दतिया: भाजपा से मिश्रा अकेले दावेदार, कांग्रेस में जंग, जातियों के भरोसे सभी दल
समझें क्या है पूरा मामला
- दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को वोटिंग होगी और 3 अगस्त को नतीजे आएंगे।
- यहां जातिगत समीकरण चुनाव में हमेशा बड़ी भूमिका निभाता आया है
- भाजपा से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम लगभग तय माना जा रहा है।
- आजाद समाज पार्टी यानी एएसपी (Azad Samaj Party) से दामोदर यादव अकेले दावेदार हैं।
- कांग्रेस में टिकट के लिए कई नेता आपस में दावेदारी जता रहे हैं।
भाजपा से नरोत्तम मिश्रा लगभग तय
दतिया सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा की तरफ से पूर्व गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे है। पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा उन्हें ही उम्मीदवार बना सकती है। दतिया जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाहा ने भी इसके साफ संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि 2023 के नतीजों को गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि जनता का भरोसा भाजपा पर लगातार बढ़ा है। कुशवाहा ने दावा किया कि पार्टी इस बार रिकॉर्ड मतों से जीतेगी।
नरोत्तम मिश्रा साल 2008 से लगातार दतिया से विधायक चुने जाते रहे हैं। 2023 में हार के बाद भी वे क्षेत्र में सक्रिय बने रहे। हाल ही में उन्होंने भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब आधा घंटे तक चली थी। इसके बाद से उपचुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
जातिगत समीकरण निभाएगा अहम भूमिका
दतिया सीट पर जातिगत समीकरण चुनाव में बड़ी भूमिका निभाता है। यहां ब्राह्मण और कुशवाहा समाज के वोटर करीब बराबर हैं। दोनों समाज के वोटर करीब 27 से 30 हजार के बीच हैं। यही दो समाज इस सीट पर निर्णायक माने जाते हैं।
इसके बाद यादव और क्षत्रिय समाज के करीब 14 से 15 हजार वोटर हैं। रावत, लोधी और वैश्य समाज के भी करीब 10-10 हजार वोटर हैं। नरोत्तम मिश्रा को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जाता है। पिछले कई सालों से उन्हें इस समाज का मजबूत समर्थन मिलता रहा है। भाजपा इसी जातिगत गणित के आधार पर उन्हें फिर मैदान में उतार सकती है।
कांग्रेस में टिकट पर घमासान, बगावत का अंदेशा
कांग्रेस खेमे में उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस अभी भी बना हुआ है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट मांग रहे हैं। हाल ही में दोनों ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात भी की थी। पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि सहानुभूति कार्ड फायदा दिला सकता है।
वहीं दूसरी तरफ अवधेश नायक भी टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। अवधेश नायक पिछले चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। वे पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट बंटवारे से असंतोष बढ़ सकता है। अगर अवधेश नायक को टिकट मिलता है तो भारती परिवार नाराज हो सकता है। ऐसी स्थिति में अनुज भारती निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकते हैं। इससे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बंट सकते हैं। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।
एएसपी से दामोदर ठोंक रहे ताल
आजाद समाज पार्टी यानी एएसपी ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी की तरफ से दामोदर यादव को उम्मीदवार बनाया जाना तय है। नवभारत से बातचीत में दामोदर यादव ने अपनी रणनीति साफ बताई। उन्होंने कहा कि पार्टी युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने किसानों की समस्याओं और महंगाई को भी बड़ा मुद्दा बताया।
दामोदर यादव ने दावा किया कि पार्टी उन्हें उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। उनके अनुसार सिर्फ औपचारिक ऐलान बाकी है। यादव ने कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है। उन्होंने भाजपा और नरोत्तम मिश्रा पर भी कई आरोप लगाए। उनका दावा है कि इस बार नतीजे अलग होंगे।
सीट क्यों हुई खाली
दतिया सीट से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म हो गई थी। उन्हें सहकारिता बैंक धोखाधड़ी मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया था। एमपी एमएलए कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी।
इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने 2 अप्रैल को सीट खाली घोषित कर दी। संविधान के नियमों के अनुसार छह महीने में सीट पर चुनाव जरूरी होता है। इसी वजह से अब दतिया में उपचुनाव कराया जा रहा है। चुनाव आयोग ने वोटिंग और मतगणना की तारीखें भी तय कर दी हैं। 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को परिणाम आएंगे। नामांकन की प्रक्रिया 6 जुलाई से 13 जुलाई तक चलेगी।
2023 में क्यों हारे मिश्रा
2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को बड़ा झटका लगा था। कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने उन्हें 7742 वोटों से हराया था। भारती को 88977 वोट मिले थे जबकि मिश्रा को 81235 वोट मिले थे। गिनती के 13 राउंड में से मिश्रा सिर्फ तीन राउंड में आगे रहे थे।
दसवें राउंड तक भारती करीब आठ हजार वोटों से आगे चल रहे थे। बसई के शहरी इलाके ने 2018 में मिश्रा को जीत दिलाई थी। लेकिन 2023 में यह चमत्कार नहीं दोहराया जा सका। आखिरी राउंड में मिली बढ़त भी हार टालने के लिए काफी नहीं थी। इसी हार के चलते भाजपा अब यह सीट वापस चाहती है।
मंत्री विजयवर्गीय का दावा
भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दतिया उपचुनाव में भाजपा की जीत तय है। उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा ही होंगे या नहीं, इस सवाल पर उन्होंने सतर्क जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नाम का ऐलान होने पर जनता को बताया जाएगा। इस बयान से कयासों का दौर और तेज हो गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है।
आगे क्या होगा
नामांकन प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू होकर 13 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद उम्मीदवारों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। 30 जुलाई को मतदान होगा और नतीजे 3 अगस्त को आएंगे। दतिया की जनता तय करेगी कि सीट किसके पास जाएगी। यह उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों की साख से जुड़ा है। साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि एएसपी कितना असर डाल पाती है।
जरूरी FAQ
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है?
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारिता बैंक धोखाधड़ी मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराया था। एमपी एमएलए कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई। विधानसभा सचिवालय ने 2 अप्रैल को सीट को खाली घोषित किया, और संवैधानिक प्रावधान के तहत छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना जरूरी है।
दतिया विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण क्या है?
दतिया सीट पर ब्राह्मण और कुशवाहा समाज के वोटर करीब बराबर और निर्णायक हैं, दोनों की संख्या करीब 27 से 30 हजार के बीच है। इसके बाद यादव और क्षत्रिय समाज के करीब 14 से 15 हजार वोटर हैं, जबकि रावत, लोधी और वैश्य समाज के भी करीब 10-10 हजार वोटर हैं। नरोत्तम मिश्रा को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जाता है, जिन्हें इस समाज का मजबूत समर्थन मिलता रहा है।
दतिया से किन पार्टियों के उम्मीदवार तय माने जा रहे हैं?
भाजपा से पूर्व गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का नाम लगभग तय है, हालांकि पार्टी ने अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आजाद समाज पार्टी (एएसपी) से दामोदर यादव को उम्मीदवार बनाया जाना तय माना जा रहा है। कांग्रेस में अभी टिकट को लेकर अनुज भारती और अवधेश नायक के बीच खींचतान जारी है।
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