नरोत्तम मिश्रा का सिंगल नाम दिल्ली भेजा था प्रदेश संगठन ने, ऐनवक्त पर कट गया
दतिया उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को भाजपा प्रत्याशी घोषित किया गया है। यह घोषणा होते ही मध्य प्रदेश भाजपा में घमासान मच गया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थक इस फैसले से खासे नाराज हैं। समर्थकों का कहना है कि आशुतोष का टिकट काटकर नरोत्तम को उम्मीदवार बनाया जाए। ऐसा क्या हुआ जो आशुतोष की झोली में टिकट आ गया और नरोत्तम हाथ मलते रह गए। इस पूरे मामले की भीतरी कहानी काफी दिलचस्प है।
'द सूत्र' को मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक शुरुआत में दिल्ली हाईकमान के पास सिर्फ नरोत्तम मिश्रा का ही नाम भेजा गया था। प्रदेश संगठन भी उनके नाम पर पूरी तरह सहमत था। एक-दो दिन में ही अचानक स्थिति बदलने लगी। प्रदेश संगठन को दिल्ली से एक फोन आया। इसमें कहा गया कि दतिया सीट के लिए एक-दो नाम और भेजे जाएं। इस एक फोन कॉल ने पूरा राजनीतिक समीकरण बदल दिया।
शुभ मुहूर्त में नामांकन भरने वाले थे नरोत्तम
इधर, नरोत्तम मिश्रा अपने टिकट को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हो चुके थे। वे नामांकन फॉर्म खरीदकर ला चुके थे। इतना ही नहीं, पार्टी पदाधिकारियों से शुभ मुहूर्त में नामांकन जमा करने को लेकर भी चर्चा कर रहे थे। लेकिन दिल्ली में चल रही राजनीतिक हलचल के कारण उन्हें रोक दिया गया। इसी उठापटक के बीच पूरा खेल पलट गया। आखिरकार आलाकमान ने 11 जुलाई को आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगा दी।
अब टिकट बदलने की संभावना कम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम काफी नाटकीय रहा है। सूत्रों के मुताबिक अब आशुतोष तिवारी का टिकट बदले जाने की संभावना बेहद कम है। पार्टी हाईकमान अपने फैसले पर कायम रहने के संकेत दे रहा है। हालांकि नरोत्तम समर्थकों का विरोध अभी थमा नहीं है। दतिया सीट पर उपचुनाव से पहले यह आंतरिक कलह भाजपा की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती है।
जिलाध्यक्ष ने लिखा खुला पत्र
11 जुलाई की शाम को नरोत्तम का टिकट कटने से नाराज दतिया जिला भाजपा अध्यक्ष रघुवीरसिंह कुशवाहा ने BJP नेतृत्व को खुला पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने अपने साथ कई पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे की घोषणा की है। उन्होंने लिखा कि जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका दतिया अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित कई पदाधिकारी इस्तीफा दे रहे हैं। कुशवाहा ने पार्टी नेतृत्व से नरोत्तम मिश्रा को प्रत्याशी बनाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 24 घंटे के भीतर फैसला नहीं बदला गया तो वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद विरोध और तेज किया जाएगा। टिकट बदलाव के विरोध में दतिया में प्रदर्शन भी हुआ। बड़ी संख्या में समर्थक सड़क पर उतर आए। कुछ महिलाएं सड़क पर लेट गईं। प्रदर्शनकारियों के विरोध के चलते ग्वालियर-झांसी हाईवे पर करीब 5 किलोमीटर तक जाम लग गया।
नरोत्तम का करियर खत्म करने की साजिश
समर्थकों का आरोप है कि भाजपा नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक करियर खत्म करना चाहती है। जब ग्वालियर के सांसद भारत सिंह कुशवाहा चुनाव हारे थे तो उन्हें लोकसभा का टिकट क्यों दिया गया। वहीं दूसरी तरफ नरोत्तम के चुनाव हारने के बाद उन्हें पूरी तरीके से अलग-थलग कर दिया गया है। उन्होंने राज्यसभा का टिकट मांगा, लेकिन पार्टी ने नहीं दिया। लोकसभा का टिकट मांगा, नहीं दिया। प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया और अब विधानसभा टिकट भी नहीं दिया। यह उनके खिलाफ गहरी साजिश है।
आज दतिया बंद का आह्वान
समर्थकों ने शनिवार को दतिया बंद का आह्वान किया है। इस दौरान पूरे जिले में भारतीय जनता पार्टी और आशुतोष तिवारी का भी विरोध किया जाएगा। नरोत्तम दतिया सीट से लंबे समय तक BJP का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि क्षेत्र में उनका संगठन मजबूत है। इसलिए पार्टी को उन्हें ही उम्मीदवार बनाना चाहिए था। वहीं BJP ने आशुतोष तिवारी को टिकट देकर नए चेहरे पर भरोसा जताया है।
दतिया से नरोत्तम कापुराना नाता
बता दें कि नरोत्तम मिश्रा साल 2008 से लगातार दतिया से विधायक रहे हैं। वे मध्य प्रदेश सरकार में गृहमंत्री जैसा अहम पद भी संभाल चुके हैं। साल 2023 के चुनाव में वे कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार गए थे। भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद ही यह उपचुनाव हो रहा है। ऐसे में नरोत्तम समर्थक अपनी पुरानी सीट वापस पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। टिकट न मिलने से उनकी नाराजगी और गहरी हो गई है।
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