दतिया उपचुनाव: कांग्रेस से घनश्याम सिंह का नाम तय, द सूत्र की खबर पर लगी मुहर
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट से उपचुनाव के लिए घनश्याम सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस उम्मीदवारी को मंजूरी दी है। यह सीट पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने से खाली हुई थी।
बीजेपी ने यहां से नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। दतिया में मतदान 30 जुलाई को और नतीजे 3 अगस्त को आएंगे।
घनश्याम सिंह का ताल्लुक दतिया राजघराने से है। क्षेत्र में लगातार सक्रिय नेता के रूप में जाने जाते हैं। बता दें कि घनश्याम सिंह के उम्मीदवार बनाए जाने की खबर सबसे पहले 'द सूत्र' ने दी थी। जिस पर कांग्रेस पार्टी ने मुहर लगा दी है।
कांग्रेस में टिकट की जंग
कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर लंबा मंथन चला। शुरुआत में राजेंद्र भारती की पत्नी शोभा भारती का नाम सबसे आगे बताया जा रहा था। पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक और पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के नाम भी चर्चा में थे। बाद में भारती परिवार चुनावी मैदान से पीछे हट गया।
इसके बाद पार्टी के भीतर अवधेश नायक और घनश्याम सिंह के बीच सीधा मुकाबला बचा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी दिल्ली गए और आलाकमान से चर्चा के बाद घनश्याम सिंह के नाम पर मुहर लगी।
कौन हैं घनश्याम सिंह
घनश्याम सिंह दतिया राजघराने से जुड़े हैं। उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह वर्ष 1984 में कांग्रेस टिकट पर दतिया से सांसद बने थे। घनश्याम सिंह की उम्र करीब 72 वर्ष है। उन्होंने एमए तक शिक्षा प्राप्त की है। बता दें घनश्याम सिंह पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैं।
घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर
घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर करीब लंबा रहा है। उन्होंने वर्ष 1993 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की।
वर्ष 2003 में कांग्रेस ने फिर घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया। उन्होंने राजेंद्र भारती को हराकर विधायक पद हासिल किया था।
वर्ष 2013 में कांग्रेस ने उन्हें सेवढ़ा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में वे भाजपा के राधेलाल बघेल को हराया था।
दतिया सीट क्यों खाली हुई
दतिया सीट से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती को एक पुराने बैंक फ्रॉड मामले में सजा हुई थी। यह मामला दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से जुड़ा एक फिक्स्ड डिपॉजिट घोटाला था, जो साल 1998 का था। विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने अप्रैल 2026 में उन्हें दोषी ठहराया।
अदालत ने तीन साल की सजा और एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया। सजा के तुरंत बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट, दोनों ने राजेंद्र भारती को राहत देने से इनकार कर दिया। इसी वजह से दतिया में उपचुनाव कराना जरूरी हो गया।
बीजेपी में नरोत्तम का टिकट कटा
बीजेपी ने इस उपचुनाव में सबको चौंका दिया। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा दतिया से लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं। वे 2008 से इस सीट पर काबिज थे। लेकिन 2023 में राजेंद्र भारती ने उन्हें करीब साढ़े सात हजार वोटों से हरा दिया था। उपचुनाव के लिए मिश्रा लगातार प्रचार कर रहे थे और नामांकन फॉर्म भी खरीद चुके थे।
इसके बावजूद पार्टी ने पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया। इस फैसले से मिश्रा समर्थकों में भारी नाराजगी फैल गई। समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 जाम कर दिया।
पथराव की घटना में पुलिस अधीक्षक समेत कई अधिकारी घायल हो गए। बीजेपी की जिला इकाई के कई पदाधिकारियों ने भी सामूहिक इस्तीफा दे दिया।
कब होगा दतिया में उपचुनाव
निर्वाचन आयोग ने 6 जुलाई को दतिया उपचुनाव की अधिसूचना जारी की थी। नामांकन भरने की आखिरी तारीख 13 जुलाई है। 14 जुलाई को नामांकन की जांच होगी। नाम वापसी 16 जुलाई तक हो सकेगी।
मतदान 30 जुलाई को सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होगा। मतगणना 3 अगस्त को होगी और पूरी प्रक्रिया 4 अगस्त तक समाप्त कर ली जाएगी। इसी दिन बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मांजलपुर सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है।
दतिया की सियासी अहमियत
दतिया सीट को मध्य प्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल सीटों में गिना जाता है। यहां से नरोत्तम मिश्रा राज्य के गृह मंत्री रह चुके हैं। 2023 की हार ने बीजेपी के इस मजबूत गढ़ को हिला दिया था। अब पार्टी इस सीट को वापस जीतने की कोशिश में है।
वहीं कांग्रेस के सामने अपनी पिछली जीत बचाए रखने की चुनौती है। घनश्याम सिंह ने हाल ही में दावा किया कि बीजेपी के भीतर ही नरोत्तम मिश्रा को लेकर नाराजगी है। उन्होंने कहा कि आम मतदाताओं में भी इसे लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है।
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