दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सीट खाली, विधानसभा सदस्यता रद्द
दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती (Congress MLA Rajendra Bharti) की विधानसभा सदस्यता अब रद्द हो गई है। यह आदेश मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने जारी किया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि दतिया विधानसभा की सीट अब खाली हो गई है। माना जा रहा है कि विधानसभा क्षेत्र में अब उपचुनाव होंगे।
आदेश में बताया गया है कि राजेंद्र भारती के खिलाफ विशेष न्यायाधीश दिग्विजय सिंह (पीसी एक्ट) ने 2 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा और 1 लाख रुपए जुर्माना लगाया है।
देर रात विधानसभा पहुंचे थे प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा
गुरुवार रात विधानसभा में अचानक प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा के पहुंचने से राजनीतिक हलचल मच गई थी। जैसे ही ये खबर मिली, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कई कांग्रेसी नेता विधानसभा पहुंच गए। उन्होंने प्रमुख सचिव से मुलाकात की और रात में अचानक दफ्तर आने का कारण पूछा।
'भारती की सदस्यता खत्म करने की तैयारी हो रही थी'
जीतू पटवारी और पीसी शर्मा ने कहा था कि उनके आने के बाद विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा वहां से चले गए। उनका कहना था कि रात के 10:30 बजे विधानसभा सचिवालय खोलकर राजेंद्र भारती के मामले में आदेश जारी करने की तैयारी हो रही थी, जबकि कोर्ट ने उन्हें अपील करने के लिए 60 दिन का समय दिया है।
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि अगर मध्यप्रदेश विधानसभा पूरी रात तक चलती नहीं है, तो फिर रात में दफ्तर खोलने का और क्या कारण हो सकता है।
क्या है पूरा मामला
गुरुवार दोपहर दिल्ली की अदालत ने भारती को 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में सजा सुनाई थी। भारती (rajendra bharti datia) को आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी में दोषी ठहराया गया था। उन्हें 3 साल की सजा और एक लाख रुपए जुर्माना भरने का आदेश दिया गया।
भारती के साथ सह-आरोपी बैंक बाबू रघुवीर प्रसाद प्रजापति को भी यही सजा सुनाई गई। कोर्ट ने दोनों को जमानत दी और हाई कोर्ट में अपील के लिए 60 दिन का समय दिया। इस अवधि तक सजा निलंबित रहेगी। यानी दोनों को अभी जेल नहीं जाना होगा।
क्या है पूरा फर्जीवाड़ा
यह मामला दतिया जिला सहकारी व ग्रामीण विकास बैंक में एफडी हेराफेरी से जुड़ा है और करीब 27 साल पुराना है। मामला धोखाधड़ी का है। इसलिए यह एक क्रिमिनल (Criminal) यानी आपराधिक केस माना गया है।
क्या कहता है कानून
इस पूरे मामले की जड़ में है जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) है। इस धारा के मुताबिक, यदि किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो उसकी सदस्यता खत्म मानी जाती है। पहले इसमें कुछ राहत मिलती थी, लेकिन 2013 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने इसे बदल दिया था।
दरअसल, लिली थॉमस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि सजा सुनाए जाने के साथ ही सदस्यता खत्म मानी जाएगी। इसके लिए किसी अतिरिक्त नोटिफिकेशन की जरूरत नहीं होगी। यही फैसला अब भारती के मामले में कानूनी आधार बन रहा है।
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