मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक ने लगाया जोर, फिर भी दतिया में ढहा बीजेपी का किला
दतिया उपचुनाव में बीजेपी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी थी। पार्टी के 12 मंत्री, 6 सांसद और 110 से ज्यादा नेताओं समते पूरी मशीनरी मैदान में थी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद तीन दिन तक दतिया में डटे रहे। इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने 66 हजार 757 वोट हासिल किए, जबकि बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 60 हजार 741 वोट मिले। सबसे बड़ा झटका बीजेपी को शहर क्षेत्र में लगा, जहां पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
दतिया उपचुनाव के नतीजे (Datia bypoll result)
इस तरह कांग्रेस ने अच्छे अंतर से जीत दर्ज की है। हालांकि पिछली बार के मुकाबले बीजेपी की हार का अंतर कम रहा। साल 2023 के मुकाबले बीजेपी को इस बार 1726 वोट ज्यादा मिले।
यह सीट पहले कांग्रेस के राजेंद्र भारती के पास थी। उन्होंने 2023 में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराया था। बाद में एक बैंक से जुड़े मामले में भारती को तीन साल की सजा हुई। इससे उनकी विधायकी चली गई और उपचुनाव कराना पड़ा।
बीजेपी ने झोंकी पूरी ताकत
इस उपचुनाव (Datia by election 2026) में बीजेपी ने बड़ा राजनीतिक दांव लगाया। प्रदेश के 12 मंत्री चुनाव प्रचार में उतरे। इसके साथ दो केंद्रीय मंत्री भी दतिया पहुंचे। छह सांसदों ने भी प्रचार किया, इनमें झांसी के एक सांसद भी शामिल थे। कुल 110 मौजूदा और पूर्व विधायक-मंत्री मैदान में उतारे गए। इनमें संगठन के कई पदाधिकारी भी शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद तीन दिन तक दतिया में डटे रहे।
इतनी बड़ी ताकत झोंकने के बाद भी बीजेपी हार गई। इससे पार्टी के भीतर बड़ा झटका माना जा रहा है। दोनों प्रमुख दलों में भीतरघात की चर्चा तेज हो गई है।
टिकट कटने से बढ़ी नाराजगी
MP BJP में टिकट बंटवारे को लेकर पहले ही असंतोष था। पार्टी ने इस बार आशुतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाया। इससे नरोत्तम मिश्रा समर्थकों में नाराजगी साफ दिखी। नामांकन के दौरान नरोत्तम मिश्रा की भावुक विदाई भी चर्चा में रही।
कांग्रेस (MP Congress) खेमे में भी हलचल कम नहीं थी। पार्टी ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के एक रिश्तेदार को निष्कासित कर दिया। कांग्रेस का आरोप था कि वह बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रहे थे।
शहर में बीजेपी की सबसे बड़ी हार
दतिया शहर में बीजेपी को इतिहास की सबसे बड़ी हार मिली। यहां पार्टी करीब 11 हजार 231 वोटों से पीछे रह गई। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने ही पोलिंग बूथ में बढ़त नहीं दिला सके। उनके वार्ड में भी बीजेपी 27 वोट से पीछे रही। बीजेपी को शहर के बजाय गांव के इलाकों से ज्यादा वोट मिले। इससे साफ है कि शहरी वोटरों में पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है।
एक इलाके में मिली राहत
हर तरफ निराशा के बीच पार्टी को एक जगह राहत जरूर मिली। बसई इलाका पारंपरिक रूप से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इस बार बीजेपी यहां पहली बार आगे रही। यहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा हुई थी। पार्टी इसे अपने प्रचार अभियान की एक बड़ी उपलब्धि मान रही है।
कार्रवाई की तैयारी
हार के बाद बीजेपी संगठन में बड़ी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। पार्टी नतीजों की गहराई से समीक्षा में जुट गई है। जिलाध्यक्ष समेत 15 से ज्यादा पदाधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। अगले दो से तीन दिन में जिला कार्यकारिणी भी भंग हो सकती है। समीक्षा रिपोर्ट दिल्ली स्थित पार्टी नेतृत्व को भेजी जाएगी।
नेताओं की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वे जनादेश को सिर झुकाकर स्वीकार करते हैं। उनके मुताबिक 2023 के मुकाबले बीजेपी को इस बार ज्यादा वोट मिले हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी अगले चुनाव में और मजबूती से लौटेगी।
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि नतीजों की पूरी समीक्षा होगी। निष्कर्षों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे जनता की जीत बताया। उनके मुताबिक दतिया का जनादेश बताता है कि सत्ता का अहंकार ज्यादा दिन नहीं टिकता। उन्होंने कहा कि यह जनता के विश्वास और अधिकारों की जीत है।
आगे क्या होगा
दतिया का यह नतीजा एमपी बीजेपी संगठन के लिए बड़ा सबक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जिला स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। टिकट बंटवारे और भीतरघात जैसे मुद्दों पर भी मंथन शुरू हो गया है। पार्टी की नजर अब आगामी चुनावों की तैयारी पर टिकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हार सिर्फ एक सीट की बात नहीं है। यह बीजेपी के संगठन ढांचे पर भी सवाल खड़े करती है। टिकट वितरण में पारदर्शिता की कमी असर डाल सकती है। स्थानीय नेताओं की नाराजगी को समय रहते दूर करना जरूरी माना जा रहा है। कांग्रेस के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली मानी जा रही है। आने वाले नगरीय और पंचायत चुनावों पर भी इसका असर दिख सकता है। दोनों दल अब अगली रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
FAQ
- प्रश्न 1: दतिया उपचुनाव में बीजेपी को कितने वोट से हार मिली?
उत्तर: दतिया उपचुनाव में कांग्रेस को 66,757 वोट मिले जबकि बीजेपी को 60,741 वोट मिले। कांग्रेस ने करीब 6,016 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। हालांकि 2023 के मुकाबले बीजेपी को इस बार 1726 वोट ज्यादा मिले, जिससे हार का अंतर पहले से थोड़ा कम रहा। - प्रश्न 2: बीजेपी ने दतिया उपचुनाव में कितने बड़े नेता उतारे थे?
उत्तर: बीजेपी ने प्रदेश के 12 मंत्री, दो केंद्रीय मंत्री और 6 सांसदों को प्रचार में उतारा। इसके अलावा 110 मौजूदा और पूर्व विधायक, मंत्री तथा संगठन पदाधिकारी भी मैदान में उतरे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद तीन दिन तक दतिया में डटे रहे। - प्रश्न 3: दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी क्या कार्रवाई करने जा रही है?
उत्तर: बीजेपी जिलाध्यक्ष समेत 15 से ज्यादा पदाधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी में है। नतीजों की समीक्षा के बाद अगले दो से तीन दिन में जिला कार्यकारिणी भंग हो सकती है। समीक्षा रिपोर्ट दिल्ली स्थित पार्टी नेतृत्व को भेजी जाएगी।
ये खबरें भी पढ़ें...
दतिया उपचुनाव में GEN-N फैक्टर ने बदल दिया पूरा चुनावी खेल, जानें क्या है GEN-N
दतिया उपचुनाव: 6016 वोट से जीती कांग्रेस : भाजपा नरोत्तम मिश्रा का बूथ भी हारी
दतिया उपचुनाव: नतीजे से पहले कांग्रेस में घमासान, BJP की चुप्पी, क्या है रणनीति?
दतिया उपचुनाव: घनश्याम सिंह-राजेंद्र भारती आमने-सामने, भीतरघात के लगाए आरोप