचान संख्या सरकारी योजनाओं का लाभ देने में सहायक हैं। इसलिए पारिवारिक रिकॉर्ड में सही जानकारी दर्ज होना जरूरी है। वेबसाइट परिवार और सदस्य की आईडी को अलग पहचान बताती है।