दतिया वोटिंग से पहले प्रशासन बना चुनावी मुद्दा! कांग्रेस ने चुनाव आयोग के दरवाजे पर बढ़ाया दबाव
समझें क्या है पूरा मामला
- दतिया उपचुनाव से पहले कांग्रेस ने शिकायत की।
- पार्टी ने प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
- कलेक्टर और एसपी की भूमिका पर आरोप लगाए।
- बाहरी लोगों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई।
- कांग्रेस ने चुनाव आयोग से कार्रवाई मांगी है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
दतिया उपचुनाव में मतदान से पहले कांग्रेस ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने जिला प्रशासन और पुलिस पर निष्पक्षता को लेकर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का कहना है कि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो निष्पक्ष मतदान प्रभावित हो सकता है।
मतदान से पहले बदला चुनाव का मुद्दा
चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद कांग्रेस ने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने भाजपा के बजाय चुनाव प्रक्रिया संभाल रहे अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी समय पर सुनवाई नहीं कर रहे हैं। पार्टी ने चुनाव आयोग के निर्देशों के पालन पर भी सवाल उठाए हैं।
किन अधिकारियों पर उठाए सवाल?
कांग्रेस ने अपनी शिकायत में केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विजय भारती, दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और पुलिस अधीक्षक आईपीएस मयूर खंडेलवाल सहित अन्य अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि कई बार फोन करने के बावजूद अधिकारी उपलब्ध नहीं होते और शिकायतों के समाधान में देरी की जा रही है।
स्थानांतरित पुलिसकर्मियों की ड्यूटी पर भी आपत्ति
कांग्रेस का आरोप है कि जिन पुलिस अधिकारियों का पहले स्थानांतरण हो चुका है, उन्हें भी चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है। पार्टी का कहना है कि ऐसे अधिकारी निष्पक्ष माहौल बनाने के बजाय कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दबाव बना रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बाहरी लोगों की मौजूदगी पर भी सवाल
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से कहा है कि प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद भी भाजपा से जुड़े बाहरी लोग ग्रामीण इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। पार्टी का आरोप है कि ये लोग मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस ने ऐसे लोगों की जांच कर उन्हें विधानसभा क्षेत्र से बाहर भेजने की मांग की है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से क्या मांगा गया?
- शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
- निष्पक्ष अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित हो।
- बाहरी लोगों की जांच कर उन्हें विधानसभा क्षेत्र से हटाया जाए।
- चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाए।
- मतदान पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण माहौल में कराया जाए।
अब नजर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर
मतदान से ठीक पहले सामने आई इस शिकायत ने दतिया की चुनावी सियासत को नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और मतदान के दिन प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।
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