क्या दतिया में फिर होंगे उपचुनाव? विधायक घनश्याम सिंह ने छिपाई जानकारी! HC पहुंचा मामला

Amresh Kushwaha | Sept 22, 2026, 10:44 IST
कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह
दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की सदस्यता को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। चुनावी शपथपत्र में 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप के बाद दतिया की राजनीति में उपचुनाव की सुगबुघाट तेज हो गई है।

हाईकोर्ट में दाखिल हुई याचिका

दतिया से हालिया कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की विधायकी पर सवाल खड़ा हो गया है। उनकी सदस्यता को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। यह याचिका उनके चुनावी शपथपत्र से जुड़ी है। आरोप है कि उन्होंने एक पुराना आपराधिक मामला छिपाया था। यदि आरोप सही साबित हुआ, तो दतिया में फिर उपचुनाव हो सकता है।



भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने यह याचिका दाखिल की है। याचिका में सीधा आरोप घनश्याम सिंह पर लगाया गया है। कहा गया है कि हालिया उपचुनाव के दौरान उन्होंने गलत जानकारी दी थी। चुनावी शपथपत्र में एक अहम मामले का जिक्र नहीं किया गया था। यह मामला 1991 का एक पुराना केस है।



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क्या है 1991 का पुराना केस

याचिका के मुताबिक यह मामला राजीव गांधी की हत्या से जुड़ा है। पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के बाद दतिया में चक्का जाम हुआ था। उस दौरान करीब 22 लोगों के खिलाफ FIR (First Information Report) दर्ज हुई थी। याचिका में दावा है कि इसमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल था। हालांकि उनके शपथपत्र में दो अन्य आपराधिक मामलों की जानकारी दी गई थी। सिर्फ इस एक मामले का जिक्र नहीं मिला।



उपचुनाव में मिली थी बड़ी जीत



घनश्याम सिंह ने 30 जुलाई 2026 के उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया था। गिनती की शुरुआत में भाजपा को बढ़त मिली थी। वहीं, तीसरे राउंड के बाद कांग्रेस ने बाजी पलट दी। इसके बाद हर राउंड में कांग्रेस की बढ़त बढ़ती चली गई। आखिर में घनश्याम सिंह की जीत तय हो गई।



नतीजों के बाद आशुतोष तिवारी मतगणना स्थल पर खुद पहुंचे थे। उन्होंने मीडिया के सामने अपनी हार मान ली। उन्होंने कहा कि यह जनता का फैसला है। उन्होंने जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करने की बात कही। वहीं भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा की भी प्रतिक्रिया आई थी। उन्होंने अपनी राजनीति को लेकर भावुक बयान दिया था। यह बयान उनके अपने बूथ पर पिछड़ने के बाद आया था।



अब सदस्यता पर संकट

फिलहाल घनश्याम सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त नहीं हुई है। वे अभी भी दतिया के विधायक बने हुए हैं। हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होनी बाकी है। यदि याचिका सही पाई गई, तो नतीजे बड़े हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में दतिया सीट पर फिर उपचुनाव हो सकता है। यह दतिया की राजनीति के लिए बड़ा मोड़ होगा।



लगातार चर्चा में है दतिया सीट

दतिया सीट पहले भी कई बार चर्चा में रह चुकी है। हाल का उपचुनाव भी काफी दिलचस्प रहा था। भाजपा ने अपने कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटा था। इसके बाद पार्टी ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा था। कांग्रेस ने अनुभवी नेता घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया था। अब उसी जीत की बुनियाद पर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।



इस पूरे मामले में अभी सिर्फ आरोप लगे हैं। कोई भी बात अदालत में साबित नहीं हुई है। घनश्याम सिंह की तरफ से अभी कोई बयान सामने नहीं आया है। मामले पर उनका पक्ष आने के बाद स्थिति और साफ होगी। तब तक यह मामला अटकलों और चर्चाओं तक सीमित रहेगा।



घनश्याम सिंह ने बताया विरोधियों की साजिश

विधायक घनश्याम सिंह ने इस याचिका को अपने खिलाफ की गई साजिश बताया है। उनका कहना है कि साल 1991 के किसी मामले की उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उस समय प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था और बाद में छोड़ दिया था।



घनश्याम सिंह का आरोप है कि याचिका लगाने वाले लोगों के राजनीतिक संबंध उनके विरोधियों से जुड़े हैं। उन्होंने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती और बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का नाम लेते हुए इसे अपने खिलाफ की जा रही साजिश बताया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।



विधायक का कहना है कि उन्हें अब तक इस मामले में पुलिस या कोर्ट की तरफ से कोई नोटिस या समन नहीं मिला है।



कौन हैं घनश्याम सिंह

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घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर तीन दशक से भी पुराना है। वे दतिया राजघराने के मुखिया माने जाते हैं। उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जू देव भी सांसद रह चुके हैं। वे 1984 में भिंड-दतिया सीट से चुने गए थे। घनश्याम सिंह की उम्र फिलहाल 72 साल है। उन्होंने एमए (Master Of Arts) तक पढ़ाई की है।



तीन दशक का सियासी सफर

घनश्याम सिंह पहली बार 1993 में दतिया से विधायक बने थे। इसके बाद 1998 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2003 में उन्होंने फिर से जीत दर्ज की। 2008 में भाजपा के नरोत्तम मिश्रा ने उन्हें हराया था। इसके बाद उन्होंने सेवढ़ा सीट का रुख किया। 2013 में वे सेवढ़ा से चुनाव हार गए थे। 2018 में उन्होंने सेवढ़ा सीट पर जीत दर्ज की। लेकिन 2023 में उन्हें फिर हार मिली।



चुनाव प्रचार के दौरान घनश्याम सिंह ने आशुतोष तिवारी पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आशुतोष को भ्रष्ट और विवादास्पद बताया था। उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने का आरोप भी लगाया गया था। यह आरोप सेवढ़ा क्षेत्र से जुड़ा बताया गया था। अब खुद घनश्याम सिंह की सदस्यता पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।



शपथपत्र में जानकारी छिपाना गंभीर

जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत चुनावी शपथपत्र में जानकारी छिपाना गंभीर माना जाता है। यदि कोर्ट में आरोप सही पाया गया, तो सदस्यता रद्द भी हो सकती है। ऐसे मामलों में पहले भी कई नेताओं की सदस्यता पर असर पड़ा है। इसी वजह से यह याचिका दतिया की राजनीति में हलचल मचा रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों की नजर अब हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। आने वाले दिनों में इस मामले में नई जानकारी सामने आ सकती है।



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