दतिया उपचुनाव की तैयारी शुरू: राजेंद्र भारती अयोग्यता मामले की सुनवाई से पहले EVM जांच के आदेश
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
- दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को 1998 के बैंक घोटाले में 3 साल की सजा मिली है।
- दो साल से ज्यादा सजा होने पर उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई है।
- भारती ने राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
- हाईकोर्ट में 26 मई को सुनवाई होनी है, यानी अभी 10 दिन बाकी हैं।
- इससे पहले ही चुनाव आयोग ने दतिया में उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी है।
चुनाव आयोग ने दी दस्तक
केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। शुक्रवार, 15 मई को आयोग की ओर से दतिया कलेक्टर को पत्र भेजा गया है। इसमें ईवीएम (Electronic Voting Machine) और वीवीपीएट (Voter Verifiable Paper Audit Trail) मशीनों की एफएलसी (First Level Checking) कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह पत्र उस वक्त आया है जब दिल्ली हाईकोर्ट में दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर 26 मई को सुनवाई होनी है।
जानकारी के अनुसार, पत्र मिलते ही दतिया कलेक्टर आईएएस स्वप्निल वानखड़े ने 19 मई की तारीख तय कर दी है। सभी राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों को इसके लिए आमंत्रण भी भेज दिया गया है। साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि 25 मई तक दतिया नगर पालिका क्षेत्र में मतदाता जोड़ने, घटाने और दावे-आपत्तियां दर्ज करने का काम होगा।
EVM जांच की पूरी तैयारी
चुनाव आयोग के भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से जारी पत्र में छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। इनमें एफएलसी सुपरवाइजर की नियुक्ति, कंट्रोल यूनिट के लिए पिंक पेपर की व्यवस्था, ईवीएम की सुरक्षा के लिए स्ट्रॉन्ग रूम तैयार करना और जिला निर्वाचन अधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट जैसी जरूरी जानकारियां शामिल हैं।
दतिया जिला प्रशासन के मुताबिक, विधानसभा में मतदान केंद्रों की संख्या 257 से बढ़ाकर 291 कर दी गई है। 200 प्रतिशत मशीनों की एफएलसी कराने के आदेश मिले हैं।
इसका मतलब है कि करीब 600 बैलेट यूनिट, 600 कंट्रोल यूनिट और 600 वीवीपीएट मशीनों की जांच होगी। डिप्टी कलेक्टर विजेंद्र यादव को एफएलसी सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है। मशीनों के लिए पुख्ता टेबल, बिजली की निर्बाध आपूर्ति और कड़े पहरे के भी निर्देश दिए गए हैं।
27 साल पुराना बैंक घोटाला
यह पूरा मामला दतिया जिला सहकारी व ग्रामीण विकास बैंक में हुई एफडी (Fixed Deposit) हेराफेरी से जुड़ा है। यह घोटाला करीब 27 साल पुराना है। यह धोखाधड़ी का मामला है इसलिए इसे क्रिमिनल यानी आपराधिक मामला माना गया है।
कोर्ट ने राजेंद्र भारती को इस मामले में तीन साल की सजा सुनाई है। चूंकि यह सजा दो साल से ज्यादा है, इसलिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) 1951 की धारा 8(3) के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता खुद-ब-खुद खत्म हो गई।
कानून क्या कहता है?
इस पूरे मामले का कानूनी आधार 2013 का एक ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट का फैसला है। लिली थॉमस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि सजा सुनाए जाने के साथ ही सांसद या विधायक की सदस्यता खत्म मानी जाएगी।
इसके लिए किसी अलग अधिसूचना या नोटिफिकेशन की जरूरत नहीं होगी। इससे पहले इस कानून में कुछ राहत का प्रावधान था, लेकिन इस फैसले ने वह रास्ता बंद कर दिया है। यही फैसला अब राजेंद्र भारती के मामले में कानूनी आधार बन रहा है।
भारती बोले, जल्दबाजी क्यों?
पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती ने चुनाव आयोग की इस तत्परता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग किसी एक व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए इतनी जल्दी में है। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, तब तक चुनाव आयोग को इस तरह की कार्यवाही नहीं करनी चाहिए। भारती की यह दलील अब 26 मई को हाईकोर्ट में भी सुनी जाएगी।
अब आगे क्या होगा?
19 मई को ईवीएम और वीवीपीएट की जांच शुरू होगी। 25 मई तक मतदाता सूची में बदलाव का काम चलेगा। 26 मई को दिल्ली हाईकोर्ट भारती की याचिका पर सुनवाई करेगा। यदि हाईकोर्ट से राहत मिली तो उपचुनाव की नौबत नहीं आएगी। वहीं, यदि याचिका खारिज हुई तो दतिया में जल्द ही चुनाव की घोषणा हो सकती है।
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