हीरोगिरी कर रहे टीआई की जिद ने ले ली पीएचडी छात्रा की जान, मौत के बाद लिखी एफआईआर
मध्य प्रदेश के दतिया जिले से एक बेहद दुखद और झझोंर देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक होनहार बेटी आखिरकार हमारे सिस्टम की अनदेखी और पुलिस के खराब बर्ताव के आगे हार गई।
24 साल की एक छात्रा ने शुक्रवार, 15 मई की शाम को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। बता दें कि वे जीवाजी यूनिवर्सिटी से PhD कर रही थी। छात्रा दतिया के गोराघाट थाना क्षेत्र में रह रही थी और वहीं उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
जानकारी के अनुसार छात्रा के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इस नोट में उसने अपनी मौत के लिए बलात्कार के आरोपी योगेश रावत और उसकी दो बहनों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
इस घटना के बाद से पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली और उनके दावों पर बहुत बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या था पूरा मामला?
पीड़ित छात्रा का आरोप था कि ग्वालियर के अलग-अलग होटलों में उसे नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ बलात्कार किया गया था। इस गलत काम की वजह से वह गर्भवती भी हो गई थी।
जब उसे इस बात का पता चला तो वह पुलिस के पास मदद मांगने गई लेकिन उसे वहां से सिर्फ निराशा और प्रताड़ना ही मिली।
न्याय के लिए 9 दिन में 5 बार थाने
जानकारी के अनुसार पीड़ित छात्रा न्याय पाने के लिए नौ दिनों के अंदर पांच बार पड़ाव थाने और एसपी कार्यालय के चक्कर काटती रही। हर बार जब भी वह थाने जाती पुलिस वाले उसे घंटों थाने में बैठाकर रखते थे।
छात्रा का आरोप था कि पड़ाव थाना प्रभारी (TI) शैलेंद्र भार्गव उसकी बात सुनने को तैयार नहीं थे। वह हर बार पीड़ित छात्रा से एक ही बात कहते रहे कि पहले हम आरोपी को पकड़ेंगे उसके बाद ही तुम्हारा केस (FIR) दर्ज होगा।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस मामले में एसपी (SP) ने भी निर्देश दिए थे। उनके आदेश के बाद भी पड़ाव थाना पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
लगातार मिल रहे मानसिक दबाव और पुलिस सिस्टम की इस प्रताड़ना से वह अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी। आखिर में अस्पताल से घर लौटने के बाद उसने अपनी जिंदगी खत्म कर ली।
आरक्षक भाई भी नहीं दिला सका न्याय
इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आम जनता की तो छोड़िए, यहां खुद पुलिस विभाग से जुड़े लोग सुरक्षित नहीं हैं।
मृतका का सगा भाई ग्वालियर पुलिस में ही आरक्षक के पद पर तैनात है। सिर्फ इतना ही नहीं उसका जीजा भी दतिया जिले में आरक्षक पद पर काम कर रहा है।
इसके बावजूद पीड़ित छात्रा को न्याय के लिए पड़ाव थाने और एसपी दफ्तर के लगातार चक्कर काटने पड़े। उसके साथ उसका आरक्षक भाई और पुलिस विभाग से जुड़े दूसरे रिश्तेदार भी अधिकारियों के सामने कार्रवाई की गुहार लगाते रहे। इसके बावजूद पड़ाव थाने की पुलिस के कान पर जूं तक नहीं रेंगी और उन्होंने अपनों की भी नहीं सुनी।
मौत के बाद जागी पुलिस
पड़ाव पुलिस की संवेदनहीनता और उनकी जल्दबाजी ने उनके सभी झूठे दावों की पोल खोलकर रख दी है। शुक्रवार की शाम करीब 6 बजे जब युवती ने फांसी लगाकर जान दे दी तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
जैसे ही पुलिस को इस बात की खबर मिली कि छात्रा ने आत्महत्या कर ली है वही टीआई (TI) शैलेंद्र भार्गव जो 9 दिन से पीड़िता को थाने के चक्कर लगवा रहे थे अचानक एक्शन में आ गए।
उन्होंने अपनी गलती छुपाने के लिए उसी रात जल्दबाजी में बलात्कार का मामला दर्ज कर लिया।
मेडिकल के लिए बुला रही थी पुलिस
पुलिस की लापरवाही और संवेदनहीनता का सबसे हैरान करने वाला चेहरा शनिवार, 16 मई की सुबह देखने को मिला। उस समय मृतका का शव दतिया के पोस्टमार्टम हाउस में रखा हुआ था।
पूरा परिवार रो रहा था और अपनी बेटी खोने के गम में डूबा था। तभी पड़ाव थाने की जेएसआई पूनम भदौरिया ने मृतका के आरक्षक भाई को फोन किया।
फोन पर जेएसआई पूनम भदौरिया ने कहा कि पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए थाने लेकर आओ। बहन की मौत से टूट चुके भाई ने रोते हुए पुलिस अधिकारी को जवाब दिया कि अब तो उसकी लाश ही लेकर आएंगे।
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