दतिया में मंच से भाषण दे रहे पटवारी ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष को देख गले लगाया
समझें क्या है पूरा मामला
- दतिया विधानसभा उपचुनाव की रैली में रविवार को अनोखा नजारा दिखा।
- कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सभा को संबोधित कर रहे थे।
- तभी बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का काफिला वहां से गुजरा।
- पटवारी ने तिवारी को मंच पर आने का न्योता दिया।
- दोनों नेता मुस्कुराते हुए गले मिले, तस्वीर वायरल हो गई।
दतिया विधानसभा उपचुनाव की चुनावी सरगर्मी के बीच रविवार को अलग नजारा दिखा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अपनी पार्टी की सभा को संबोधित कर रहे थे। तभी बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का काफिला वहां से गुजरा। पटवारी ने भाषण रोककर तिवारी को मंच पर बुलाया। तिवारी मंच पर पहुंचे और दोनों नेता मुस्कुराते हुए गले मिले। यह पल कैमरे में कैद हो गया। देखते ही देखते यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
मंच पर गले मिले दोनों नेता
घटना दतिया की एक चुनावी सभा के दौरान हुई। पटवारी मंच से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में भाषण दे रहे थे। इसी बीच उन्होंने तिवारी का काफिला गुजरते देखा। उन्होंने माइक पर ही तिवारी को मंच पर बुलाया। तिवारी बिना देर किए मंच की ओर बढ़े। दोनों नेताओं ने पहले हाथ मिलाया। फिर दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया। भीड़ में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। कई लोगों ने अपने मोबाइल से यह पल कैद किया। कुछ ही मिनटों में यह वीडियो हर तरफ फैल गया।
पहले भी दिख चुकी है यह गर्मजोशी
यह पहला मौका नहीं है, जब ऐसी गर्मजोशी दिखी हो। इससे पहले भी एक तस्वीर सुर्खियों में रही थी। जीतू पटवारी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की तस्वीर चर्चा में आई थी। दोनों नेता ट्रेन में साथ बैठे नजर आए थे। वे चाय पीते और बातचीत करते हुए दिखे थे। उस तस्वीर ने भी सियासी हलकों में खासी चर्चा बटोरी थी। लोगों ने इसे राजनीतिक शिष्टाचार का अच्छा उदाहरण बताया था।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को लोकतंत्र की अच्छी परंपरा मान रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव में वैचारिक टकराव स्वाभाविक बात है। लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर शिष्टाचार बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। कुछ लोग इसे शुद्ध चुनावी रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं। दोनों पार्टियां दतिया सीट जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं। ऐसे माहौल में हर बयान और हरकत पर लोगों की नजर रहती है। इसी वजह से यह छोटी सी घटना भी बड़ी खबर बन गई।
तीखी बयानबाजी भी जारी है
गर्मजोशी के इस पल के बावजूद तीखी बयानबाजी थमी नहीं है। जीतू पटवारी पहले ही बड़ा दावा कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस यह सीट पच्चीस हजार वोटों से जीतेगी। उनके मुताबिक जनता का भारी समर्थन कांग्रेस के साथ है। इसके जवाब में आशुतोष तिवारी ने भी पटवारी पर निशाना साधा था। तिवारी ने कहा था कि बीजेपी के लिए दतिया में कोई मुकाबला नहीं है। उन्होंने डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों का हवाला दिया था। तिवारी ने पटवारी से उनकी पुरानी हार का हिसाब भी मांगा था।
कौन हैं दोनों प्रत्याशी
बीजेपी ने दतिया सीट से आशुतोष तिवारी को टिकट दिया है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह उन्हें उतारा है। मिश्रा को 2023 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर हार मिली थी। वहीं कांग्रेस ने कुंवर घनश्याम सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। घनश्याम सिंह को राजा साहब के नाम से भी जाना जाता है। वे इससे पहले 1993 और 2003 में भी यह सीट जीत चुके हैं। दोनों प्रत्याशियों के बीच मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।
सीट खाली होने की वजह
दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य होने से खाली हुई थी। भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी। यह कार्रवाई जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation Of The People Act) के तहत हुई। इसकी धारा 8 का इस्तेमाल किया गया। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 191(1)(ई) का भी हवाला दिया गया। इसी वजह से अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है।
कब होगी वोटिंग और नतीजे
निर्वाचन आयोग (Election Commission Of India) ने उपचुनाव का कार्यक्रम जारी किया है। इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा। वोटों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी। तब तक दोनों पार्टियां चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रही हैं। नरोत्तम मिश्रा भी तिवारी के समर्थन में लगातार प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि बीजेपी बड़े अंतर से यह सीट जीतेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी मिश्रा से तिवारी को समर्थन देने को कहा है। नामांकन के दौरान मिश्रा और मुख्यमंत्री दोनों साथ नजर आए थे। इससे पार्टी ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की थी।
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