दतिया के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को जेल: भूमि विकास बैंक घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

Sanjay Dhiman | Apr 01, 2026, 17:10 IST
Photograph: (the sootr)
दतिया के विधायक राजेंद्र भारती को भूमि विकास बैंक घोटाले में दोषी करार देते हुए दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेज दिया है। उन पर 25 साल पुराना धोखाधड़ी का आरोप है।

मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने भूमि विकास बैंक घोटाले में दोषी ठहराया है। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दोषी माना। इस फैसले के बाद राजेंद्र भारती को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। यह मामला बैंक से जुड़े फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया। बता दें कि राजेंद्र भारती भाजपा के कद्दावर नेता व पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को चुनाव में हराकर विधायक बने थे।



1998 में 10 लाख की एफडी से शुरू हुआ मामला

यह मामला दतिया के District Cooperative Rural Development Bank Datia से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि वर्ष 1998 में की गई एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की अवधि को फर्जी तरीके से बढ़ाकर बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।



जानकारी के अनुसार 24 अगस्त 1998 को विधायक राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम ने Shyam Sundar Shyam Jan Sahayog Evam Samudayik Vikas Sansthan की अध्यक्ष के रूप में दतिया के जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपए की एफडी कराई थी। यह एफडी 3 साल के लिए 13.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर कराई गई थी।



उस समय बैंक के अध्यक्ष थे राजेंद्र भारती

मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस समय यह एफडी कराई गई, उस दौरान 1998 से 2001 तक राजेंद्र भारती ही बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे। साथ ही वे उस संस्था के Board of Trustees के सदस्य भी थे, जिसके नाम पर एफडी कराई गई थी। यानी बैंक और संस्था दोनों जगह उनका हित जुड़ा हुआ था।



एफडी 3 से बढ़ाकर 15 साल करने का आरोप

अभियोजन के अनुसार राजेंद्र भारती ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति के साथ मिलकर बैंक के दस्तावेजों में काट-छांट कराई। जांच में सामने आया कि लेजर बुक, एफडी काउंटर स्लिप, एफडी की रसीद जैसे दस्तावेजों में बदलाव कर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर पहले 10 साल और फिर 15 साल कर दी गई। एफडी की अवधि बढ़ाने का उद्देश्य यह था कि 13.50 प्रतिशत की ऊंची ब्याज दर का लाभ लगातार 15 साल तक मिलता रहे।





अभियोजन के अनुसार इससे हर साल लगभग 1 लाख 35 हजार रुपये का फायदा आरोपी पक्ष को हुआ। यह लाभ सावित्री श्याम और उनसे जुड़ी संस्था को मिलता रहा, जबकि बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ।



1999 से 2011 तक हुआ लाभ

जांच में सामने आया कि वर्ष 1999 से 2011 तक हर साल ब्याज के रूप में करीब 1,35,000 रुपये का अनुचित लाभ लिया गया। इस तरह कुल मिलाकर लंबे समय तक बैंक को नुकसान और आरोपी पक्ष को फायदा पहुंचाया गया।



ऑडिट में सामने आई गड़बड़ी

जब राजेंद्र भारती बैंक के अध्यक्ष पद से हट गए, तब बैंक के ऑडिट के दौरान इस एफडी में गड़बड़ी सामने आई। ऑडिटर ने एफडी की अवधि अनधिकृत रूप से बढ़ाने पर आपत्ति (Audit Objection) दर्ज की। इसके बाद संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं के निर्देश पर इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। इस मामले में 29 जुलाई 2015 को दतिया के CJM कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मामला आगे बढ़ते हुए विशेष अदालत में पहुंचा।



किन धाराओं में लगे आरोप?

विशेष अदालत ने आरोपी राजेंद्र भारती पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे



  • धारा 420 – धोखाधड़ी
  • धारा 467 – जालसाजी
  • धारा 468 – धोखाधड़ी के लिए जालसाजी
  • धारा 471 – फर्जी दस्तावेज का उपयोग
  • धारा 120B – आपराधिक साजिश

वहीं, बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति को बाद में धारा 319 CrPC के तहत आरोपी बनाया गया। उन पर उपरोक्त धाराओं के अलावा धारा 409 – आपराधिक विश्वासघात भी लगाई गई।



सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा मामला

इस मामले में आरोपी पक्ष द्वारा कानूनी चुनौती भी दी गई थी। लेकिन Supreme Court of India ने क्रिमिनल अपील नंबर 2764/2024 में इस मामले में अभियोजन की कार्रवाई को बरकरार रखा था।



अभियोजन पक्ष ने अदालत में दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने पाया कि प्रस्तुत साक्ष्यों से मामला संदेह से परे प्रमाणित होता है। इसी आधार पर विशेष अदालत ने 1 अप्रैल 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दे दिया।



सजा का ऐलान 2 अप्रैल को

दिल्ली की विशेष MP-MLA कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अब इस मामले में अगला अहम कदम सजा का ऐलान है, जो 2 अप्रैल को होगा। अदालत इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनकर तय करेगी कि दोषियों को कितनी सजा दी जाए। अभियोजन पक्ष सख्त सजा की मांग कर सकता है। वहीं, बचाव पक्ष सजा में नरमी की अपील कर सकता है।



पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर बने थे विधायक

पिछले 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक और हाई-प्रोफाइल था। कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को करारी शिकस्त दी थी।



राजेंद्र भारती ने यह चुनाव 7,742 वोटों के अंतर से जीता था।



इस चुनाव के मुख्य आंकड़े कुछ इस प्रकार रहे:



  • राजेंद्र भारती (कांग्रेस): 88,977 वोट (लगभग 50.34%)
  • नरोत्तम मिश्रा (बीजेपी): 81,235 वोट (लगभग 45.96%)
  • जीत का अंतर: 7,742 वोट

यह जीत इसलिए भी बड़ी मानी गई क्योंकि इससे पहले लगातार तीन चुनावों (2008, 2013 और 2018) में नरोत्तम मिश्रा ने राजेंद्र भारती को हराया था। 2018 में तो हार का अंतर बहुत ही कम (मात्र 2,656 वोट) था।



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